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Monday, February 6

इस प्रयोग से 7 दिनों में फोड़े-फुंसियों गायब !

फोड़े-फुंसियों या दाद-खाज खुजली जैसे त्वचा रोगों के पीछे प्रमुख रूप से रक्त का दूषित होना होता है। जब शरीर का खून दूषित हो जाता है तो कुछ समय के बाद उसका प्रभाव बाहर त्वचा पर भी नजर आने लगता है। 

त्वचा रोग - खुजली, जलन, फुंसियां, घमोरियां, लाल-सफेद चकत्ते... जैसी कई समस्याएं हैं जिनसे कभी न कभी हर कोई ग्रस्त होता है या रह चूका होता है । कई बार इन रोगों से संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने पर भी संक्रमण से फोड़े- फुंसी या खुजली जैसी कोई त्वचा संबंधी समस्या हो सकती है।

इस लेख में कुछ ऐसे घरेलू उपाय दे रहे हैं जो आजमाए और परखे हुए हैं। यह नुस्खे अत्यंत कारगर हैं |

फोड़े फुंसी की चिकित्सा :



  • थोड़ी सी साफ रूई पानी में भिगो दें, फिर हथेलियों से दबाकर पानी निकाल दें। तवे पर थोड़ा सा सरसों का तेल डालें और उसमें इस रूई को पकायें। फिर उतारकर सहन कर सकने योग्य गर्म रह जाय तब इसे फोड़े पर रखकर पट्टी बाँध दें। ऐसी पट्टी सुबह-शाम बाँधने से एक दो दिन में फोड़ा पककर फूट जायेगा। उसके बाद सरसों के तेल की जगह शुद्ध घी का उपयोग उपरोक्त विधि के अनुसार करने से घाव भर के ठीक हो जाता है।
  • नीम की पत्तियों को पीस कर फोड़े-फुंसी, दराद या खुजली वाले स्थान पर लगाने और पानी के साथ पीने से बहुत सीघ्र लाभ होता है।
  • नींबू के छोटे पत्ते खाने से लाभ होता है। नींबू में मौजूद विटामिन सी खून साफ करता है. फोड़े-फुंसियों पर नींबू की छाल पीसकर लगाएं. सप्ताह में एक बार फोड़े-फुंसिंयों पर मुल्तानी मिट्टी लगाएं. एक-दो घंटे बाद नहाएं ।
  • पालक, मूली के पत्ते, प्याज, टमाटर, गाजर, अमरुद, पपीता आदि को अपने भोजन में नियमित रूप से शामिल करें।
  • सुबह खाली पेट चार-पांच तुलसी की पत्तियां चूंसने से भी त्वचा रोगों में स्थाई लाभ होता है।
  • फोड़े फुंसियों पर वट वृक्ष या बरगद के पत्तों को गरम कर बाँधने से शीघ्र ही पक कर फूट जाते
  • आयुर्वेद के अनुसार नीम की सूखी छाल को पानी के साथ घिसकर फोड़े फुंसी पर लेप लगाने से बहुत लाभ मिलता है और धीरे-धीरे इनकी समाप्ति हो जाती है।
  • जब तक समस्या से पूरी तरह से छुटकारा नहीं मिल जाता मीठा यानी शक्कर से बनी, बासी, तली-गली और अधिक मिर्च-मसालेदार चीजों को पूरी तरह से छोड़ दें।
  • फोड़े-फुंसी, या खुजली वाले स्थान पर मूली के बीज पानी में पीस कर गरम करके लगाने से तत्काल लाभ होता होगा |



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Tuesday, January 17

इन सरल उपायों से करें दाद की छुट्टी !






By-Dr.Kailash Dwivedi
हम सभी को बरसात का मौसम अच्छा लगता है | पसीने से तर-बतर कर देने वाली गर्मी के बाद, राहत भरी मानसून की बारिश आती है । काले बादलों के इस मौसम में ठंडी हवा, बारिश की बूंदों के साथ गर्म चाय और पकौड़ों का स्वाद भला किसे अच्छा नहीं लगता | लेकिन दुर्भाग्य से इस नम और उमस भरे मौसम के साथ त्वचा की कई समस्यायें भी उत्पन्न होने लगती है। कवक, जीवाणु और परजीवी के संक्रमण बरसात के मौसम में आम हैं। इनमे से दाद इस मौसम की एक आम शिकायत है।

दाद का घरेलू उपचार :

