Showing posts with label शोध. Show all posts
Showing posts with label शोध. Show all posts

Tuesday, February 7

सावधान ! गर्भस्थ शिशु को हो सकता है माइक्रोवेव एवं मोबाइल से खतरा


. By- Dr. Kailash Dwivedi

गर्भवती महिलाओं को न केवल माइक्रोवेव से, बल्कि मोबाइल से भी दूर रहना चाहिए। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि गर्भ में पल रहा बच्चा इन चीजों से डरता है।

न्यूयॉर्क  के  विकोफ हाइट्स मेडिकल सेंटर के  शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि छठे से नौंवे माह का गर्भस्थ शिशु मोबाइल की घंटी बजने पर एकदम चौंकता है। फोन की घंटी या वाइब्रेशन गर्भ में पल रहे बच्चे को डराती है। इससे कई बार उसकी नींद टूटती है।  ऐसे में बेहतर होगा कि मोबाइल ऐसी जगह रखें जहां से उसकी घंटी की आवाज गर्भस्थ बच्चे को न सुनाई दे।

इसी तरह भ्रूण को माइक्रोवेव से खतरा रहता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के  अनुसार भ्रूण को माइक्रोवेव रेडिएशन का खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि  उनकी त्वचा की परत काफी पतली होती है। इसलिए प्रेग्नेंसी के  दौरान ऐसे उपकरणों का प्रयोग करने से बचें।

loading...

Saturday, February 4

जानिए महिलाएं क्यों जल्दी हो जाती हैं बूढ़ी



. By- Dr. Kailash Dwivedi

हमेशा सुन्दर व जवान दिखना हर महिला चाहती हैं | लेकिन यह सच है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलायें जल्दी बूढ़ी हो जाती हैं |आखिर महिलाएं जल्दी बूढ़ी क्यों होती है। इसको लेकर अमेरिका में सेन डिएगो स्कूल ऑफ मेडिसिन में एक शोध किया गया। जिसमें यह बात सामने आई जोकि हैरान करने वाली थी।

इस अध्‍ययन के अनुसार एक्‍सरसाइज नहीं करने वाली महिलाएं तेजी से बूढ़ी होती है। यह शोध 64 और 95 साल की 1500 महिलाओं पर किया गया। जिसमें शोधकर्ताओं ने कहा कि जो महिलाएं आराम पसंद होती हैं उनके बॉडी सेल्स धीमे काम करना शुरू कर देते हैं और ऐसी महिलाएं जल्दी बूढ़ी हो जाती हैं।


शोध में पाया गया है कि जो महिलाएं प्रतिदिन 40 मिनट से कम समय तक हल्की से भारी शारीरिक मेहनत का काम करती हैं उनके शरीर में टेलोमीरिज छोटे होते हैं। (टेलोमीरिज गुणसूत्रों को नष्ट होने से बचाने वाले डीएनए स्ट्रेंड्स के अंतिम हिस्सों पर लगे छोटे-छोटे कैप होते हैं)। उम्र बढ़ने के साथ ये तेजी से और छोटे होते जाते हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है ये टेलोमीरिज नेचुरली छोटे और कमजोर होते जाते हैं लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर ऐसा होने से रोका जा सकता है।
शोध टीम के प्रमुख के अनुसार जो महिलाएं प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तक एक्‍सरसाइज करती हैं उनके टेलोमीरिज छोटे नहीं होते। 
loading...

Friday, January 27

जानवरों के भ्रूण में मानवीय कोशिकाओं को विकसित करने में मिली सफलता - अब प्रत्यारोपण हेतु आसानी से उपलब्ध होंगे इंसानी अंग !



