Showing posts with label Diet therapy. Show all posts
Showing posts with label Diet therapy. Show all posts

Thursday, April 13

पेट के लिए रामबाण है बेल



By- Dr. Kailash Dwivedi

गर्मियों की शुरुआत के साथ ही शरीर के लिए ऐसे खाद्य और पेय पदार्थों की आवश्यकता बढ़ जाती है, जो शरीर को गर्मी से राहत देते हुए ठंडक प्रदान करें। उनमें से बेल भी एक है, जो पेट के लिए सबसे अच्छा माना गया है।ऊपर से भूरे सुनहरे रंग वाले पके बेल फल का गूदा पीला और खुशबूदार होता है। ठंडी तासीर होने की वजह से इसे शीतल फल भी कहा जाता है।

न्यूट्रिशनल वैल्यू :

बेल में प्रोटीन, फास्फोरस, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, कैल्शियम, फैट,फाइबर, विटामिन-सी, बी पाया जाता है। आयुर्वेद में इसके रस को खाली पेट पीने की सलाह दी गई है। यह ज्यादा फायदेमंद होता है। दिन भर बेल का शरबत पीने से कोई फायदा नहीं।

पेट के लिए रामबाण है बेल :

दिमाग और हृदय को शक्ति प्रदान करने के साथ पेट के रोगों में भी बेल को रामबाण माना गया है। यह एसिडिटी दूर करता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमताभी बढ़ाता है। अल्सर और कब्ज के साथ पेचिश की समस्या में यह फायदेमंद है।पेट संबंधी समस्या के लिए इसके मुरब्बे का सेवन करें।

लू से बचाता है :

गर्मियों में लू लगने पर बेल के ताजे पत्तों को पीसकर पैर के तलवे पर लगाने से आराम मिलता है। लू लगने पर इसके रस को मिश्री के साथ पीना भी सहीरहता है। दस्त हो रहा हो, तो इसके कच्चे फल के गूदे का चूर्ण बनाकर काले तिल के चूर्ण के साथ खाएं।

कैसे करें स्टोर  :

बेल के गूदे में पर्याप्त मात्रा मेंबीज पाए जाते हैं, जिन्हें निकालकर गूदे को सुखाने के बाद चूर्ण बनाया जा सकता है। इस चूर्ण का सेवन पेट के रोगों में फायदेमंद होता है। गांवों में लोग बेल के गूदे की टिकिया बनाकर रखते हैं। इस मौसम में आप पके बेल और कच्चे बेल दोनों के गूदे का चूर्ण बनाकर स्टोर कर लें। कच्चे बेल के टुकड़े काटकर उनका हवन करने से घर कीटाणु रहित हो जाता है।

loading...

Monday, February 20

जानिए टोन्ड मिल्क के फायदे !



Dr.Kailash dwivedi

जानें कैसे बनता है टोन्‍ड मिल्‍क ?

टोन्‍ड मिल्‍क को बनाने के लिये स्‍किम्‍ड मिल्‍क पावडर को पानी के साथ फुल क्रीम मिल्‍क के साथ मिला दिया जाता है, जिससे दूध में फैट कंटेन्‍ट घट जाता है और क्‍वालिटी बढ़ जाती है।

लो कैलोरी पेय का अच्छा विकल्प है टोन्‍ड मिल्‍क :

एक कप टोन्‍ड मिल्‍क में लगभग 150 कैलोरी होती है, वहीं दूसरी ओर फुल क्रीम वाले दूध के एक कप में 285 कैलोरीज होती हैं। इसलिए यदि आप वजन कम करना चाहते हैं और दूध भी नही छोड़ सकते, ऐसी स्थिति में टोन्‍ड मिल्‍क ले सकते हैं |

पोषक तत्वों से भरपूर :

टोन्‍ड मिल्‍क में फुल क्रीम वाले मिल्‍क की तरह फैट के अतिरिक्त सभी पोषक तत्‍व होते हैं। इस दूध में कैल्‍शियम की पर्याप्त मात्रा होती है जो हड्डियों, दांत और मासपेशियों के लिये अच्‍छा होता है। इसमें आसानी से पचने वाले  प्रोटीन भी भरपूर होता है। टोन्‍ड मिल्‍क में पोटैशियम भी होता है जो ब्‍लड प्रेशर के लेवल को सामान्‍य बनाए रखता है।

मधुमेह ग्रस्त व वृद्ध व्यक्तियों के लिए उपयुक्त :

टोन्‍ड मिल्‍क में कैलोरी की मात्रा कम होती है इसलिए  यह दूध मधुमेह से ग्रस्त एवं  वृद्ध व्यक्तियों के लिये उपयुक्त होता है।

हृदय रोग से बचाये :

टोन्‍ड मिल्‍क पीने से हमारे भोजन से वसा कि मात्रा काफी हद तक कम हो जाती है, खासतौर पर दूध से मिलने वाला सैचूरेटड फैट ।जिससे हृदय रोग होने कि आशंका कम हो जाती है।
loading...

Monday, February 13

इन खाद्यों से बढ़ा सकते है अच्छा (HDL) कोलेस्ट्रॉल !



