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Sunday, February 12

बाजीकारक (काम उत्तेजना) नुस्खे

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  • 4 से 6 ग्राम गूलर के फल का चूर्ण और बिदारी कन्द का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर मिश्री और घी मिले हुए दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से पौरुष शक्ति की वृद्धि होती है व बाजीकरण की शक्ति बढ़ जाती है।



  • 1 छुहारे की गुठली निकालकर उसमें गूलर के दूध की 25 बूंद भरकर सुबह रोजाना खाये इससे वीर्य में शुक्राणु बढ़ते हैं तथा संतानोत्पत्ति में शुक्राणुओं की कमी का दोष भी दूर हो जाता है।



  • 1 चम्मच गूलर के दूध में 2 बताशे को पीसकर मिला लें और रोजाना सुबह-शाम इसे खाकर उसके ऊपर से गर्म दूध पीएं इससे मर्दाना कमजोरी दूर होती है।






  • 1 बताशे में 10 बूंद गूलर का दूध डालकर सुबह-शाम सेवन करने और 1 चम्मच की मात्रा में गूलर के फलों का चूर्ण रात में सोने से पहले लेने से धातु दुर्बलता दूर हो जाती है। इस प्रकार से इसका उपयोग करने से शीघ्रपतन रोग भी ठीक हो जाता है।




Friday, February 3

बाह्य कुम्भक



By-  Dr.Kailash Dwivedi

विधि :


  1. किसी भी ध्यानात्मक आसन में बैठकर पूरी शक्ति से श्वास को एक बार में ही बाहर निकल दें |

  2. श्वास को बाहर निकालकर मूलबंध (गुदा द्वार को संकुचित करें) और उड्डीयान बंध (पेट को यथाशक्ति अंदर सिकोड़ें) लगाकर आराम से जितनी देर रोक सकें,श्वास को बाहर ही रोककर रखें |

  3. जब श्वास अधिक समय तक बाहर न रुक सके तब बंधों को खोलकर धीरे-धीरे श्वास को अंदर भरें | यह एक चक्र पूरा हुआ |

  4. श्वास भीतर लेने के बाद बिना रोके पुनः बाहर निकालकर पहले की तरह बाहर ही रोककर रखें | इस प्रकार 3 से 21 चक्र किये जा सकते हैं |

लाभ :


  • इस प्राणायाम से मन की चंचलता दूर होकर वृत्ति निरोध होता है |

  • इससे बुद्धि सूक्ष्म एवं तीव्र होता है |

  • वीर्य स्थिर होकर स्वप्नदोष और शीघ्रपतन छुटकारा मिलता है |

सावधानियाँ :

  1. यह प्राणायाम प्रातः खाली पेट करें |

  2. श्वास बाहर इतना नही रोकना चाहिए कि लेते समय झटके से श्वास अंदर जाए और उखड़े हुए श्वास को 5-6 सामान्य श्वास लेकर ठीक करना पड़े |

  3. प्राणायाम के 30 मिनट बाद ही कुछ खाएं - पियें |


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Monday, January 2

जानें स्वप्नदोष (Nocturnal emission) का कारण और उपचार




स्वप्न मेँ किसी के साथ रति क्रिया करते हुए वीर्यपात का होना स्वप्नदोष कहलाता है।स्वपनदोष को माह मे 1 से 2 बार होना चिँताजनक नहीँ परंतु अधिक होने पर शरीर में कमजोरी आने लगती है एवं शीघ्रपतन, नपुंसकता जैसी भी स्थिति बन सकती है |

कारण :

  • जिन्होँने किशोरावस्था में (12-17 वर्ष ) के समय मेँ अपने हाथोँ से वीर्यवाहक नली (Spermatic cord) को आघात पहुचाया हो और अपनी वीर्य नष्ट किया हो, अर्थात हस्तमैथुन किया हो |

  • अश्लील साहित्य अथवा चिंतन करते हों उन्हें अक्सर यह रोग होता है ।

  • इसके अतिरिक्त कब्ज का रहना, अधिक मिर्च-मसालों का सेवन, फास्टफूड, जंकफूड एवं अन्य अप्राकृतिक खाद्यों का सेवन करना |

लक्षण :

  • सोते समय वीर्यपात होना 
  • कमर मेँ दर्द

  • सिर चकराना

  • दिल ज्यादा धड़कना

  • किसी काम मेँ मन न लगना

  • लिखते-पढ़ते आँखोँ के नीचे अँधेरा आना

  • स्मृति शक्ति का कमजोर होना

    उपचार :

    1. प्रातः खाली पेट एक बताशे मेँ 10 बुँदे बरगद का दुध रख कर 3 महिने तक खायेँ । और ब्रह्मचर्य का पालन करने से स्वप्नदोष ठीक होता है | यह प्रयोग शीघ्रपतन के रोगियों के लिए भी अत्यंत लाभकर है |

