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Wednesday, January 18

मासिकधर्म, गठिया, वात, गैस, कमजोरी, आंतों के रोग, कब्ज दूर करती है यह मुद्रा !



  • इस मुद्रा को करने से हाथ-पैरों तथा शरीर के दर्द में अत्यंत लाभ होता है।

  • वायु जोड़ मुद्रा के निरंतर अभ्यास से गठिया, वात, गैस, कमजोरी, आंतों के रोग, कब्ज दूर होती है |

  •  इसके अभ्यास से महिलाओं का मासिकधर्म समय पर न आना या ज्यादा मासिकस्राव का आना जैसे रोग समाप्त हो जाते हैं।

मुद्रा की विधि इस विडियो में देखें :


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Saturday, January 14

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Wednesday, January 11

यह प्रयोग मात्र 2 दिन में चालू करे रुका हुआ मासिक धर्म - एक बार अवश्य आजमायें !





By- Dr.Kailash Dwivedi

हस्त मुद्राओं के अंतर्गत अंगुलियों से बनने वाली मुद्राओं में विभिन्न रोगों को दूर करने की शक्ति छिपी है। हमारा शरीर पंचतत्वों (पृथ्वी,जल,अग्नि,वायु और आकाश) से निर्मित है हाथ की अंगुलियों में यह पाचों तत्व मौजूद होते हैं। पांचों अंगुलियाँ पंचतत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं। जिससे अलग-अलग विद्युत धारा बहती है। इसलिए मुद्रा विज्ञान में जब अंगुलियों का आपस में स्पर्श कराते हैं, तब विद्युत धारा शरीर में समाहित होकर रोगनिवारक शक्ति को जगाती है फलस्वरूप हमारा शरीर निरोगी होने लगता है।


विधि :

कनिष्ठिका (सबसे छोटी अंगुली) को मोड़कर इसी अंगुली की जड़ में लगाने से रजमुद्रा बनती है।

लाभ :


  1. यह मुद्रा स्त्रियों में मासिकधर्म की अनियमितता को दूर करती है |

  2. अधिक या कम मासिक स्राव का होना ,जैसे लक्षणों को दूर करती है |

  3. मासिक स्राव के समय रजमुद्रा करने से सिर में भारीपन, छाती, पेट, पीठ, कमर का दर्द आदि रोगों मे लाभ मिलता है |

  4. यह एक चमत्कारिक मुद्रा है मासिक धर्म सम्बन्धी रोगों से पीड़ित महिलायें इसे अवश्य करें और लाभ उठायें |

  5. मासिक धर्म के अतिरिक्त स्त्रियों के प्रजनन अंगों के अन्य रोगों को भी यह मुद्रा जड़ से दूर कर देती है।

  6. बालिकाओं के प्रथम मासिक स्राव के समय यदि वह रजमुद्रा का अभ्यास प्रारंभ कर दे तो जीवन में कभी भी मासिकधर्म से संबंधित कोई भी रोग उसे नहीं होगा ।


किस समय एवं कितनी देर तक करें :


  • यह मुद्रा प्रातः, दोपहर एवं सायं 15-15 मिनट तक करनी चाहिए |


सावधानियां :


  • भोजन के तुरंत पहले या बाद में यह मुद्रा न करें | 1 घंटा पहले एवं 1 घंटा बाद कर सकते हैं |
    चलते – फिरते हुए रजमुद्रा न करें | स्थिर बैठकर या लेटकर करें |


पुरुषों के लिए भी लाभकारी है रजमुद्रा :

रजमुद्रा करने से सिर्फ स्त्रियों को ही लाभ नही होता बल्कि अगर पुरुष भी इस मुद्रा को करता है तो उनके वीर्य संबंधी समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं।


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