-  डॉ.कैलाश द्विवेदी 

कोलेस्ट्रॉल कोशिकाओं की दीवारों, नर्वस सिस्टम के सुरक्षा कवच और हॉर्मोस के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। यह प्रोटीन के साथ मिलकर लिपोप्रोटीन बनाता है, जो फैट को खून में घुलने से रोकता है। यह एक वसायुक्त तत्व है जिसका उत्पादन लिवर करता है | शरीर में दो तरह के कोलेस्ट्रॉल होते हैं -अच्छा कोलेस्ट्रॉल जिसे HDL  (हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन) कहते हैं एवं  बुरा कोलेस्ट्रॉल जिसे LDL  (लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन ) कहा जाता है। HDL कोलेस्ट्रॉल हल्का होता है जोकि रक्त नलिकाओं  में जमी वसा को अपने साथ बहा ले जाता है। जबकि LDL  चिपचिपा और गाढा होता है।  इसकी मात्रा अधिक होने पर यह ब्लड वेसेल्स और आर्टरी की दीवारों पर जम जाता है, जिससे रक्त के बहाव में रुकावट आती है। LDL  बढने से मोटापा, उच्चरक्तचाप एवं हार्ट अटैक जैसी समस्याएं हो सकती हैं।


कोलेस्ट्रॉल की जांच कैसे करें ?


कोलेस्ट्रॉल की जांच के लिए लिपिड प्रोफाइल नामक ब्लड टेस्ट कराया जाता है। किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में कुल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 200 mg/dl  से कम जिसमे HDL  60 mg/dl  से अधिक और LDL  100 mg/dl से कम होना चाहिए।

इन खाद्यों से बढ़ा सकते है अच्छा (HDL) कोलेस्ट्रॉल


garlic clovesलहसुन :


प्रतिदिन प्रातः खाली पेट लहसुन की दो कलियां छीलकर छोटे-छोटे टुकड़े कर पानी के साथ निगल लें | लहसुन में पाए जाने वाले एंजाइम्स  बुरे कोलेस्ट्रॉल (LDL) एवं हाई ब्लडप्रेशर को कम करने में सहायक हैं।



ड्राई फ्रूट्स

ड्राई फ्रूट्स :


प्रतिदिन प्रातः शाम के भीगे हुए  5 बादाम,  2 अखरोट एवं 5 पिस्ता  का सेवन शरीर में फाइबर एवं ओमेगा-3 की पूर्ति करता है जोकि  बुरे कोलेस्ट्रॉल को घटाने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढाने में सहायक  है |







ओट्स :


ओट्स में बीटा ग्लूकॉन होता है जो कब्ज को दूर करता है। यह LDL कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकता है। इसीलिए नियमित रूप से प्रतिदिन 1 कटोरी ओट्स का सेवन बढे हुए कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी लाता है।



3

अंकुरित अन्न एवं सोयाबीन :

सोयाबीन, दालें और अंकुरित अन्न रक्त से LDL कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकालने में लिवर की मदद करते हैं। ये चीजें अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढाने में भी सहायक होती हैं। गठिया के रोगी दालों के सेवन से पूर्व रक्त में यूरिक एसिड की मात्रा की जांच अवश्य करा लें | यदि यूरिक एसिड बढ़ा हो दालों का सेवन न करें |



नींबू

खट्टे फल एवं नींबू :


नींबू प्रजाति के फलों में पाए जाने वाले तत्व शरीर की मेटाबालिज्म को बढ़ाते हैं जोकि कोलेस्ट्राल को कम करने में सहायक होता है |इसके लिए प्रातः शौच जाने के पहले गुनगुनेपानी में 1 नींबू का रस पिया जा सकता है | संतरा, मौसमी, अनन्नास जैसे फलों का सेवन भी लाभदायक है |
loading...

Sunday, October 9

कब्ज -जानिए इसका कारण एवं निवारण

सारी दुनिया भाग-दौढ़ की जिन्दगी में उलझी हुई है। आधुनिकता की चकाचैंध में सारी दुनिया एक दूसरे को ढकेलती हुई आगे बढ़ जाना चाहती है। आधुनिकता की चकाचैंध और दिन रात की भाग दौढ़ इन दोनों ने ही हमारे स्वास्थ्य पर बहुत ही बुरा प्रभाव डाल रखा है। सभी चिकित्सा शास्त्री चिन्तित हैं, कैसे इसका निदान किया जाये। 95 प्रतिशत भारतीय किसी न किसी रोग से पीड़ित दिख रहे हैं। मोटापा, रक्तचाप, मधुमेह, हृदय-दोर्बल्य आदि से प्रायः सभी भयभीत हैं। छोटे-छोटे किशोरावस्था के बच्चे तक इन भयंकर रोगों से पीड़ित दिखने लगे हैं। छोटी उम्र में ही आंखों पर चश्मों ने अधिकार जमा लिया है। शायद ही ऐसा कोई भाग्यशाली व्यक्ति हो जो कोष्ठबद्धता से मुक्त हो। इस कोष्ठबद्धता ने हम सवों को अपने शिकंजे में जकड़ लिया है।

