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Monday, January 2

जानें स्वप्नदोष (Nocturnal emission) का कारण और उपचार




स्वप्न मेँ किसी के साथ रति क्रिया करते हुए वीर्यपात का होना स्वप्नदोष कहलाता है।स्वपनदोष को माह मे 1 से 2 बार होना चिँताजनक नहीँ परंतु अधिक होने पर शरीर में कमजोरी आने लगती है एवं शीघ्रपतन, नपुंसकता जैसी भी स्थिति बन सकती है |

कारण :

  • जिन्होँने किशोरावस्था में (12-17 वर्ष ) के समय मेँ अपने हाथोँ से वीर्यवाहक नली (Spermatic cord) को आघात पहुचाया हो और अपनी वीर्य नष्ट किया हो, अर्थात हस्तमैथुन किया हो |

  • अश्लील साहित्य अथवा चिंतन करते हों उन्हें अक्सर यह रोग होता है ।

  • इसके अतिरिक्त कब्ज का रहना, अधिक मिर्च-मसालों का सेवन, फास्टफूड, जंकफूड एवं अन्य अप्राकृतिक खाद्यों का सेवन करना |

लक्षण :

  • सोते समय वीर्यपात होना 
  • कमर मेँ दर्द

  • सिर चकराना

  • दिल ज्यादा धड़कना

  • किसी काम मेँ मन न लगना

  • लिखते-पढ़ते आँखोँ के नीचे अँधेरा आना

  • स्मृति शक्ति का कमजोर होना

    उपचार :

    1. प्रातः खाली पेट एक बताशे मेँ 10 बुँदे बरगद का दुध रख कर 3 महिने तक खायेँ । और ब्रह्मचर्य का पालन करने से स्वप्नदोष ठीक होता है | यह प्रयोग शीघ्रपतन के रोगियों के लिए भी अत्यंत लाभकर है |

    2. प्रतिदिन रात्रि को सोने से पहले 4- 5 चमच्च की मात्रा में तुलसी की जड़ का काढा कुछ हफ़्तों तक पीने से स्वप्नदोष दूर होता है |

    3. एक चमच्च की मात्रा में बड़े गोखरू के फल का चूर्ण , थोडा घी और मिश्री मिलाकर एक हफ्ते तक सुबह शाम लेने से भी स्वप्नदोष दूर होता है

    4. अपामार्ग की जड़ का चूर्ण और मिश्री को समान मात्रा में पीस कर एक साथ मिश्रण कर लें ! इस मिश्रण को एक चमच्च की मात्रा में दिन में तीन बार दो हफ्ते तक सेवन करने से स्वप्नदोष से छुटकारा मिल जाता है |

    5. इसबगोल और मिश्री बराबर मिलाकर एक चमच्च एक कप दूध के साथ रात को सोने से एक घंटे पहले लें और उसके बाद सोते समय मूत्र त्याग करके सो जाएँ ! इससे भी स्वप्नदोष का निराकरण होता है |

    6. आँवले के रस में इलायची के दाने और इसबगोल बराबर की मात्रा में मिलाकर सुबह शाम एक एक चमच्च का सेवन करने से भी स्वप्नदोष दूर होता है |
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    Wednesday, December 30

    यौन रोगों में तुलसी के उपयोग



    वीर्यवृद्धि हेतु :



    तुलसी के बीजों का चूर्ण 2 ग्राम की मात्रा में पुराने गुड़ के साथ मिलाकार खाएं और इसके बाद 1 कप दूध पीएं। इसका सेवन नियमित रूप से सुबह-शाम नियमित रूप से कुछ महीनों तक लेने से सेक्स सम्बंधी धातु की वृद्धि होती है। इससे नपुंसकता (नामर्दी) और शीघ्रपतन (धातु का शीघ्र निकल जाना) की समस्याएं दूर हो जाती है।

    धातुदुर्बलता :



    वीर्य की कमजोरी होने पर तुलसी के बीज का चूर्ण 60 ग्राम और मिश्री 75 ग्राम को एक साथ पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण प्रतिदिन 3 ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ सेवन करें। इससे धातु की कमजोरी दूर होती है।

    स्वप्नदोष :



    तुलसी की जड़ का काढ़ा 4-5 चम्मच की मात्रा में रात को सोने से पहले नियमित रूप से कुछ सप्ताह तक पीने से स्वप्नदोष से छुटकारा मिलता है।

    शीघ्रपतन :



    तुलसी की जड़ या बीज चौथाई चम्मच की मात्रा में पानी में रात को भिगोकर रख दें और सुबह उसका सेवन करें। इससे शीघ्रपतन दूर होकर वीर्य पुष्ट (गाढ़ा) होता है।

    शरीर को ताकतवर बनाना :




    1. तुलसी के बीज या पत्ते को भूनकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण के बराबर मात्रा में गुड़ मिलाकर लगभग 1-1 ग्राम की गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली गाय के दूध के साथ सुबह-शाम लेने से शरीर में भरपूर ताकत आती है।

    2. लगभग आधा ग्राम तुलसी के पीसे हुए बीजों को सादे या कत्था लगे पान के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम खाली पेट खाने से बल, वीर्य, खून बढ़ता है।

    3. लगभग 10 ग्राम तुलसी के बीजों के चूर्ण को 20 ग्राम पुराने गुड़ में मिलाकर प्रतिदिन खाने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है। इसका प्रयोग 40 दिनों तक करना चाहिए। इसका सेवन केवल सर्दी के दिनों में ही करना चाहिए क्योकि यह गर्म होता है।

    4. शौच आदि से आने के बाद सुबह के समय तुलसी के 5 पत्ते पानी के साथ खाने से बल, तेज व स्मरणशक्ति बढ़ती है।

    5. तुलसी के पत्तों का रस 8 बूंद पानी में मिलाकर प्रतिदिन पीने से मांसपेशियां और हडि्डयां मजबूत होती है।

    6. तुलसी के बीज दूध में उबालकर चीनी मिलाकर पीने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है।


    नपुंसकता :




    1. धातु दुर्बलता में तुलसी के बीज एक ग्राम दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने नपुंसकता दूर होती है और कामशक्ति बढ़ती है।

    2. तुलसी की जड़ और जमीकंद को पान में रखकर खाने से शीध्रपतन की शिकायते दूर होती है।

    3. तुलसी के बीज या तुलसी की जड़ के चूर्ण में पुराना गुड़ समान मात्रा में मिलाकर 3-3 ग्राम की गोली बना लें। यह 1-1 गोली सुबह-शाम गाय के ताजे दूध के साथ 1 से 6 सप्ताह तक लेने से नपुंसकता दूर होती है।
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