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Tuesday, February 9

दमा दूर करने के लिए भस्त्रिका प्राणायाम करें !




By- Yogaguru Suneel Singh


 भस्त्रिका का मतलब है धौंकनी। इस प्राणायाम में साँस की गति धौकनी की तरह हो जाती है। यानि श्वास की प्रक्रिया को जल्दी-जल्दी करना ही कहलाता है भस्त्रिका प्राणायाम।






विधि:



  1. पद्मासन या फिर सुखासन में बैठ जाएं। कमर, गर्दन, पीठ एवं रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए शरीर को बिल्कुल स्थिर रखें।

  2. बिना शरीर को हिलाए दोनों नसिका छिद्र से आवाज़ के करते हुए श्वास भरें। फिर आवाज़ करते हुए ही श्वास को बाहर छोड़ें।

  3. अब तेज गति से आवाज़ लेते हुए साँस भरें और बाहर निकालें।



यही क्रिया भस्त्रिका प्राणायाम कहलाती है। हमारे दोनों हाथ घुटने पर ज्ञान मुद्रा में रहेंगे और आँखें बंद रहेगी। ध्यान रहे श्वास लेते और छोड़ते वक़्त हमारी लय ना टूटे। नये अभ्यासी इस क्रिया को शुरू-शुरू में 10 बार ही करें।




लाभ व प्रभाव:




  • भस्त्रिका प्राणायाम के अभ्यास से मोटापा दूर होता है।

  • शरीर को प्राणवायु अधिक मात्रा में मिलती है और कार्बन-डाई-ऑक्साइड शरीर से बाहर निकलती है।

  • इस प्राणायाम से रक़्त की सफाई होती है।

  • शरीर के सभी अंगों तक रक़्त का संचार भलि-भाँति होता है।

  • जठराग्नि तेज़ हो जाती है, दमा, टीवी और साँसों के रोग दूर हो जाते हैं।

  • फेफडे़ को बल मिलता है, स्नायुमंडल सबल होते है।

  • वात, पित्त और कफ़ के दोष दूर होते है।

  • इस अभ्यास से पाचन संस्थान, लीवर और किडनी की मसाज होती है।





सावधानियाँ:



उच्च रक्तचाप, हृदय रोगी, हर्निया, अल्सर, मिर्गी स्ट्रोक और गर्भवती महिलाएं इसका अभ्यास ना करें।




विशेष:



नये अभ्यासी इस प्राणायाम के अभ्यास से पहले 2 गिलास जल अवश्य लें। शुरू-शुरू में आराम ले कर अभ्यास करें। ज़्यादा लाभ उठाना हो तो योग गुरु के सान्निध्य में ही करें।





(Yoga guru suneel singh is one of the top 5 yoga gurus in India.)