स्वास्थ्य की चिन्ता तो हम सब करते ही हैं और करनी भी चाहिए पर शायद ही कोई समझता है कि स्वास्थ्य है क्या? स्वास्थ्य की परिभाषा क्या है? मानव शरीर के विभिन्न संस्थानों की सुर-ताल और लय-युक्त संगीत की स्वर लहरी के समान अहर्निश कार्यरत रहने का नाम को ही स्वास्थ्य कहा जायेगा। मानव शरीर के विभिन्न संस्थानों में मुख्यतः श्वसन-संस्थान, संचलन संस्थान, पाचन संस्थान, वाहिर्गमन संस्थान और तंत्रिका संस्थान है। इसके अतिरिक्त और भी छोटे-मोटे कई संस्थान हैं- में सभी संस्थान आपस में ताल-मेल बिठाकर एक दूसरे का सहयोग करते हुए अहर्निश कार्यरत हैं। समझने के लिए एक छोटा सा उदाहरण लें- श्वसन संस्थान यानि नासिका ग्रन्थ से श्वास लेना-छोड़ना इसकी सामान्य गति है प्रति मिनट 18, चिकित्सा भाषा में मायोग्लोबिन एक शब्द आता है जो रक्त का परिचायक है, इसकी औसत संख्या है 290, तुलनात्मक दृष्टि से यदि देखें तो श्वास की गति 18 प्रति मिनट , नाड़ी की गति 72 और मायोग्लोबिन की गति 290 अर्थात 18:72:290 तो इसका अनुपात हुआ 1: 4: 16 ये अनुपात स्वस्थ्यता का परिचायक है अर्थात यह सारे संस्थान ताल-मेल बिठाकर एक दूसरे का सहयोग करते हुए चल रहे हैं यही स्वस्थ्यता का परिचायक है। इसमें तनिक भी असंतुलन हमारे शरीर को रोग ग्रस्त बनायेगा। नाड़ी की गति कम हुई तो चिन्ताजनक, अधिक हुई तो भी चिन्ताजनक। श्वास की गति कम या अधिक भी चिन्ताजनक, मायोग्लोबिन, हेमोग्लोबिन, केलेस्ट्राॅल कम याा अधिक हुई तो ये भी चिन्ताजनक।

संतुलन कैसे बिठायी जाये इन सभी संस्थानों का आपस में ताल-मेल बिठाना- ये हमारे शरीर का कार्य है। प्रकृति ने हमारे शरीर की संरचना बहुत ही अद्भुत और सुनियोजित ढंग से कर रखी है। हमारा मानव-शरीर स्व-निर्मित है, भले ही मां-बाप ने बीज-रोपण किया हो। यह शरीर स्वयं पोषित है, गर्भ में मानव-शिशु अपना विकास स्वयं करता रहता है। मानव शरीर स्वयं संरक्षित है, अन्दर की गन्दगी स्वयं बाहर निकालते रहती है किन्तु बाहर की गन्दगी शरीर में प्रवेश नहीं कर पाती। इस तरह प्रकृति ने इसे स्वयं संरक्षित कर रखा है।

यह शरीर स्वयं नियंत्रित है। शरीर के टूटन-फूटन का यह स्वयं मरम्मत कर लेता है। शरीर को सुगठित बनाये रखने में सुव्यवस्थित एवं स्वस्थ रखने के निमित प्रकृति की अपनी बहुत सुन्दर प्रणाली है यहां, किन्तु हम हैं कि अपनी बुद्धि और स्वभाव से इसके साथ कोई सहयोग नही कर पा रहे हैं। अपने गलत आहार-बिहार से शरीर को अस्वस्थ बना देते हैं, रोगीी बना देते हैं, फलस्वरूप कोष्ठबद्धता हमें तोहफे के रूप में मिल जाता है।

जब शौच को जायें, गोल आकार के पीले रंग के तीन चार गठे हुए मल के टुकड़े बैठते ही बाहर आ जाये और गुदा के बाहर आजू-बाजू मल का कोई अंश न रह जाये और दो-तीन मिनट पश्चात हम शौच से निवृत हो बाहर आ जाये तो यह सूचित करता है कि वो व्यक्ति स्वस्थ है। हम सभी विचार करें कि क्या यह लक्षण मुझमें परिलक्षित होता है, यदि नहीं, तो हम अस्वस्थ हैं, रोगी हैं। वैसे प्रायः हम सभी केष्ठबद्धता के शिकार हैं ही। कुछ लोग इसे बीमारी नहीं मानते पर है ये सभी बीमारियों की मूल जड़। हरनिया, बबासीर, भगन्दर, कोलाइटीज, गैस की शिकायत, पेट दर्द, सर दर्द इन सभी के पीछे कोष्ठबद्धता एक मात्र कारण है।