    2. प्रतिदिन रात्रि को सोने से पहले 4- 5 चमच्च की मात्रा में तुलसी की जड़ का काढा कुछ हफ़्तों तक पीने से स्वप्नदोष दूर होता है |

    3. एक चमच्च की मात्रा में बड़े गोखरू के फल का चूर्ण , थोडा घी और मिश्री मिलाकर एक हफ्ते तक सुबह शाम लेने से भी स्वप्नदोष दूर होता है

    4. अपामार्ग की जड़ का चूर्ण और मिश्री को समान मात्रा में पीस कर एक साथ मिश्रण कर लें ! इस मिश्रण को एक चमच्च की मात्रा में दिन में तीन बार दो हफ्ते तक सेवन करने से स्वप्नदोष से छुटकारा मिल जाता है |

    5. इसबगोल और मिश्री बराबर मिलाकर एक चमच्च एक कप दूध के साथ रात को सोने से एक घंटे पहले लें और उसके बाद सोते समय मूत्र त्याग करके सो जाएँ ! इससे भी स्वप्नदोष का निराकरण होता है |

    6. आँवले के रस में इलायची के दाने और इसबगोल बराबर की मात्रा में मिलाकर सुबह शाम एक एक चमच्च का सेवन करने से भी स्वप्नदोष दूर होता है |
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    Saturday, October 1

    यौन शक्ति को कई गुना बढ़ाता है यह तेल,पढ़ें एवं इसे स्वयं बनायें

    शीघ्रपतन आज के युवाओं की की एक आम बीमारी के रूप में उभर रही है | प्रतिदिन मेरे पास आने वाले फोन कॉल्स में लगभग 80 प्रतिशत लोग इस समस्या से ग्रस्त होते हैं | बाज़ार में मिलने वाले विभिन्न प्रकार के तेल जोकि सम्भोग शक्ति बढ़ाने का दावा करते हैं, अधिक कारगर नहीं होते | और यह मंहगे भी बहुत मिलते हैं |इस लेख में हम आपको एक ऐसे तेल के विषय में बता रहे हैं जोकि आप घर में ही आसानी से बना सकते हैं | शीघ्रपतन से छुटकारा पाने और चरम सुख प्राप्त करने के लिए आईये जाने इस विशेष तेल विधि -

    आवश्यक सामग्री :


    दालचीनी का तेल – 20 ml
    जैतून का तेल – 60 ml

    निर्माण विधि :


    उपर्युक्त  दोनों तेलों को एक कांच की शीशी में मिला कर रख लीजिये |

    उपयोग की विधि :


    सम्भोग से पूर्व इस तेल की 2 से 4 बूँद लेकर एक मिनट तक लिंग पर हल्के हाथ से मसाज करें |तत्पश्चात सम्भोग करें |आप की सम्भोग शक्ति कई गुणा बढ़ जाएगी |

    सावधानियां :



    • मसाज करते समय यह ध्यान रहे कि तेल लिंग के ऊपर सुपारी पर न लगे |

    • हो सकता है किसी - किसी को इस तेल की मसाज से लिंग पर जलन का अनुभव हो, ऐसी स्थिति में तेल की मात्रा कम कर दें | यदि फिर भी अधिक जलन हो तो इसका उपयोग ना करें |

    • सम्भोग शक्ति को बढ़ाने के लिए सिर्फ बाह्य पदार्थो की ही ज़रूरत नहीं, बल्कि व्यक्ति के शरीर में भी पर्याप्त और गाढ़ा वीर्य होना चाहिए इसके लिए अपने खान-पान  पर भी पूरा ध्यान दे, ताकि शरीर में पर्याप्त मात्रा में वीर्य बने एवं वीर्य गाढ़ा हो |

    Thursday, March 17

    पौरुष बढ़ाने वाले द्रव्य

    शतावरी :


    प्रातः एवं रात्रि को शतावरी की जड़ का चूर्ण लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा गर्म दूध के साथ लेने से शरीर में बल और वीर्य को बढ़ता है। इसे दूध में चाय की तरह उबालकर भी सेवन किया जा सकता है। यह औषधि स्त्रियों के स्तनों को बढ़ाने में लाभकारी रहती है। प्रातः खाली पेट 10 ग्राम शतावरी के ताजे रस लेने से कुछ ही समय में वीर्य बढ़ जाता है।

    उड़द :


    उड़द के लड्डू, उड़द की दाल, दूध में बनाई हुई उड़द की खीर का सेवन करने से वीर्य एवं संभोग शक्ति बढ़ती है।

    तालमखाना :


    प्रतिदिन प्रातः-सायं  लगभग 3-3 ग्राम तालमखाना के बीज दूध के साथ लेने से वीर्य का पतलापन, शीघ्रपतन, स्वप्नदोष एवं शुक्राणुओं की कमी दूर होती है। इससे वीर्य गाढ़ा हो जाता है।