By- Dr. Kailash Dwivedi

प्रसिद्द विज्ञान पत्रिका 'नेचर' में प्रकाशित एक खबर के अनुसार अमेरिका में वैज्ञानिकों ने पहली बार  'सूअर' के भ्रूण में मानवीय  कोशिकाओं को विकसित करने की नई उपलब्धि हासिल की है। इसी के साथ जानवरों में लिवर, किडनी व अन्य मानवीय अंगों का विकास कर उन्हें मनुष्य में प्रत्यारोपित करने की राह खुल गयी है | इस सम्बन्ध में दो अलग-अलग प्रयोग हुए जिनमें पहला प्रयोग सूअर के गर्भ में प्रत्यक्ष रूप से मानव अंगों के विकास का हुआ एवं दूसरा प्रयोग मधुमेह रोग को समाप्त करने को लेकर चूहों पर किया गया |

पहली टीम का नेतृत्व करने वाले साक इंस्टिट्यूट के जीवविज्ञानी जुन वू तथा जुआन ने करीब नौ करोड़ वर्षों में प्रथम बार इंसान और सूअर के टिश्यू के निर्माण से ह्यूमन स्टेम सेल्स के योगदान का प्रदर्शन किया | इसके अंतर्गत सूअर में दो अलग-अलग जीनोम से बनने वाले मानवीय अंग व जानवर के भ्रूण के एक साथ विकास का अनूठा उदाहरण देखने में आया | अर्थात सूअर के भ्रूण में इन्सान के स्टेम सेल्स इम्प्लांट करने से इंसानी अंगों का भी विकास होगा, साथ ही सूअर का बच्चा भी उसी गर्भ में विकसित होता रहेगा |

वहीँ दूसरी तरफ यूनिवर्सिटी ऑफ़ टोक्यो के तोमोयुकी व हिदेयुकी तथा स्टेनफोर्ड की हिरोमित्सु नकाउची ने अपनी रिपोर्ट पेश की इस समूह ने डायबिटीज से ग्रस्त चूहे की कोशिकाओं को अन्य चूहे में डालकर पैनक्रियाज ग्लैंड को विकसित कर उसे पीड़ित चूहे में डालकर डायबिटीज ख़त्म करने में सफलता पायी गयी |

एक बार अंगों के विकसित हो जाने पर उसे मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है। चूंकि ऐसे अंग मरीज की अपनी कोशिकाओं से विकसित किए जाते हैं, ऐसे में शरीर द्वारा उस अंग को स्वीकार नहीं किए जाने की संभावना बहुत कम होती है। इस प्रयोग की सफलता के बाद अब इंसान के अंगों को विकसित कर पाना संभव हो सकेगा।

loading...

Tuesday, January 24

शोध - भोजन के बाद पेट में लगती है 'आग'





By- Dr. Kailash Dwivedi

शोध पत्रिका 'नेचर इम्यूनोलॉजी' के ताजा अंक में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार हाल ही में लंदन में हुए एक शोध से पता चला है कि हमारे पेट में एक तरह की अग्नि होती है। ताजा शोध के अनुसार, भोजन करने के साथ ही हमारे पेट की यह अग्नि भड़क उठती है, लेकिन यह हमारे लिए हानिकारक नहीं बल्कि लाभकारी अग्नि है। यह अग्नि एक सुरक्षा तंत्र के रूप में कार्य करती है जो भोजन के साथ उदर में गए जीवाणुओं से लड़ने का कार्य करती है।

मोटे व्यक्तियों में कम होती है यह अग्नि :

निष्कर्षो से पता चला है कि यह 'अग्नि' मोटे व्यक्तियों में नहीं होती है, जिससे मधुमेह होने का खतरा रहता है। स्विट्जरलैंड के बेसल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की अगुवाई में किए गए अध्ययन में पता चला है कि रक्त में ग्लूकोज की मात्रा के आधार पर मैक्रोफेजेज की संख्या (एक प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिकाएं या अपमार्जक कोशिकाएं) भोजन के दौरान आंत के चारों तरफ बढ़ जाती है। यह संदेशवाहक पदार्थ इंटरल्यूकिन-1बीटा (आईएल-1बीटा) का उत्पादन करती हैं। यह अग्नाशय की बीटा कोशिकाओं में इंसुलिन के उत्पादन को उत्तेजित करता है और मैक्रोफेज को आईएल-1बीटा के उत्पादन का संकेत देता है।

आईएल-1बीटा का कार्य :

इंसुलिन और आईएल-1बीटा साथ मिलकर रक्त में शर्करा के स्तर को नियमित करने का कार्य करते हैं, जबकि आईएल-1बीटा प्रतिरक्षा प्रणाली को ग्लूकोज की आपूर्ति को सुनिश्चित करता है और इस तरह से सक्रिय बना रहता है। इसके विपरीत, जब पोषक पदार्थो की कमी होती है, तो कुछ शेष कैलरी को जरूरी जीवन की क्रियाओं के लिए संरक्षित कर लिया जाता है। इसे प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की कीमत पर किया जाता है।


loading...

