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Wednesday, December 28

..और आपकी सिगरेट छूट जाएगी !



शरीर एक यंत्र है। और उस यंत्र में आपने जो आदतें डाली हैं, उन आदतों को आपको नई आदतों से बदलना पड़ेगा; नई बातें सुनकर नहीं। इसका मतलब यह हुआ कि अगर आपको सिगरेट पीना छोड़ना है तो आपको ताजगी पैदा करने की दूसरी आदतें डालना पड़ेंगी। नहीं तो आप कभी नहीं छोड़ पाएँगे।

समझिए कि मैं आपको कहता हूँ कि जब भी आपको सिगरेट पीने का खयाल हो तब गहरी दस साँस लें, जिनसे ऑक्सीजन ज्यादा भीतर चला जाएगा। तो ताजगी ज्यादा देर रुकेगी, जितनी देर निकोटिन से रुकती है, और ज्यादा स्वाभाविक होगी। यह एक नई आदत है।

जब भी सिगरेट पीने का खयाल आए, गहरी दस साँस लें। और साँस लेने से शुरू मत करें, साँस निकालने से शुरू करें। जब भी सिगरेट पीने का खयाल आए एक्झेल करें, जोर से साँस को बाहर फेंक दें, ताकि भीतर जितना कार्बन डायआक्साइड है,
बाहर चला जाए। फिर जोर से साँस लें, ताकि जितना कार्बन डायआक्साइड की जगह थी उतनी ऑक्सीजन ले ले। आपके
खून में ताजगी दौड़ जाएगी। तब आप सिगरेट छोड़ सकते हैं। क्योंकि उससे ज्यादा बेहतर, ज्यादा अनुकूल, ज्यादा स्वाभाविक, ज्यादा श्रेष्ठ विधि आपको मिल गई। तो सिगरेट छूट सकती है। नहीं तो कोई उपाय नहीं।
ओशो : (ताओ उपनिषद)
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