    कौंच के बीज :



    • संभोग शक्ति बढ़ाने के लिए कौंच के बीज बहुत लाभकारी रहते हैं। इसके बीजों का सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होती है, संभोग करने की इच्छा तेज होती है और शीघ्रपतन रोग में लाभ होता है। इसके बीजों का उपयोग करने के लिए बीजों को दूध या पानी में उबालकर उनके ऊपर का छिलका हटा देना चाहिए तत्पश्चात बीजों को सुखाकर बारीक चूर्ण बना लेना चाहिए। इस चूर्ण को लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम मिश्री के साथ दूध में मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन और शीघ्रपतन का रोग दूर होता है।

    • कौंच के बीज + सफेद मूसली + अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण तैयार कर लें। इस चूर्ण में से एक चम्मच चूर्ण प्रातः-सायं  दूध के साथ लेने से लिंग का ढीलापन, शीघ्रपतन और वीर्य की कमी होना जैसे रोग जल्दी दूर हो जाते हैं।


    गोखरू :


    नपुंसकता रोग में गोखरू के बीजों के 10 ग्राम चूर्ण में 10 ग्राम  काले तिल मिलाकर 250 ग्राम दूध में डालकर आग पर पका लें। पकने पर इसके खीर की तरह गाढ़ा हो जाने पर इसमें 25 ग्राम मिश्री का चूर्ण मिलाकर सेवन करना चाहिए। इसका सेवन नियमित रूप से करने से नपुसंकता रोग में बहुत ही लाभ होता है।

    मूसली :



    • प्रतिदिन प्रातः-सायं सफ़ेद मूसली के चूर्ण को लगभग 3-3 ग्राम की मात्रा दूध के साथ लेने से शरीर में वीर्य एवं काम-उत्तेजना की वृद्धि होती है।

    • मूसली के लगभग 10 ग्राम चूर्ण को 250 ग्राम गाय के दूध में मिलाकर अच्छी तरह से उबालकर किसी मिट्टी के बर्तन में रख दें। इस दूध में रोजाना सुबह और शाम पिसी हुई मिश्री मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन, शीघ्रपतन और संभोग क्रिया की इच्छा न करना, वीर्य की कमी होना आदि रोगों में अत्यंत लाभ मिलता है।


    सेमल :


    लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सेमल की जड़ के चूर्ण और मूसली के चूर्ण को रोजाना सुबह और शाम मीठे दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होकर संभोग करने की शक्ति तेज होती है। स्वप्नदोष और शीघ्रपतन रोग से ग्रस्त रोगियों को सेमल की गोंद में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर लगभग 6-6 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम दूध और पानी के साथ सेवन करना चाहिए।

    अश्वगंधा :


    अश्वगंधा का सेवन करने से शरीर में घोड़े की तरह संभोग करने की शक्ति आ जाती है और इसके पौधे के अंदर से घोड़े की तरह गंध आती है इसलिए इसका नाम अश्वगंधा पड़ा है।
    अश्वगंधा की जड़ के 3-3 ग्राम चूर्ण को दूध के साथ सेवन करने से शारीरिक शक्ति और संभोग करने की शक्ति तेज होती है। वीर्य की कमी होना, धातु की कमजोरी, उत्तेजना की कमी होना, मानसिक कमजोरी आदि रोगों में अश्वगंधा का सेवन करना लाभकारी होता है। जब संभोग इच्छा की कमी एवं लिंग की उत्तेजना में कमी होने पर अश्वगंधा के चूर्ण को गाय के घी में मिलाकर चाटने और उसके ऊपर से गाय का गर्म-गर्म दूध पीना लाभकारी रहता है।

    दूध :


    आयुर्वेद के अनुसार दूध को सबसे ज्यादा उपयोगी वाजीकरण औषधि का नाम दिया गया है। दूध वीर्य की वृद्धि करने वाला, काम-शक्ति को बढ़ाने वाला और शरीर की खोई हुई ताकत को दुबारा पैदा करने में प्रभावशाली होता है। यदि स्त्री के साथ संभोग करने से पहले गर्म दूध पी लिया जाए तो इससे यौनशक्ति बढ़ती है |संभोग करने के पहले और बाद में दूध पीना अत्यंत लाभकारी होता है।

     

    Friday, January 22

    यौनपरक स्वास्थ्य - यौन और जनन स्वास्थ्य पर प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न

    यौन एक  ऐसा विषय है जिस पर व्यक्ति आमतौर पर चर्चा करने में संकोच करता है | बहुत से ऐसे प्रश्न हैं जिन्हें जानने की उत्सुकता अधिकांश को रहती है | इस लेख में जानिए यौन, गर्भ, कौमार्य, वीर्य आदि से जुड़े प्रश्नों के उत्तर -