भोजन करने के तरीके यदि हम जान लें तो कोष्ठबद्धता हमें कभी नहीं सतायेगी। भोजन करने वाले चार प्रकार के लोग होते हैं- एक तो स्वाद के लिये भोजन करते हैं, यह स्वाद बुद्धि वाले कहे जाते हैं, दूसरे पुष्टि बुद्धि वाले होते हें, जो शरीर के पोषण हेतु आहार लेते हैं, तीसरे प्रसाद बुद्धि वाले होते हैं, भक्त लोग जो भोजन को प्रसाद रूप में ग्रहण करते है और चौथे साधन बुद्धि वाले होते हैं शरीर को जितनी और जैसी आवश्यकता है मात्र उतना ही वो आहार लेते हैं। ये साधन बुद्धि वाले होते हैं। शरीर की साधना और अपनी दिनचर्या की भी साधना। स्वाद-बुद्धि, पुष्ट-बुद्धि और प्रसाद बुद्धि वाले जो आहार लेते हैं प्रायः ये सभी रोगी होते हैं, कोष्ठबद्धता से ग्रसित रहते हैं।

कोष्ठबद्धता से मुक्त होने के लिए प्रायः हम सभी लोग नित्य प्रति औषधियों का सेवन करते हैं- ये औषधियां घोड़ों पर चाबुक मारने की तरह काम करती हैं। आन्तिरिक अंश-अव्यवों को अपने प्रभाव में लेकर मल-मूत्र का त्याग कराती है। औषधियां जब तक सेवन करते हैं, पेट कुछ साफ हो जाता है पर पूर्ण रूप से नहीं। औषधियों का सेवन बन्द होते ही पूर्व स्थिति बनी रहती है।

कुछ लोग पेट साफ करने के निमित्त जुलाब लेते हैं- यह एक तेज दवा होता है जिसका बराबर प्रयोग करते रहने से हमारा शरीर के मल- निःसारण यंत्र शिथिल एवं निष्क्रिय होते जाते हैं, जिसका शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। कुछ लोग नशीली चीजों का प्रयोग पेट साफ करने के लिये जैसे- तम्बाकू, बीड़ी-सिगरेट, चाय काॅफी आदि। ये सभी बुरी आदतें हैं। एक बार लत पड़ गई तो फिर छूट्ती नहीं। इसका दुःष्प्रभाव समस्त शरीर पर होता है और हम जिन्दगी भी दुखी रहते हैं।
अन्य कारणों में असंतुलित भोजन का लेना, बिना भूख भोजन करना और यदा-कदा ठूँस-ठूँस कर खाना ये कोष्ठबद्धता लाता है, हाजमा बिगड़ जाता है।

कोष्टबद्धता से पीड़ित रोगी तली-भुनी चीजों को अथवा तेल-घी से बनी चीजों का प्रयोग कम से कम करें। जलेबी एवं अन्य मीठी वस्तुओं से परहेज करें। अधिक उम्र वाले दाल का प्रयोग न करें। रेशेदार हरी सब्जियां एवं फलों का सेवन अधिक करें। मैदे से बनी चीजें तो इनके लिए वर्जित है। भोजन के समय जल का सेवन न करें। भोजन से एक घंटा पूर्व अथवा बाद यथेष्ट मात्रा में जल का सेवन करें। प्रातःकाल बस्ति-क्रिया अवश्य करें।

यदि हम सभी योग का सहारा लें तो केवल केष्ठबद्धता ही नहीं, अन्य भयंकर रोगों से भी मुक्ति मिल सकती है। यदा-कदा प्रातः काल वस्ति-क्रिया का प्रयोग करें। प्रातः-सायं आसन-प्राणायाम आधा घंटा करें और यथेष्ट मात्रा में शुद्ध जल का सेवन करें। आसनों में त्रिकोणासन, अर्द्धकटि-आसन, कटि-चक्र-आसन, पाद हस्त आसन, भुजंग आसन, मयूर आसन, सर्वांग आसन आदि प्रत्येक एक-दो मिनट किया करें। प्राणायाम में अनुलोम-विलोम, भात्रिका, कपालभाति और अग्निसार क्रिया ये नित्य करना।

विचार हमेशा सकारात्मक होना चाहिए, नकारात्मक नही। सूर्योदय एवं एक-आध घंटा शुद्ध हवा में 4-5 किलो मीटर टहलना सेहत के लिए अत्यंत लाभदायक है और इसके साथ यदि भ्रमण-प्राणायाम जोड़ दिया जाये तो सोने में सुहागा।


चन्द्रभान गुप्त (योगाचार्य)
वृन्दावन (उ0प्र0)

Wednesday, March 30

गर्मियों में खरबूजा खाएं - स्वस्थ्य रहें !

गर्मी के मौसम में ठंडे फलों के रूप में खरबूजे का प्रयोग खाने में अधिक किया जाता है। खरबूजा कच्चा होने पर हरे रंग का होता है और उस पर काली व कत्थई पटि्टयां होती हैं। पकने पर खरबूजा हरा व कुछ पीला हो जाता है और इसके ऊपर वाली पटि्टयां सफेद हो जाती हैं।

खरबूजा मन व मस्तिष्क को ठंडा व शांत करने वाला, प्यास को दूर करने वाला, मूत्रल, शक्तिदायक, कब्ज दूर करने वाला, शीतल एवं वीर्यवर्धक होता है। यह  भूख बढ़ाता है एवं पेट की गर्मी व खराबी को दूर करता है। खरबूजा पथरी को गलाकर गुर्दे के रोग को खत्म करता है, यह जलोदर एवं पीलिया रोग को समाप्त करता है। इसका प्रयोग छाती का दर्द और लिवर की सूजन को ठीक करने के लिए किया जाता है। खरबूजे के बीजों का चेहरे पर लेप करने से चेहरे की चमक बढ़ती है।

