Showing posts with label Acupressure. Show all posts
Showing posts with label Acupressure. Show all posts

Wednesday, July 5

चढ़ी हुई नस 10 सेकेंड में ऐसे उतारें


By- Dr.Kailash Dwivedi
नस चढ़ना एक बहुत साधारण सी प्रक्रिया है, लेकिन जब भी शरीर में कहीं भी नस चढ़ जाए, जान ही निकाल देती है और अगर रात को सोते समय पैर की नस चढ़ जाए तो व्यक्ति चकरघिन्नी की तरह घूम कर उठ बैठता है, सूजन और दर्द अलग |

साल भर पहले, एक दिन, कहीं बैठे बैठे, मेरे भी बायें पैर की नस चढ़ गयी, संयोगवश मेरे सामने एक बुज़ुर्ग एवं अनुभवी व्यक्ति बैठे थे, उन्होने तुरंत मेरे दायें हाथ की उंगली मेरे दाहिने कान के नीचे की तरफ रखी और कहा कि अब आप हल्का सा दबाए हुए उंगली को उपर और नीचे गति दें और ये प्रक्रिया करीब 10 सेकेंड तक करते रहें |

मैं आश्चर्य चकित था कि मेरा पैर अब बिल्कुल ठीक था | मैने उन बुज़ुर्गवार का दिल से धन्यवाद दिया और उसके बाद आज तक एक साल में मैने इस चमत्कारी तरीके से ना जाने कितने लोगों को लाभान्वित किया है |

आप भी ज़रूरत पड़ने पर एक बार आज़मा के ज़रूर देखें | 
इसमें ध्यान ये रखना है कि दिए हुए चित्र के अनुसार आप लंबाई में अपने शरीर को आधा आधा दो भागों में चिन्हित करें, अब जिस भाग में नस चढ़ी है उसके विपरीत भाग के कान के निचले जोड़ पर उंगली से दबाते हुए उंगली को हल्का सा ऊपर और हल्का सा नीचे की तरफ बार बार 10 सेकेंड तक करते रहें | नस उतर जाएगी |
loading...

Saturday, April 29

बवासीर एवं भगंदर की मर्म चिकित्सा


By- Dr.Kailash Dwivedi


एडियों के बाहरी सख्त भाग पर मालिश की तरह प्रेशर देने से भगंदर एवं बबासीर रोग से निजात मिलती है | यह गुदा रोग से सम्बंधित प्रमुख प्रतिबिम्ब केंद्र है | इसी तरह से कब्ज, बबासीर एवं भगंदर दूर करने के लिए दोनों हाथों में भी अंगूठे के साथ कलाई पर स्थित प्रतिबिम्ब केंद्र है  (जैसाकि चित्र में दिखाया गया है) इन केन्द्रों पर भी दबाब देना चाहिए |


उपर्युक्त दोनों एडियों एवं कलाईयों के प्रतिबिम्ब केन्द्रों पर प्रतिदिन प्रातः-सायं 2-2 मिनट तक प्रेशर देने से बबासीर व भगंदर रोग समाप्त हो जाता है | ध्यान रहे इस चिकित्सा के साथ रोगी के खान-पान में यथायोग्य परिवर्तन भी आवश्यक है | इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को तले-भुने, मिर्च,मसालेदार खाद्यों से परहेज रखना आवश्यक है |

loading...

Thursday, April 27

हकलाने की एक्यूप्रेशर चिकित्सा



By- Dr. Kailash Dwivedi

तुतलाना या हकलाना, के कारण :

  1. जन्मगत विकार
  2. ग्रंथियों की निष्क्रियता
  3. मनोवैज्ञानिक समस्याएं
  4. आत्मविश्वास की कमी 

उपचार :

इस रोग के उपचार हेतु दोनों हाथ एवं पैरों में पिट्यूटरी, थायरायड, पैराथायरायड एवं आड्रेनल ग्लैंड्स के प्रतिबिम्ब केन्द्रों पर नियमित रूप से दिन में दो-तीन बार 2-2 मिनट तक दबाब देना चाहिए | 

इसके अतिरिक्त गर्दन पर जहाँ से रीढ़ की हड्डी प्रारंभ होती है, वहां तथा दोनों कंधो के बीच के केन्द्रों पर दबाब देना चाहिए | (चित्र देखें)