    यौनपरक सम्भोग किसे कहते हैं?
    जब लड़के और लड़की में परस्पर यौन आकर्षण होता है तभी सम्भोग का आरम्भ होता है। जब पुरुष का लिंग स्त्री की योनि में प्रवेश करता  है तभी यौनपरक सम्भोग होता है।



    क्या यौनपरक सम्भोग दुखता है?
    यदि लड़की में यौनपरक उत्तेजना हो और उसकी योनि विश्राम में हो तो वह अपने आप इतनी भीग जाती है कि लड़के का लिंग बिना दुखाये अन्दर चला जाए। योनि बहुत लचीली होती है और सम्भोग के समय, सामान्यतः लिंग का कुछ अंश ही योनि के अन्दर जाता है। यदि सम्भोग के दौरान दुखे तो इसका अर्थ है कि यौन उत्तेजना के बाद भी लड़की के शरीर में पर्याप्त प्राकृतिक स्नेह निःसृत नहीं हुआ अथवा जब दोनों साथी यौनपरक संक्रमण से पीड़ित होते हैं तब ऐसा होता है।

    दर्द भरे सम्भोग का कारण बनने वाली योनिपरक शुष्कता से महिला कैसे निपट सकती है?
    किसी न किसी समय हर महिला योनिपरक शुष्कता का अनुभव करती है। आजकल बाजार में योनि को अनेकानेक स्नेहिल करने वाले पदार्थ मिलते हैं जिन का प्रयोग योनि की शुष्कता को दूर करने के लिए किया जा सकता है।

    औरत की योनि में वीर्य के निष्कासन के बाद वीर्य का क्या होता है?
    क्या वह निष्प्राण होने तक उस में रहता है या बाहर बह जाता है? यदि वह अन्दर रहता है तो निष्प्राण हो जाने पर उसका क्या होता है।

    योनि में वीर्य के निष्कासन के बाद, वह जोनि में ऊपर की और जाता है, ग्रीवा से होते हुए अण्डवाही ट्यूबों में चला जाता है या बाहर बह जाता है। महिला के खड़े होने पर सारा वीर्य बाहर बह जाता है। जो वीर्य शरीर में रह जाता है वह लगभग तीन से सात दिन तक सजीव रहता है। यदि कोई महिला गर्भधारण करना चाहती है तो उसे सम्भोग के उपरान्त कम से कम बीस मिनट तक खड़ नहीं होना चाहिए।

    क्या यौनपरक सम्भोग के लिए कोई "सुरक्षित समय" भी होता है?
    यदि आप गर्भधारण करने या यौनपरक संक्रामक रोगों से बचना चाहते हैं तो असुरक्षित यौन सम्बन्धों के लिए कोई सुरक्षित समय नहीं होता। जब भी कोई संक्रमित व्यक्ति किसी असंक्रमित व्यक्ति के साथ यौन सम्भोग करता है तो एस टी डी संक्रमित हो जाते हैं, गर्भ धारण की सम्भावना भी रहती है यहां तक कि अगर लड़की को माहवारी हो रही हो तब भी सम्भावना रहती है। हालांकि सामान्यतः औरतें हर महीने (माहवारी चक्र के बीचों बीच) कुछ दिनों के लिए उर्वर होती हैं परन्तु कई औरतों में इसे जान सकने का कोई निश्चित तरीका नहीं होता। वीर्य शरीर के अन्दर काफी दिनों तक सजीव रह सकता है, अभिप्राय यह है कि सम्भोग के काफी दिन बाद भी स्त्री गर्भवती हो सकती है। यदि उसकी महवारी अनियमित हो तो सुरक्षित दिनों का पता चलाना विशेषकर कठिन हो जाता है।

    क्या पहली बार सम्भोग करने पर भी कोई महिला गर्भ धारण कर सकती है?
    हाँ, लड़की गर्भ धारण कर सकती है?

    क्या माहवारी के दौरान सम्भोग करने से लड़की गर्भधारम कर सकती है?
    हां, माहवारी के दौरान सम्भोग करने से लड़की गर्भधारण कर सकती है।

    एक बार के सम्भोग से गर्भधारण की कितनी सम्भावना रहती है?
    एक बार असुरक्षित सम्भोग से गर्भधारण की सम्भावना व्यक्ति व्यक्ति के साथ बदलती है तथा की माहवारी चक्र की कौन सी स्थिति है इस पर निर्भर करता है। अण्डोत्सर्ग के आसपास के समय में सम्भावना सब से अधिक रहती है अर्थात माहवारी चक्र के 14 वें दिन (रक्तस्राव रूकने के 7 से 10वें दिन)। इन दिनों में एक बार सम्भोग करने से औसतन एक तिहाई औरतें गर्भवती हो जाती हैं।