100 ग्राम खरबूजे में पाए जाने वाले विभिन्न तत्व :













Calories 34























































% Daily Value*
Total Fat 0.2 g0%
Saturated fat 0.1 g0%
Polyunsaturated fat 0.1 g
Monounsaturated fat 0 g
Cholesterol 0 mg0%
Sodium 16 mg0%
Potassium 267 mg7%
Total Carbohydrate 8 g2%
Dietary fiber 0.9 g3%
Sugar 8 g
Protein 0.8 g1%




























Vitamin A67%Vitamin C61%
Calcium0%Iron1%
Vitamin D0%Vitamin B-65%
Vitamin B-120%Magnesium3%




विभिन्न भाषाओं में खरबूजे के नाम :


हिन्दी    :  खरबूजा
अंग्रेजी   :  मेलन
संस्कृत  :  दशांगुल, खर्बूज
बंगाली   :  खरबूजा
मराठी    :  खर्बुज
गुजराती  :  खरबूज
तैलगी    :   खरबूजं
फारसी   :   खरपुजा
अरबी    :   वित्तिखा


विभिन्न रोगों में खरबूजे का प्रयोग :


पथरी:

1 चम्मच खरबूजे का छीला हुआ बीज + 15 दाने बड़ी इलायची +2 चम्मच मिश्री के साथ पीस लें इस मिश्रण को  1 कप पानी में मिलाकर प्रतिदिन प्रातः- सायं पीने से गुर्दे की पथरी में अत्यंत लाभ मिलता है।

कब्ज:

कब्ज से पीड़ित रोगी को पक्का खरबूजा खाना चाहिए। इससे कब्ज नष्ट होती है।

मूत्रकृच्छ्र (पेशाब करने में परेशानी):

खरबूजा के बीजों को खाने से मूत्रकृच्छ रोग ठीक होता है।

त्वचा :

त्वचा में कनेक्टिव टिशू पाए जाते हैं। खरबूजे में पाए जाने वाले कोलाजन प्रोटीन इन कनेक्टिव टिशू में कोशिका की संरचना को बनाए रखता है। कोलाजन से जख्म भी जल्दी ठीक होते हैं और त्वचा को मजबूती मिलती है। इसलिए खरबूजे का नियमित सेवन त्वचा से रुखापन को दूर करता है।

पुरानी खाज :

खरबूजे में विटामिन सी पाया जाता है जोकि पुरानी खाज में लाभदायक है।

गैस्ट्रिक (अल्सर):

खरबूजे का रस निकालकर खाली पेट पीने से गैस्ट्रिक रोग समाप्त होता है।

गुर्दों का रोग:

खरबूजे के बीजों को छीलकर पीस लें इसे पानी में मिलाकर हल्का सा गर्म करके पीएं। इसका प्रयोग कुछ दिनों तक करने से गुर्दों का रोग ठीक हो जाता है।

लिवर की सूजन :

खरबूजा सेवन करने से लिवर की सूजन दूर होती है।

रक्तपित्त:

खरबूजे के बीजों को कूटकर पानी में 12 घंटे तक भिगोएं और फिर इसमें सौंफ की जड़, कासनी की जड़ व मिश्री मिलाकर शर्बत बना लें। इस शर्बत का सेवन करने से रक्तपित्त का रोग ठीक होता है।

सिर का दर्द:

खरबूजे के बीजों को गाय के घी व मिश्री में मिला लें और इसे बर्फी की तरह जमाकर सुबह-शाम लगभग 50-50 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इसके बाद गाय के दूध में गाय का घी मिलाकर पीएं। इससे सिर का दर्द ठीक होता है।

शरीर की कमजोरी:

खरबूजा 250 ग्राम की मात्रा में खाकर ऊपर से एक किलो पानी का शर्बत बनाकर पीने से शरीर शक्तिशाली बनता है।

गर्दन में दर्द:

खरबूजे के पत्ते को गर्म करके उस पर थोड़ा सा तेल लगा कर गर्दन पर लपेटकर ऊपर से पट्टी बांधने से गर्दन का दर्द दूर होता है।
वजन कम करता है खरबूजा


वजन कम करने की इच्छा वालों के लिए खरबूजा बहुत अनुकूल फल है |

Saturday, February 6

कोलेस्ट्रॉल को कम करने के प्राकृतिक उपाय

अधिक कोलेस्ट्रॉल से दिल के दौरे का खतरा अधिक हो जाता है। रक्त में कोलेस्ट्रॉल की बहुत ज्यादा मात्रा कोरोनरी धमनी रोग (coronary artery disease ) का कारण हो सकता है। परन्तु यदि अपनी जीवनशैली एवं भोजन में कुछ परिवर्तन कर लिया जाये तो इस खतरे को टाल सकते हैं | कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाली अनेकों दवाईयां प्रचलन में हैं परन्तु इनका शरीर पर होने वाले दुष्प्रभाव से कम लोग ही परिचित हैं | सबसे पहले आईये जानते हैं कि कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाईयों का शरीर पर क्या दुष्प्रभाव पड़ता है -