दबाब कैसे दें :

सही दबाब देने के लिए यदि अंगूठा या अंगुली को एक स्थान पर टिकाकर गोलाई में बाएं से दायें तरफ दिया जाये (घड़ी की सुई की दिशा ) तो यह अधिक प्रभावी होता है |वैसे साधारण रूप से पम्पिंग मैथेड से भी दबाब दिया जा सकता है | पम्पिंग मैथेड में प्रतिबिम्ब केंद्र पर 4-5 सेकेण्ड के लिए दबाब देकर 2 सेकेण्ड के लिए दबाब हटा लिया जाता है, और पुनः इसी तरह से दबाब दिया जाता है | अंगूठे एवं अंगुली के अतिरिक्त लकड़ी व प्लास्टिक के बने कई तरह के उपकरण भी दबाब देने के काम में आते हैं | इसे ‘जिम्मी’ कहते हैं | 

सावधानियां :

  • दबाब देने से पूर्व यह ध्यान रखें कि आपके हांथों के नाखून अधिक बढ़े हुए न हों |
  • टूटी हुयी हड्डी पर भी सीधे तौर पर दबाब न दें |
  • सम्पूर्ण रोगमुक्ति हेतु यह आवश्यक है कि चिकित्सा के साथ-साथ रोगी का आहार परिवर्तन भी किया जाये |
  • भोजन के तुरंत बाद दबाब न दें | भोजन से पूर्व व बाद में 30 – 30 मिनट का अंतर रखें |


loading...

Tuesday, April 25

शीघ्र पतन की मर्म चिकित्सा

सम्भोग क्रिया के समय पुरुष का वीर्य जल्दी निकल जाने को शीघ्र पतन रोग कहते हैं | शीघ्र पतन भी दो प्रकार का होता है – सम्भोग क्रिया प्रारंभ करने के पूर्व स्त्री को छूने मात्र से वीर्य निकल जाना एवं सम्भोग शुरू करते ही वीर्य निकल जाना | 

इस रोग से जहाँ पुरुष में निराशा आती है वहीँ स्त्री की सेक्स में रूचि समाप्त होने लगती है | इस रोग से निजात पाने के लिए चित्र में दिखाए गए बिन्दुओं पर दिन में दो-तीन बार 2-2 मिनट के लिए दबाब देना चाहिए | जितना दबाब व्यक्ति सह सके उतना ही प्रेशर देना चाहिए |
loading...

Wednesday, January 25

क्या आप सांस की बदबू से परेशान हैं ?

By- Dr. Kailash Dwivedi

सांसों की दुर्गंध से परेशान व्यक्ति एक्यूप्रेशर के पॉइंट्स को दबाकर इससे आसानी से निजात पा सकते हैं | चित्र में दिए गए बिन्दुओं पर प्रेशर एवं दिन में कई बार गुनगुना पानी पीने से सांस ही नहीं शरीर की दुर्गन्ध से भी मुक्ति पा सकते हैं |

कलाईयों के बिन्दुओं (Points)पर दबाब :



हथेली और हाथ के जोड़,  जिसे कलाई बोलते हैं के मध्य में बिन्दुओं पर पम्पिंग मैथेड अर्थात दबाना फिर ढीला छोड़ देना - पुनः दबाना और ढीला छोड़ना ... इस प्रकार 20 सेकेंड तक दबाव बनाएं और कुछ सेकेण्ड के लिए ढीला छोड़ दें । पहले धीरे-धीरे और फिर तेज दबाव बनाएं और छोड़ दें, परन्तु यह ध्यान रहे कि दबाब सहन शक्ति के अनुसार ही दें। 2 मिनट तक बारी-बारी दोनों कलाईयों पर इस प्रक्रिया को दोहराएं।


 

2- रीढ़ की हड्डी के बिन्दुओं पर दबाब :



गर्दन से ठीक एक बित्ता नीचे रीढ़ की हड्डी पर दो बिन्दु हैं (चित्र देखें) उन पर करीब 20 सेकेंड तक दबाव बनाएं।

इसके बाद, थोड़ा नीचे ऐसे ही दो बिन्दु और टटोलें जो आपकी कमर से एक बित्ता ऊपर हों। इन पर भी 20 सेकेंड तक तेज दबाव बनाएं और फिर छोड़ दें। दोनों जगह के बिन्दुओं पर 1-1 मिनट प्रेशर लें |