    यदि कोई पुरूष वीर्य निष्कासन से पहले अपने लिंग को निकाल ले या पूरी तरह अन्दर न डाले तो क्या फिर भी औरत गर्भवती हो सकती है?
    दुर्भाग्य से, अगर कोई पुरूष अपने लिंग को पूरी तरह न डाले या वीर्य निष्कासन के समय बाहर निकाल लें, औरत तब भी गर्भधारण कर सकती है। ऐसा इसलिए कि सम्भोग से पहले या दौरान में लिंग से जो तरह पदार्थ निकलता है उस में शुक्राणु हो सकते है। यदि यह तरल पदार्थ औरत की योनि के अन्दर या आसपास पहुँच जाता है तो अन्दर भी जा सकता है और महिला गर्भधारण कर सकती है।

    झिल्ली क्या होती है? क्या झिल्ली का सही होना कुंआरेपन की निशानी है?
    यह पतला सुरक्षा परक लचीला मैमब्रन या त्वचा की एक स्ट्रिप (पट्टी) होती है जो कि योनि द्वार को थोड़ा ढक देती है। जब आप किशोरावस्था पर पहुंचती है यह झिल्ली आसानी से खिंचने वाली हो जाती है, पर यह झिल्ली कई तरीकों से फट सकती है जैसे कि साईकल चलाने से। यदि किसी की झिल्ली सही न हो तो इसका यह अर्थ नहीं है कि लड़की कुँआरी नहीं है। याद रखें, जब तक आप यौनपरक सम्भोग नहीं करतीं आप कुँआरी हैं।

    यौनपरक अभिविन्यास क्या होता है?
    यौनपरक अभिविन्यास का अभिप्राय है किसी व्यक्ति का जेन्डर (स्त्री-पुरूष) के प्रति आकर्षण। सामान्यतः अनेक प्रकार के यौनपरक अभिविन्यास का वर्णन मिलता है

    (1) हीटिरोसैक्सुअल - विषमलिंगकामी - विषमलिंगकामी व्यक्ति भावुकता एवं शारीरिक रूप से विषम लिंग वाले व्यक्ति के प्रति आकर्षित होते हैं। विषमलिंग पुरूष स्त्री के प्रति और स्त्रियां पुरूष के आकर्षित होती हैं। इन्हें कभी कभी 'सीधा' भी कहा जाता है।

    (2) होमोसैक्सुअल - समलिंगी - होमोसैक्सुअल लोगों का भावपूर्ण एवं शारीरिक आकर्षण अपने ही जेन्डर के लोगों के प्रति होता है। जो औरतें दूसरी औरतों के प्रति आकर्षिक होती हैं उन्हें लेसबियन कहते हैं, जो पुरूष दूसरे पुरूषों के प्रति आकर्षित होते हैं उन्हें 'गे' कहा जाता है (दोनों जेन्डर के समलैंगिकी लोगों के वर्णन के लिए भी कई बार 'गे' शब्द का प्रयोग किया जाता है।)

    (3) बाईसैकसुअल - उभयलिंगी - ऐसे लोग दोनों जेन्डर के लोगों के प्रति भाव एवं शरीर से आकर्षित होते हैं

    लड़का/लड़की कब सम्भोग करना शुरू कर सकते हैं।
    सम्भोग का आरम्भ करने के लिए कोई निश्चित सही उम्र नहीं है। महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या यह आपके लिए सही समय है। यह इस पर भी निर्भर करता है कि आप सम्भोग करने का क्या अर्थ लेते हैं बिना यौनपरक सम्भोग के भी कई ऐसे तरीके हैं जिससे आप सैक्सुअल सुख पा और दे सकते हैं। एक दूसरे को सन्देश भेजना, चूमना, आलिंगन में लेना भावभीना हो सकता है। यह प्यार को बांटने और व्यक्त करने का तरीका है।

    कामोन्माद की चरम स्थिति क्या होती है?
    जब कामपरक उत्तेजना भड़कती है और अपने चरम शिखर पर पहुंच जाती है तो उसे चरम स्थिति या होना कहते हैं जब कोई लड़का चरम स्थिति पर पहुंचता है तो स्खलन होता है। इस का अर्थ है कि वीर्य से मिश्रित होकर उसके शुक्राणु चिपचिपे सफेद तरल पदार्थ के रूप में उसके लिंग के अन्तिक छोर से बाहर निकलते हैं। लड़के के स्खलन के बाद लिंग का खड़ापन कम हो जाता है और उसे कुछ समय के लिए रूकना पड़ता है। जब लड़की चरम स्थिति पर पहुँचती है तो उसकी योनि बहुत गीली हो जाती है परन्तु वह जब तक चाहे कामलीला का आनन्द ले सकती है। कुछ लड़कियां बिना रूके एक से अधिक बार चरमस्थिति का अनुभव कर सकती हैं।

    क्या चरमस्थिति का अनुभव न पाने में कोई अप्राकृतिक बात है?
    यदि कोई व्यक्ति चरमस्थिति का अनुभव नहीं कर पाता तो इसका अर्थ यह नहीं है कि कुछ गलत है। वस्तुत चरमस्थिति तक पहुंचने की चिन्ता या परेशान होने से व्यक्ति को इस तक पहुंचने में बाधा देती है।