कोलेस्ट्रॉल दवाओं के कुछ प्रमुख दुष्प्रभाव :




  • असामान्य जिगर कार्य (Abnormal liver function)

  • एलर्जी (त्वचा पर चमकते हुए निशान ) (Allergic reaction (skin rashes))

  • सीने में जलन (Heartburn)

  • चक्कर आना (Dizziness)

  • अनियमित दर्द होना (Abdominal pain)

  • कब्ज (Constipation)

  • सेक्स की इच्छा में कमी (Decreased sexual desire)

  • यादास्त कम होना (Memory loss)

  • निकोटिनिक एसिड के साथ निस्तब्धता।



इस स्थिति से बचने के लिए सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात है कि हमारा खान-पान ऐसा हो कि हमें कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाईयों का कम से कम या न प्रयोग करना पड़े। ऐसे अनेकों खाद्य भी हैं जो हमारे हृदय को नुकसान पहुँचा सकते हैं इसलिए हमें ऐसे खाद्य पदार्थों को चुनना चाहिए जो हमारे हृदय के लिए अच्छे हो। प्रकृति ने हमें अनेकों स्वास्थ्यप्रद एवं स्वादिष्ट खाद्य दिए हैं जो ह्रदय के लिए अत्यंत उपयोगी है।

कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए क्या करें ? :




  • हरी सब्जियां और फलों का सेवन करें |

  • साबुत अनाज (दालें इत्यादि)

  • सूखे मेवे (ऐसे प्रोटीन का सेवन करे जिसमे संतृप्त वसा न हो। जैसे- सेम, नट,लेकिन ध्यान रहे कि इनकी मात्रा भी सही होनी जरुरी है।)

  • फलियाँ (सेम,मटर आदि)

  • बीज (अलसी, यह ओमेगा-3 ट्राइग्लिसराइड्स को कम करता है, यह आपकी धमनियों को पट्टिका से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है, निम्न रक्तचाप, और असामान्य हृदय की धड़कन के खतरे को भी कम करता है।)

  • असंतृप्त वसा ( unsaturated fats ) जैसे कैनोला, जैतून, और मूंगफली के तेल। ये तेल  धमनियों को ब्लॉक होने से रोकते हैं।

  • प्राकृतिक हर्ब्स  जैसे लहसुन (garlic) का उपयोग करें।

  • नियमित रूप से योग/व्यायाम करें। ज्यादा सक्रिय रहने की कोशिश करें। यह हमारे हृदय को मजबूत बनाता है। और रक्त प्रवाह में सुधार करता है। अच्छे (HDL) कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है और रक्त शर्करा (blood sugar) और शरीर के वजन को नियंत्रित करता है।



इनसे बचें :




  1. फास्ट फ़ूड जैसे, बेकरी की चीजें, पैक्ड फ़ूड, खासकर मांसाहारी , हॉट डॉग, सॉसेज, चिकन नगेट्स जैसी चीजें न खाएं। ये सभी चीजें हमारे हृदय के लिए अच्छी नहीं होती।

  2. उच्च रक्तचाप की अवस्था में तले-भुने और नमकीन खाने का प्रयोग न करें।

  3. शरीर के वजन को न बढ़ने दें। इस से रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, और रक्त शर्करा का स्तर सभी पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा। साथ ही इस से दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा भी टलेगा।

  4. धूम्रपान करते हैं तो जल्द ही छोड़ दें । अनुसंधान से पता चलता है कि धूम्रपान छोड़ने से 33% हृदय की बीमारी से मौत का खतरा कम हो जाता है।



 

 

Friday, February 5

जानिए विभिन्न खाद्यों में पोषक तत्व














































































































































































































Name of itemsStandard 100 gms
( grams) ( grams)( grams)( grams)
Qty.CaloriesFatCarbsProtin
Toasted Whole Sesame Seeds1005654825.7416.96
Dry Roasted Almonds10059752.8319.2922.09
Dry Roasted Pistachio10056845.9726.7821.35
Dry Roasted Peanuts10057146.4321.4221.42
Papayas100390.149.810.61
Grapes100690.1618.10.72
Pomegranate100680.317.170.95
Orange100620.1615.391.23
Mangos100650.27170.51
Banana1001050.3926.951.29
Watermelon100300.157.550.61
Guava100680.9514.322.55
Cabbage100240.125.581.44
Cooked Cauliflower100220.373.961.75
Cooked Carrots100542.487.990.74
Cooked Green String Beans100593.17.611.82
Cooked Green Peas1001012.4515.165.18
Tomato Soup100421.27.351.25
Sweet and Sour Soup100300.355.911.32
Flax Seeds10053442.1628.8818.29
Curd1001004.23.4511.75
Paneer10030023.333.3320
Chappati31001701.5532.55.84

Monday, September 7

जानिए ! वीर्य एवं सम्भोग शक्ति बढ़ाने वाले 5 स्वादिष्ट पकवान

सिंघाड़े का हलवा :


सामग्री :

  • सिंघाड़े का आटा    - 25 ग्राम

  • देशी घी                 - 25 ग्राम

  • चीनी                    - 50 ग्राम

  • दूध                      - 250 मिली.