  • शरीर की त्वचा पर कहीं भी चकत्ते हो तो उस पर नींबू के टुकड़े काटकर फिटकरी भरकर रगड़ने से चकत्ते हल्के पड़ जाते हैं और त्वचा निखर उठती है।
  • नींबू के टुकड़े को काटकर दाद पर मलने से दाद की खुजली कम हो जाती है और थोड़े ही दिनों में दाद बिल्कुल मिट जाता है। इसको शुरूआत में दाद पर लगाने से कुछ जलन सी महसूस होती है।
  • टमाटर खट्टा होता है। इसकी खटाई खून को साफ करती है। नींबू में इसी तरह के गुण होते हैं। रक्तशोधन (खून साफ करना) के लिए टमाटर को अकेले ही खाना चाहिए। रक्तदोष (खून की खराबी) से त्वचा पर जब लाल चकत्ते उठे हों, मुंह की हडि्डयां सूज गई हो, दांतों से खून निकल रहा हो, दाद या बेरी-बेरी रोग हो तो टमाटर का रस दिन में 3-4 बार पीने से लाभ होता है। कुछ सप्ताह तक रोजाना टमाटर का रस पीने से चर्मरोग (त्वचा के रोग) ठीक हो जाते हैं।
  • अंजीर का दूध लगाने से दाद मिट जाते हैं।
  • पके केले के गूदे में नींबू का रस मिलाकर लगाने से दाद, खाज, खुजली और छाजन आदि रोगों में लाभ होता है।
  • दाद, खाज और खुजली में मूंगफली का असली तेल लगाने से आराम आता है।
  • सुपारी को पानी के साथ घिसकर लेप करने से उकवत, और चकत्ते आदि रोग दूर हो जाते हैं।
  • 1 कप गाजर का रस रोजाना पीने से त्वचा के रोग ठीक हो जाते हैं।
  • त्वचा के किसी भी तरह के रोगों में मूली के पत्तों का रस लगाने से लाभ होता है।
  • 60 ग्राम नारियल का तेल में 10 ग्राम भाग गंधक को घोंटकर मलहम बना लें | दाद्युक्त स्थान पर इसे लगायें।
  • नीम की पत्तियां उबालकर, छानकर लें फिर इसके गुनगुने पानी से दाद वाले स्थान को साफ करे।
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Thursday, January 5

यह प्रयोग सिर्फ एक सप्ताह में कर देगा बिवाइयां ठीक और एड़ियां साफ, चिकनी व मुलायम






एक बहुत ही प्रसिद्द कहावत है - "जाके पैर न फटी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई ||" फटी एडियाँ न सिर्फ शरीर की सुन्दरता को कम करती हैं बल्कि इनमे पड़ी दरारें असहनीय पीड़ा भी देती हैं | आमतौर पर सर्दियों में यह समस्या अधिक होती है | पैरों की चमड़ी का सख्त हो जाना और एड़ियों का फटना जैसी समस्याएं इस मौसम में आम तौर पर उभरकर सामने आती हैं। इससे बचने के लिए हम आपको बता रहे हैं एक बेहद आसान एवं प्रभावी उपचार - 

कारण :

  • शरीर में कैल्शियम और चिकनाई की कमी होना
  • शरीर में उष्णता या खुश्की बढ़ जाना 
  • सर्दियों में नंगे पैर चलना
  • खून की कमी 
  • एड़ी व तलवों की त्वचा मोटी होती है, इसलिए शरीर के अंदर बनने वाला सीबम यानी कुदरती तेल पैर के तलवों की बाहरी सतह तक न पहुंच पाना भी एक प्रमुख कारण है।


उपचार :

रात को सोते समय चित्त लेट जाएं, हाथ की पूरी अंगुली को सरसों के तेल में भिगोकर नाभि में लगाकर 2-3 मिनट तक रगड़ते हुए तब तक मालिश करें | जब तक तेल नाभि में जज्ब न हो जाए, मालिश करते रहें। 
इस प्रयोग से सिर्फ एक सप्ताह में बिवाइयां ठीक हो जाती हैं और एड़ियां साफ, चिकनी व मुलायम हो जाती हैं।

एक अन्य उपाय :

गुनगुने पानी में थोड़ा शैंपू + एक चम्मच सोड़ा +  कुछ बूंदें डेटॉल की डालकर मिला लें। इस पानी में पैरों को 10 मिनट तक भिगोकर रखें। त्वचा फूलने पर मैथिलेटिड स्पिरिट लगाकर एड़ियों को प्यूमिक स्टोन या झांवे से रगड़कर साफ कर लें। इससे एड़ियों की मृत त्वचा निकल जाएगी। तत्पश्चात तौलिए से पोंछकर गुनगुने जैतून या नारियल के तेल से मालिश करें।  

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Sunday, December 20

सफेद दाग (Leucoderma)

सफेद दाग असाध्य रोग नहीं है इसलिए इस रोग के होने पर किसी भी प्रकार की हीनभावना से ग्रस्त या निराश नहीं होना चाहिए बल्कि दाग होने पर बड़ी आसानी से कम समय में इसका उपचार किया जा सकता है और उसको बढ़ने से रोका जा सकता है |