Saturday, January 14

जानिए क्या होता है,जब मानव शरीर सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आता है





By- Dr. Kailash Dwivedi


नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट के अनुसंधानों से सिद्ध होता है कि देश के जिन भागों में देशवासी सूर्य के प्रकाश के अधिक संपर्क में होते हैं, उनमें स्‍तन, आंत, गर्भाशय, उदर एवं कई अन्‍य प्रकार के कैंसर होने की संभावना अत्‍यंत कम होती हैं। सूर्य की किरणों में जो पैराबैंगनी किरणें होती हैं, उनमें कई प्रकार के रोगाणुओं को नष्‍ट करने की क्षमता होती है। वस्‍तुत: सूर्य के प्रकाश के संपर्क की कमी से कई प्रकार के त्‍वचा संबंधी रोग होने की प्रबल संभावना बनी रहती है। विशेषरूप से सूर्योदय के एक घंटा तक और इसी प्रकार सूर्यास्त के एक घंटे पहले का समय, सभी के लिए सूर्य के सामने उपस्थित रहने का आदर्श समय माना जाता है, लेकिन प्रारंभिक अवस्‍था में सूर्ययोग के अभ्यास से इसके समय को बढ़ाया और निर्धारित किया जाता है। 

सूर्ययोग अत्‍यंत उच्‍चकोटि और तीव्रतम गति का मार्ग है, जो आत्‍मसाक्षात्‍कार एवं मुक्ति के कठिन लक्ष्‍यप्राप्ति का अत्‍यंत सरल साधन है, न्‍यूनतम समयावधि में निश्चित परिणाम देनेवाली अत्‍यधिक सरल विधि है। मानव का अपनी काया के पोषण हेतु ठोस द्रव तथा गैस के स्‍वरूप में आ‍हार ग्रहण करना आदि है, किंतु अग्नि या प्रकाश के रूप में आहार ग्रहण करने के विषय में विचार नहीं किया गया है। मानव जाति ने यह ज्ञान प्राप्‍त नहीं किया है कि प्रकाश ऊर्जा को जीवन पोषण हेतु कैसे प्रयोग किया जाए। जब तक मनुष्‍य अपनी देह के पोषण हेतु ठोस द्रव व गैस आहार तक सीमित रहेगा, उसकी समझ भौतिक जगत की ही सीमाओं तक सीमित रहेगी। ब्रह्मांड के अनबूझे रहस्‍यों के ज्ञान प्राप्ति की योग्‍यता प्राप्ति हेतु मनुष्‍य को अपने मस्तिष्‍क का पोषण प्रकाश जैसे उच्‍चकोटि के वैकल्पिक ऊर्जा भंडार से करना सीखना होगा।

क्या होता है,जब मानव शरीर सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आता है

प्राकृतिक सूर्यप्रकाश के सेवन से रक्‍त में श्‍वेत रक्‍तकणिकाओं की संख्‍या में वृद्धि होती है। लिम्‍फोसाईट श्‍वेतरक्‍त कणिकाओं का करीब चौथाई प्रतिशत होता है। यह इंटरफेरोन नामक रस का निर्माण करता है, जो रोगाणुओं की वृद्धि रोक देता है। जब मानव शरीर सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आता है तो लिम्‍फोसाईट की संख्‍या में पर्याप्‍त वृद्धि होती है। सूर्य का प्रकाश मधुमेह रोगियों हेतु अत्‍यंत उपयोगी है, क्‍योंकि शरीर से सूर्य के प्रकाश का संपर्क रक्‍त में शर्करा की मात्रा को चमत्‍कारिक रूप से कम कर देता है। सूर्य योगियों के शरीर पर किये गए अध्‍ययन से यह तथ्‍य प्रकट हुआ है कि उनकी पिट्यूटरी हारमोन ग्रंथि में सामान्‍य मनुष्‍यों की तुलना में आकार में दोगुने तक वृद्धि हो जाती है। पिट्यूटरी मुख्‍य हारमोन ग्रंथि है, जो शरीर की अन्‍य हारमोनि ग्रंथियों को नियंत्रित करती है और शरीर को सुचारूरूप से कार्यरत रखने हेतु उत्‍तरदायी होती है। 