बनाने की विधि :

सिंघाड़े के आटे में घी डालकर धीमी आंच पर लाल होने तक पकने के लिए रख दें। जब यह आटा अच्छी तरह से सिक जाए तो इसमें दूध डालकर पकाएं । जब यह गाढ़ा हो जाए तो इसमें चीनी डालकर चलाएं और तैयार होने के बाद नीचे उतार लें।

सेवन विधि :
इस हलुए को प्रतिदिन प्रातः खाली पेट सेवन करें ऊपर से एक गिलास गुनगुना दूध पियें |
लाभ :

इसके सेवन से वीर्य की वृद्धि होती है एवं संभोग शक्ति बढ़ती है।






छुआरे का हलुवाछुआरे का हलुवा :


सामग्री :

  • छुहारा – 50 ग्राम

  • देशी घी – 50 ग्राम

  • दूध – 300 मिली.

  • पिसी हुयी मिश्री – 50 ग्राम

  • इलायची – 3-4


बनाने की विधि :

छुआरों के बीज निकाल कर 250 ग्राम दूध में उबालकर बारीक पीस कर पेस्ट बना लें । इसके बाद कड़ाही में घी डालकर छुआरों के पेस्ट को घी में भून लें। जब यह लाल हो जाए तो इसमें दूध डालकर पकाएं और गाढ़ा हो जाने पर पिसी हुई मिश्री एवं इलायची के दानों का पाउडर मिला लें।

सेवन विधि :

प्रतिदिन प्रातः खाली पेट 25 से 50 ग्राम की मात्रा, दूध के साथ लें |

लाभ :

शरीर में बल और वीर्य की मात्रा बढ़ती है एवं संभोग शक्ति तेज होती है |




 

उड़द की खीरउड़द की खीर :


सामग्री :

  • उड़द की दाल – 50 ग्राम

  • देशी घी – 50 ग्राम

  • दूध – 300 मिली.

  • चीनी – 50 ग्राम


बनाने की विधि :

उड़द की दाल को घी में भूनने के बाद इसमें दूध डालकर पकाएं। खीर तैयार हो जाने पर चीनी मिला लें |

सेवन विधि :

प्रतिदिन प्रातः नाश्ते के रूप में सेवन करें |

लाभ :

वीर्य की वृद्धि एवं संभोग शक्ति तेज होती है।




मिश्रीसफेद मूसली की खीर :


सामग्री :

  • सफेद मूसली का चूर्ण - 10 ग्राम

  • गाय का दूध - 250 मिली.

  • पिसी हुई मिश्री - 20 ग्राम


बनाने की विधि :

मूसली के चूर्ण को दूध में मिलाकर उबाल लें। उबलने पर जब यह गाढ़ा हो जाए तो इसमें पिसी हुई मिश्री मिलाकर नीचे उतार लें।

सेवन विधि :

प्रतिदिन प्रातः खाली पेट  सेवन करें |

लाभ :

इसके नियमित सेवन से शीघ्रपतन, धातु की कमजोरी एवं नपुंसकता दूर होती है तथा वीर्य की वृद्धि होती है |




नारियल के लड्डूनारियल के लड्डू :


सामग्री :

  • कच्चे नारियल की कद्दूकस की हुई गिरी - 250 ग्राम

  • मावा - 125 ग्राम

  • पिसी हुयी छोटी इलायची - 10

  • देशी घी - 50 ग्राम

  • चीनी - 250 ग्राम


बनाने की विधि :

25 ग्राम घी को कड़ाही में डालकर नारियल की गिरी एवं बचे हुए घी को मावे के साथ मिलाकर अलग-अलग भून लें। दोनों भुनी हुई चीजों को आपस में मिला लें। इस मिश्रण में चीनी की चाशनी बनाकर मिला लें एवं इलायची का बारीक पिसा हुआ चूर्ण भी डाल लें। इस मिश्रण के 20-20 ग्राम के लड्ड़ू बना लें |

सेवन विधि :

1-1 लड्ड़ू प्रतिदिन प्रातः-सायं दूध के साथ सेवन करें |

लाभ :

धातु की कमी एवं कमजोरी दूर होती है |

 

Wednesday, July 29

जानिये ! चना के औषधीय गुण

चने अंकुरित करने की विधि :



सर्वप्रथम चने को साफ करके प्रातःकाल इतने पानी में भिगोएं जितना पानी चना सोख ले। एवं रात में साफ, मोटे, गीले कपडे़ या उसकी थैली में बांधकर लटका दें। गर्मी में 12 घंटे और सर्दी के मौसम में 18 से 24 घंटों के बाद भिगोकर गीले कपड़ों में बांधने से दूसरे, तीसरे दिन उसमें अंकुर निकल आते हैं। गर्मी में थैली में आवश्यकतानुसार पानी छिड़कते रहना चाहिए। इस प्रकार चने अंकुरित हो जाएंगे।
अंकुरित चनों का नाश्ता एक उत्तम टॉनिक है। अंकुरित चनों में कुछ व्यक्ति स्वाद के लिए कालीमिर्च, सेंधानमक, अदरक एवं नींबू का रस भी मिलाते हैं परन्तु यदि अंकुरित चने को बिना किसी मिलावट के साथ खाएं तो अधिक लाभकारी है।