यह भी करें :


  • मुंह की आंतरिक सफाई रोज नियम से करें, इअके लिए प्रातः चाय / नाश्ता, लंच एवं डिनर के पश्चात् सोने से पहले प्रतिदिन  दांत, जीभ, मसूढ़े साफ करने का नियम बनायें ।

  • मुंह की लार न सिर्फ भोजन को पचाने में सहायक होती है बल्कि यह मुँह में नमी भी बनाये रखती है । रात की नींद के बाद सुबह मुंह से बदबू आने का एक प्रमुख कारण मुंह का सूखापन  है । यदि आपके मुंह में लार कम मात्रा में बनती हो तो चबाने वाले किसी स्वास्थ्यकर पदार्थ से  नमी कायम रखी जा सकती है ।
loading...

Saturday, November 14

जानिये शरीर पर कैसे काम करता है एक्यूप्रेशर !

प्राचीनकाल से से ही शरीर के रोगों को दूर करने के लिए जितनी चिकित्सा पद्धतियाँ प्रचलित हुयी हैं उनमें एक्यूप्रेशर सबसे प्राचीन एवं प्रभावशाली पद्धति कही जा सकती है |एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति पूर्णतया प्राकृतिक एवं हानिरहित है | इस पद्धति के अनुसार के रोगों को दूर करने कि शक्ति शरीर में ही निहित है, आवश्यकता है तो सिर्फ इसे सक्रिय करने की | एक्यूप्रेशर का अविष्कार लगभग 6000 वर्ष पूर्व भारत में हुआ था, इसका उल्लेख आयुर्वेद में मिलता है | प्राचीन काल में विदेशी विशेषकर चीनी यात्री इस ज्ञान को अपने साथ चीन ले गये जिसका वहां पर व्यापक प्रसार हुआ, चीनी चिकित्सकों ने जब इसका रोगनिवारक प्रभाव देखा तो इसे अपनाना प्रारंभ कर दिया एवं लोगों को इसके प्रति जागरूक भी किया यही कारण है कि आज दुनिया एक्यूप्रेशर को चीनी चिकित्सा पद्धति के रूप में जानती है |

एक्यूप्रेशर जिसका आधार प्रेशर या गहरी मालिश है के सम्बन्ध में प्राचीन भारतीय चिकित्सकों में महर्षि चरक का नाम उल्लेखनीय है | इनका मत था कि दबाब के साथ मालिश करने से रक्त का संचार सुचारू हो जाता है फलस्वरूप शरीर कि शक्ति एवं स्फूर्ति बढ़ जाती है |शारीरिक शक्ति बढ़ने से शरीर के मल निष्कासक अंग सक्रिय हो उठते है एवं बड़ी आंत,गुर्दे,त्वचा एवं फेफड़ों के माध्यम से शरीर कि गंदगी बाहर निकलनी प्रारंभ हो जाती है परिणामस्वरुप शरीर रोगमुक्त होने लगता है | एक्यूप्रेशर सिर्फ गहरी मालिश ही नही बल्कि - हथेलियों, तलवों, चेहरे, कानों आदि के विशेष केन्द्रों पर दबाब डालने की एक विधा है | इन केन्द्रों को एक्यूप्रेशर में प्रतिबिम्ब केन्द्रों (Reflex centres) की संज्ञा दी गयी है जोकि शरीर के आंतरिक अंगों से सम्बन्ध रखते हैं | रोग की अवस्था में इन केन्द्रों पर दबाब देने से काफी दर्द होता है |

जिस प्रकार बिजली के स्विच को ऑन करने से स्विच से सम्बंधित उपकरण में विद्युत् प्रवाह होने लगता है तथा वे उपकरण सक्रिय हो जाते हैं उसी प्रकार प्रतिबिम्ब केंद्र पर दबाब डालने से केंद्र से सम्बंधित अंग में शरीर की ऊर्जा प्रवाहित होकर उस अंग को सक्रिय कर देती है फलस्वरूप वह अंग रोगमुक्त होने लगता है | यही सिद्धांत एक्यूप्रेशर चिकित्सा का आधार है |