    स्त्री और पुरूष की चरमस्थिति में क्या अन्तर होता है?
    चरमस्थिति में सबसे साफ स्पष्ट अन्तर तो यहीं है कि पुरूष की चरमस्थिति वीर्य स्खलन से जुड़ी होती है। स्खलन प्रक्रिया में वीर्य मूत्र नली में स्खलित होता है और श्रेणि प्रदेश की मांसपेशियों में लयबद्ध संकुचन द्वारा प्रेरित होकर वह वीर्य लिंग से बाहर आ जाता है। औरत की चरमस्थिति में लयबद्ध संकुचन श्रोणि प्रदेश की मांसपेशियां और योनि की दीवारों के बीच साथ साथ होता है।

    गुदापरक सम्भोग क्या होता है?
    गुदापरक सम्भोग तब होता है जब कोई लड़का अपने लिंग को दूसरे लड़के या लड़की की गुदा और मलद्वार के अन्दर डालता है।

    क्या गुदापरक सम्भोग से कोई लड़की गर्भवती हो सकती है?
    गुदापरक सम्भोग से सामान्यतः तो कोई लड़की गर्भवती नहीं हो सकती, हां अगर शुक्राणु मलद्बार से बहकर योनि में प्रवेश कर जायें तो हो भी सकती है। अतः लम्बी अवधि तक गर्भ से बचने के लिए गुदारपरक सम्भोग को सर्वोत्तम नहीं माना जा सकता।

    मौखिक सम्भोग (सेक्स) क्या होता है?
    मौखिक सम्भोग तब होता है जब कोई व्यक्ति दूसरे के लिंग अथवा योनि को चाटता या चुसता है। किसी लड़के से मौखिक सम्भोग करके, अगर उसके वीर्य को निगल भी लिया जाये तो भी कोई लड़की उससे गर्भवती नहीं हो सकती।

    क्या शुक्राणु कपड़ों से पार जा सकते हैं?
    नहीं, सामान्यतः कपड़े शुक्राणुओं के अवरोधक होते हैं।

    एक महिला जिसकी योनि में यीस्ट इन्फैक्शन हो क्या उसके साथ मौखिक सम्भोग करने पर पुरूष को भी यीस्ट इन्फैक्शन हो सकती है?
    हां, ऐसा हो सकता है, खमीर जो कि फंगस जैसा होता है वह एसिडिक वातावरण में पनपता है जैसे कि योनि। मुख के अन्दर भी योनि जैसा ही वातावरण होता है। मुख में होने वाली यीस्ट इंफैक्शन को भ्रंश कहते हैं। यदि आप के गले पर कोई सफेद झिल्ली सी आ जाए, या गले के पीछे सफेद धब्बे हों या मुख के अन्दर सफेद दाग हो जाए तो वे मुख की यीस्ट इन्फैक्शन के लक्षण होते हैं - तो डॉक्टर से तुरन्त मिलें। चिन्ता न करें, इसका इलाज हो सकता है।

    नपुंसकता क्या है?
    यौनपरक सम्भोग में पर्याप्त आन्न्द पाने के लिए जब पुरूष का लिंग खड़ा नहीं हो पाता या खड़ा होकर रूक नहीं पाता तो उसे नपुंसकता कहते हैं।

    नपुंसकता के कारण क्या होते हैं?
    नपुंसकता निम्नलिखित कारणों से हो सकती है।

    मानसिक दबाव और अवसाद
    शराब / ड्रग का नशा
    धुम्रपान
    मधुमेह
    हृदय रोग
    उच्च रक्त चाप
    रक्त चाप, दबाव और पाचक रोगों में प्रयुक्त कुछ दवाइयां।
    नपुंसकता का उपचार कैसे होता है?
    नपुंसकता का उपचार करने के लिए

    शराब और सिगरेट छोड़ दें।
    (वियाग्रा) सिल्डेनाफिल टैस्टोस्टरोन जैसे ड्रग.....
    मूत्रनली या लिंग में दवा का इंजैक्शन लगाये
    लिंग को खड़ा करने वाले उपकरणों का प्रयोग करें।
    शल्य चिकित्सा
    मनोचिकित्सा।
    वियाग्रा कितनी प्रभावशाली होती है?
    शारीरिक अथवा मानसिक कारणों से लिंग के खड़े न हो पाने के रोग में वियाग्रा का उपयोग किया जाता है। जिन पुरूषों को हृदय तंत्री का रोग, मौल्लिटस मधुमेह, उच्च रक्त चाप, अवसाद हृदय की बाईपास सर्जरी हो चुकी हो और जो पुरूष अवसाद मुक्ति या रक्त चाप से मुक्ति देने वाली दवाएं लेते हैं उन में लिंग को खड़ा करने के लिए इसे प्रभावशाली माना जाता है। चिकित्सा प्रयोगों में, देखा गया है कि मधुमेह वाले 60 प्रतिशत और बिना मधुमेह वाले 80 प्रतिशत लोगों को वियाग्रा से लिंग के खड़े होने में बेहतर मदद मिलती है।