रोगों में चने के कुछ प्रयोग :



कब्ज: 1 या 2 मुट्ठी चनों को धोकर रात को भिगो दें। सुबह जीरा और सोंठ को पीसकर चनों पर डालकर खाएं। घंटे भर बाद चने भिगोये हुए पानी को भी पीने से कब्ज दूर होती है।

धातु पुष्टि: 1 मुट्ठी सेंके हुए चने या भीगे हुए चने और 5 बादाम खाकर दूध पीने से वीर्य का पतलापन दूर होकर वीर्य गाढ़ा हो जाता है।

नपुंसकता: भीगे हुए चने सुबह-शाम चबाकर खाने से ऊपर से बादाम की गिरी खाने से मैथुन-शक्ति बढ़ती है और नंपुसकता खत्म होती है।

त्वचा का कालापन: लगभग 12 चम्मच बेसन, 3 चम्मच दही या दूध, थोड़ा सा पानी सभी को मिलाकर पेस्ट सा बनाकर पहले चेहरे पर मले और फिर सारे शरीर पर मलने के लगभग 10 मिनट बाद स्नान करें तथा स्नान में साबुन का उपयोग न करें। इस प्रकार का उबटन करते रहने से त्वचा का कालापन दूर हो जाएगा।

चेहरे का सौंदर्यवर्धक: चना के बेसन में नमक मिलाकर अच्छी तरह गौन्दकर लेप बना लें। इस लेप को चेहरे पर मलने से त्वचा में झुर्रियां नहीं आती हैं और चेहरा सुन्दर रहता है।

अण्डकोष वृद्धि : चने के बेसन को पानी और शहद में मिलाकर अण्डकोष की सूजन पर लगाने से लाभ होता है।

श्वेतप्रदर : प्रातः सेंके हुए चने पीसकर उसमें खाण्ड मिलाकर खाएं। ऊपर से एक गिलास दूध में एक चम्मच देशी घी मिलाकर पियें। इससे श्वेतप्रदर लाभ होता है।

चेहरे की झांई के लिए: रात्रि में 2 बड़े चम्मच चने की दाल को आधा कप दूध में भिगोकर रख दें। सुबह दाल को पीसकर उसी दूध में मिला लें। फिर इसमें एक चुटकी हल्दी और 6 बूंदे नींबू की मिलाकर चेहरे पर लगाकर रखें। सूखने पर चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें। इस पैक को सप्ताह में तीन बार लगाने से चेहरे की झाईयां दूर हो जाती हैं।

खाज-खुजली: चने के आटे की रोटी को लगातार 64 दिन तक खाने से दाद, खुजली आदि रोग मिट जाते हैं।

निम्न रक्तचाप: 20 ग्राम काला चना और 25 दाने किशमिश या मुनक्का रात को ठण्डे पानी में भिगो दें। सुबह रोजाना खाली पेट खाने से निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) में लाभ होगा और साथ ही चेहरे की चमक भी बढ़ जाती है।

पीलिया : चना का सत्तू पीलिया रोग में लाभदायक है। 1 मुट्ठी चने की दाल को 2 गिलास पानी में भिगो दें। फिर दाल को निकालकर बराबर मात्रा में गुड़ मिलाकर 3 दिन तक खाना चाहिए। प्यास लगने पर दाल का वहीं पानी पीना चाहिए। इससे पीलिया रोग नष्ट हो जाता है।

सफेद दाग: मुट्ठी भर काले चने और 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण (हरड़, बहेड़ा, आंवला) को 125 मिलीलीटर पानी में भिगो दें। कम से कम 12 घंटों के बाद इन चनों को मोटे कपड़े में बांधकर रख दें और बचा हुआ पानी कपडे़ की पोटली के ऊपर डाल दें। फिर 24 घंटे के बाद पोटली को खोल दें अब तक इन चनों में से अंकुर निकल आयेंगे। यदि किसी मौसम में अंकुर न भी निकले तो चनों को ऐसे ही खा लें। इस तरह से अंकुरित चनों को चबा-चबाकर लगातार 6 हफ्तों खाने से सफेद दाग दूर हो जाते हैं।

शरीर का वजन बढ़ाने के लिए : लगभग 50 ग्राम की मात्रा में चने की दाल को लेकर शाम को 100 मिलीलीटर कच्चे दूध में भिगोकर रख दें। अब इस दाल को सुबह उठकर किशमिश और मिश्री में मिलाकर अच्छी तरह से चबाकर खायें। इसका सेवन लगातार 40 दिनों तक करना चाहिए। इससे शरीर को ताकत मिलती है और मनुष्य का वीर्य बल भी बढ़ता है। रात को सोते समय थोड़े से देशी चने लेकर उनको पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उठकर गुड़ के साथ इन चनों को रोजाना खूब चबाकर खाने से शरीर की लम्बाई बढ़ती है। चनों की मात्रा शरीर की पाचन शक्ति के अनुसार बढ़ानी चाहिए। इन चनों को 2-3 तीन महीने तक खाना चाहिए।