जो हृदयरोगी सूर्ययोग का अभ्‍यास करते हैं, उनके सीरम, कोलेस्‍ट्राल एवं ट्रिग्‍लीसेराईड के स्‍तर में उल्‍लेखनीय कमी आने लगती है तथा हृदय की आक्‍सीजन शोषण की क्षमता में आश्‍चर्यजनक वृद्धि होती है। हृदय एवं मुख्‍य धमनियों की दीवारें शक्ति से पूरित होने लगती हैं। हृदय की क्षमता बढ़ने लगती है। 

ओस्टियोपोरेसिस तथा स्‍वत: हड्डियां टूटने के रोगीजनों को सूर्ययोग का आश्‍चर्यजनक लाभ होता है और वे इस रोग की भीषणता से सर्वदा के लिए मुक्‍त हो जाते हैं।
सूर्य की किरणों में ईथर के कणों की शक्ति विद्यमान होती है, जो हमारे प्राणमय शरीर को पुष्‍ट बनाती है। प्रात:काल निरंतर सूर्य के प्रकाश के संपर्क में रहने से ऋणात्‍मक प्रवृत्तियां जैसे क्रोध, अहंकार, घृणा, ईर्ष्‍या, द्वेष, मानसिक अवसाद इत्‍यादि अवगुण स्‍वत: समाप्‍त होने लगते हैं तथा हमारे स्‍वभाव में प्रेम, दया सद्भावना, सौहार्द, शांति, आनंद, स्‍वीकार्यता, सहानुभूति इत्‍यादि सहज सद्गुणों का समावेश होना आरंभ हो जाता है। पश्चिम के प्रसिद्ध मनोचिकित्‍सक डॉ नोरमान रोसेंथाल के अनुसार-सूर्य के प्रकाश में मानसिक अवसाद और आत्‍महत्‍या की प्रवृत्ति से मुक्‍त होने की अद्भुत क्षमता है। तनाव नियंत्रण तथा मनोरोगों से मुक्ति हेतु सूर्य का प्रकाश अत्‍यंत प्रभावी सहायक है।
loading...

अब मां के ब्लडप्रेशर से पता लगेगा कि होने वाला बच्चा लड़का है या लड़की





By- Dr. Kailash Dwivedi

अमेरिकन जर्नल ऑफ हाइपरटेंशन में प्रकाशित शोध से यह खुलासा हुआ है कि होने वाली मां के ब्लड प्रेशर से बच्चे के लिंग का पता चल सकता है। शोध के अनुसार  गर्भाधान से पहले जिन महिलाओं का रक्तचाप कम होता है उनके द्वारा बेटी को जन्म देने की संभावना ज्यादा होती है।
कनाडा के माउंट सिनाई अस्पताल में एंडोक्रेनोलॉजिस्ट डॉ. रवि रत्नाकरण के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने पाया कि हाई ब्लड प्रेशर महिला द्वारा लड़के को जन्म देने का संकेत है जबकि कम ब्लड प्रेशर लड़की को जन्म देने का संकेत है।

रत्नाकरण के अनुसार इससे पता चलता है कि ‘गर्भाधान से पहले महिला का रक्तचाप एक ऐसा तथ्य है जिसके बारे में अभी तक ध्यान नहीं दिया गया था और यह तथ्य गर्भ में पलने वाले बच्चे के लिंग से जुड़ा है। नए शोध के साथ शोधकर्ताओं ने मां की गर्भाधान से पहले की सेहत और बच्चे के लिंग के बीच संबंध तलाशा है। शोध फरवरी 2009 में शुरू किया गया था। इसमें चीन की 3375 महिलाओं को शामिल किया गया था। यह शोध अमेरिकन जर्नल ऑफ हाइपरटेंशन में प्रकाशित हुआ।
loading...