    वियाग्रा कितनी मात्रा में लेनी चाहिए?
    वियाग्रा देते समय डॉक्टर रोगी की उम्र स्वास्थ्य की सामान्य स्थिति और जो दवाएं वह ले रहा हो उन सब का ध्यान रखता है। प्रारम्भ करने की अधिकतर पुरूषों में मात्रा 50 मि.ग्रा. होती है, पर सह प्रभावों एवं प्रभविषुणता को देखते हुए डॉक्टर मात्रा को बढ़ा या घटा सकता है। अधिक से अधिक 100 मि.ग्रा. प्रत्येक चौबीस घन्टे की अवधि में संस्तुष्ट की जाती है।

    वियाग्रा किस प्रकार दी जानी चाहिए?
    सिल्डेनाफिल 15, 50 और 100 मि.ग्रा. की मौखिक गोलियों में उपलब्ध है। सम्भोग परक गतिविधि के प्रारम्भ के एक घन्टा पहले इसे लेना चाहिए। श्रेष्ठ परिणाम के लिए इसे खाली पेट लेना चाहिए क्योंकि खाने के बाद, यदि गरिष्ठ भोजन किया हो तो इसका प्रभाव और स्राव घट जाता है।

    वियाग्रा के सह प्रभाव क्या होते हैं?
    बिना विशेष सह प्रभावों के वियाग्रा अधिकतर लोगों को लाभ पहुंचाती है। जो सहप्रभाव सामने आये हैं वे बहुत हल्के हैं जिसमें सिर दर्द, पानी-पानी हो जाना, नाक बन्द होना, घबराहट, गैस बनना डॉयरिहा और दृष्टि की असामान्यता (नीला नीला दिखना या चमचमाहट शामिल है।

    नपुंसकता का उपचार करने के लिए लिंग या मूत्र नली में जो दवाईयां इंजैक्शन द्वारा दी जाती हैं वे कितनी प्रभावसाली होती हैं?
    खड़ेपन को बनाने और बनाये रखने के लिए लिंग में सीधे दवाइयां इंजेक्शन द्वारा दी जा सकती है। हालांकि ऐसे इंजैक्शन प्रभावशाली हो सकते हैं पर उनका बहुत उपयोग नहीं किया जाता क्योंकि वे बहुत पीड़ादायक होते हैं इस से लिंग में घाव भी हो सकते हैं और इस में छह घन्टे से भी अधिक लम्बे समय तक लिंग के खड़े रहने और पीड़ा देने का खतरा भी रहता है। लिंग को खड़ा करने के लिए मूत्र नली में दवा की गोली भी डाली जा सकती है। यह विधि भी अधिक लोकप्रिय नहीं है क्योंकि कई बार इससे लिंग में पीड़ा या शुक्राणुकोश में पीड़ा, मूत्रनली से हल्का रक्तस्राव, चक्कर आना और सम्भोग की साथिन की योनि में जलन जैसे प्रभाव पड़ सकते हैं।

    वैक्युम यन्त्र क्या होते हैं?
    मशीनी वैक्युम यन्त्र द्वारा लिंग के आसपास खालीपन का दबाव बनाया जाता है जिस से वह रक्त को लिंग में खींचता है, उसे बड़ा करता है और खड़ा करता है जिससे खड़ापन आ जाता है।

    नपुंसकता के सन्दर्भ में कौन सी सर्जरी की जाती है?
    नपुंसकता से ग्रस्त बहुत से पुरूषों में खड़ापन लाने के लिए परौसथीसिस नामक न डाले जाने वाले एक यन्त्र का प्रयोग किया जाता है।

    मनोवैज्ञानिक थैरेपी क्या होती है?
    विशेषज्ञ नपुंसकता का उपचार मनोविज्ञान आधारित तकनीक से करते हैं जिससे व्यक्ति की सम्भोग सम्बन्धी परेशानियां दूर हो जाती है। रोगी की साथी इस तकनीक को क्रियान्वित करने में मदद दे सकती है जिसमें अंतरंगता का विकास और उत्तेजक प्रेरणा भी शामिल है। जब शारीरिक नपुंसकता का उपचार होता है उस समय भी ऐसी तकनीकें चिन्ता को दूर करने में मदद देती हैं।



    साभार -जनसंख्या स्थिरता कोष

    Sunday, December 21

    श्वेत प्रदर (Leukorrhea)