लक्षण :



इस रोग के कारण शरीर के किसी भी भाग में त्वचा पर छोटा सा दाग पीले रंग से शुरू होकर सफेद रंग का बन जाता है। यह दाग जगह-जगह फैलते हुए बड़े-बड़े चकत्तों के रूप में भी हो सकता है।

कारण




  • अप्राकृतिक भोजन सेवन करने के कारण व्यक्ति के शरीर में दूषित द्रव्य जमा हो जाना |

  • आंतों में कीड़े होना |

  • पेचिश, कब्ज, चर्मरोग, टायफाइड, तपेदिक (टी.बी.), एक्जिमा, दमा, मधुमेह, फोड़े, चोट, जलना तथा लीवर (जिगर) संबन्धी रोग आदि।

  • मल-मूत्र के वेग को रोकने के कारण भी त्वचा पर सफेद दाग हो जाते हैं।

  • शरीर में हार्मोन्स की गड़बड़ी तथा मानसिक आघात होने के कारण भी यह रोग हो सकता है।

  • अधिक नमक, मिर्च मसाले वाली चीजों के खाने से यह रोग हो सकता है।

  • शक्तिशाली एन्टीबायोटिक तथा तेज औषधियों का सेवन करने के कारण भी सफेद दाग का रोग हो सकता है।

  • अधिक नशीली चीजों का सेवन करने के कारण भी यह रोग हो सकता है।

  • दूध और नमक का सेवन एक साथ करने से भी यह रोग हो जाता है |



प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :




  • सफेद दाग को ठीक करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक फलों तथा सब्जियों का रस पीना चाहिए तत्पश्चात कच्चा भोजन जैसे - हरी सब्जियां अंकुरित अन्न, फल, जूस आदि का सेवन करना चाहिए |चुकन्दर, भिगोए हुए अंकुरित काले चने, अंजीर, खजूर, तुलसी के पत्ते, त्रिफला विशेष लाभकारी है |

  • सफेद दाग से पीड़ित रोगी को सप्ताह में 2 दिन का उपवास रखना चाहिए।

  • रात्रि को तांबे के बर्तन में पानी को भरकर रख दें एवं प्रातः खाली पेट इसको पीने से अत्यंत लाभ मिलता है।

  • इस रोग को ठीक करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को अपने पाचन संस्थान की सफाई करनी चाहिए ताकि पाचनक्रिया ठीक प्रकार से हो सके।  इसके लिए पेट पर मिट्टी की पट्टी का लेप करना चाहिए तथा इसके बाद इसके लिए एनिमा क्रिया करना चाहिए। कटिस्नान, भाफ स्नान कुंजल क्रिया आदि प्राकृतिक उपचार करने चाहिए।



घरेलू उपचार :




  • 1 चम्मच हल्दी पाउडर + 2 चम्मच सरसों का तेल को मिलाकर सफ़ेद दागों पर  15 मिनट तक रखने के बाद उस जगह को धो लें |इस प्रयोग को दिन में 3-4 बार करें |

  •  दिन में 3 से 4  बार  20 मिनट के लिए - 2 चम्मच अखरोट का पाउडर में थोड़ा सा पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं एवं इसे सफ़ेद दागों पर लगायें

  • 1 चम्मच नीम की पत्तियों के रस में 1 चम्मच शहद मिलाकर दिन में 3 बार पीएं।

  • हरड़ को घिसकर लहसुन के रस में मिलायें एवं इस पेस्ट को सफेद दाग पर लगाएं।

  • 1 गिलास गर्म दूध में  एक चम्मच हल्दी का पाउडर  डालकर दिन में 2 बार पीने से 4-5 महीने में सफेद दाग से मुक्ति मिल सकती है।

  • 1 छोटे चम्मच बावची के चूर्ण को सुबह तथा शाम पानी के साथ सेवन करने से सफेद दाग के रोग में बहुत अधिक लाभ मिलता है।

  • सफेद दागों पर तुलसी का रस मलने से कुछ ही दिनों में सफेद दाग खत्म हो जाते हैं।



परहेज :




  • सफेद दाग से पीड़ित रोगी को कॉफी, चाय, चीनी, नमक, मिर्च-मसालेदार, डिब्बा बंद भोजन, नशीली वस्तुएं, मांस तथा अंडे का सेवन नहीं करना चाहिए।

  • खट्टा, ज्यादा नमक का सेवन, मछली और दही आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

  • मूली, नमक और मांस के साथ दूध न पीएं।

  • साबुन और डिटरजेंट का इस्तेमाल न करें।