    श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिआ (Leukorrhea) या "सफेद पानी आना" स्त्रियों का एक रोग है |इस रोग में योनि मार्ग से सफेद, चिपचिपा गाढ़ा स्राव होता है | यह स्राव  योनि की दीवारों से या गर्भाशय ग्रीवा से श्लेष्मा का स्राव होता है, जिसकी मात्रा, स्थिति और समयावधि अलग-अलग स्त्रियों में अलग-अलग होती है। यदि स्राव ज्यादा मात्रा में, पीला, हरा, नीला हो, खुजली पैदा करने वाला हो तो स्थिति असामान्य मानी जाएगी। इससे शरीर कमजोर होता है और कमजोरी से श्वेत प्रदर बढ़ता है। श्वेत प्रदर को दूर करने के लिए यहाँ कुछ घरेलू उपाय दिए जा रहे हैं फिर भी इस रोग के कारणों की जांच स्त्री रोग विशेषज्ञ से करा लेना चाहिए, ताकि उस कारण को दूर किया जा सके।

    रोग लक्षण


    1. हाथ-पैरों में दर्द, कमर में दर्द होना |

    2. पिंडलियों में खिंचाव होना |

    3. शरीर भारी रहना, चिड़चिड़ापन रहना।




    1. योनि स्थल पर खुजली होना

    2. चक्कर आना

    3. कमजोरी बनी रहना



    कारण


    • अत्यधिक उपवास

    • उत्तेजक कल्पनाएं

    • अश्लील वार्तालाप

    • सम्भोग में उल्टे आसनो का प्रयोग करना

    • सम्भोग काल में अत्यधिक घर्षण युक्त आघात

    • रोगग्रस्त पुरुष के साथ सहवास

    • सहवास के बाद योनि को स्वच्छ जल से न धोना व वैसे ही गन्दे बने रहना

    • बार-बार गर्भपात कराना भी सफेद पानी का एक प्रमुख कारण है।



    घरेलू उपाय :


    1. एक चम्मच पिसा आंवला + 2,3 च.शहद रोज दिन में एक बार खायें। 30 दिनों तक तथा खटाई से परहेज करें ।

    2. प्रातः खाली पेट 20 मिली. आंवले का रस व 2 चम्मच शहद लगातार एक माह तक लें श्वेत प्रदर ठीक होगा,आंवला में विटामिन सी होनेसे आपकी त्वचा ग्लो भी करेगी।

    3. केला खाकर ऊपर से दूध में शहद डालकर पियें। केला दूध अच्छी डाईट है इससे आपकी सेहत भी ठक होगी तथा प्रदर से होने वाली कमजोरी दूर होगी । ये कमसे कम तीन माह लगातार लें, गर्म दूध में शहद न डालें।

    4. कच्चे केले की सब्जी खायें,दो केले शहद में डालकर खायें।

    5. गर्मी के दिनों में फालसा खूब खायें शरबत पियें।

    6. कच्चा टमाटर खायें।

    7. सिंघाडे के आटे का हलुआ , तथा इसकी रोटी खायें लाभ होगा।

    8. प्रातः-सायं अनार के ताजे पत्ते 25-30 + 10-12 काली मिर्च साथ में पीस लें उसमें आधा ग्लास पानी डालें फिर छान कर पी जायें।

    9. भुना चना में खांण्ड(गुड़ की शक्कर) मिलाकर खायें,बाद में एक कप दूध में देशी घी डालकर पियें लाभ होगा।

    10. जीरा भूनकर चीनी के साथ खायें।

    11. प्रतिदिन प्रातः – सायं फिटकरी के पानी से गुप्तांगों को अंदर तक धोयें।

    12. एक माह तक प्रतिदिन 10 ग्रा. सोंठ एक कप पानी में काढा बनाकर पियें।

    13. एक ग्राम कच्ची फिटकरी एक केले को बीच में से काटकर भर दें इसे दिन या रात में एक बार खायें,सात दिन में प्रदर ठीक होगा।

    14. प्रातः-सायं एक बडा चम्मच तुलसी का रस,बराबर शहद लेकर चाटने से आराम होगा ।

    15. 3 ग्राम शतावरी या सफेद मूसली, 3 ग्रा.मिस्री इसका चूर्ण सुबह शाम गर्म दूध से लें। इससे रोग तो दूर होगा ही साथ कमजोरी भी दूर हो जायेगी।

    16. माजू फल,बडी इलायची,मिस्री समान मात्रा में पीसलें एक हफ्ते तक दिन में तीन बार लें । बाद में दिन में एक बार 21,दिन तक लें लाभ होगा।

    17. प्रातः- शाम दो चम्मच प्याज का रस बराबर मात्रा में शहद मिलाकर पिये।

    18. पीपल के दो चार कोमल पत्ते लेकर कूटपीसकर लुग्दी बनाकर दूध में उबालकर पीने से स्त्रियों के अनेक रोग दूर हो जाते है जैसे मासिक धर्म की अनियमितता तथा प्रदर रोग ।



     -डॉ.कैलाश द्विवेदी  (Dr.KAILASH DWIVEDI)