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Friday, February 12

मृत संजीवनी महामंत्र जो टाल दे -अकाल मृत्यु

By-ज्योतिषाचार्य डॉ.नवीन शर्मा दूरभाष :09650834736



तन्त्र ज्योतिष सम्राटशुक्राचार्य कृत महामृत्युञ्जय महामन्त्र :-

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्व: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् l

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्व: भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ ll

असमय में मृत्यु का नाम है अकाल मृत्यु l आज के समय भागदौड़ से भरपूर और व्यस्त जिन्दगी में सुबह सुबह उठकर हर व्यक्ति अपनी दिनचर्या की शुरुआत समाचार पत्र पढने से शुरू करता है समाचार पत्र में हम देखते हैं या टीवी में भी देखने को मिलता है कि सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मृत्यु,ट्रक अपना संतुलन खो बैठा और दो बाइक सवार लोगों की मौके पर ही मृत्यु हो गयी, कोई नवविवाहित जोड़ा अचानक मौत का शिकार हो गया या फिर श्रधालुओं से भरी बस तीर्थ स्थान पर जाते वक्त खाई में गिर गयी और कई श्रद्धालु मौके पर ही मर गये, यह सब न चाहते हुए भी हमें पढना और सुनना पड़ता है और हमारा दिल एक अनजाने डर से कांप उठता है, ये सब पढ़कर और सुनकर हमारे दिल से आवाज आती है कि अभी तो इनकी उम्र ही क्या थी अभी तो इनके हंसने खेलने के दिन थे,अभी तो इन्होने अपना जीवन सही से जिया भी नहीं था, ये इनकी मृत्यु का सही समय नहीं था काश ऐसा न हुआ होता, ऐसा कहते हुए लोगों को सुना होगा इसी का नाम है अकाल मृत्यु iI

समय से पहले हुई इस अकाल मृत्यु को देखकर सबका हृदय कांप उठता है और मन भावुक हो उठता है और उन लोगों से जो इस कष्ट और दुःख से घिर जाते हैं उनके दुःख को देखकर हमारा भी सीना दुःख से भर जाता है हमारी आँखों से आंसू छलक जाते हैं और दूसरे ही क्षण हम भगवान से प्रार्थना करने लगते हैं कि भविष्य में हमें हमारे मित्रों और सगे सम्बन्धियों की भगवान इस तरह के कष्टों से बचाये और हमें सुरक्षित रखे व इस प्रकार की आपदा का शिकार होने से बचाये Iयही एकमात्र कारण है कि जब भी हमारे प्रियजन माता –पिता,पत्नी,सन्तान व मित्र इत्यादि घर से कहीं भी बाहर जाते हैं तो हम यह संतुष्टि करना आवश्यक समझते हैं की वह अपने गन्तव्य स्थान पर सकुशल पहुंच गये हैं अथवा नहीं, हम तब तक चिंता में रहते हैं जब तक हमारा प्रिय जन अपने गन्तव्य स्थान पर पहुंच नही जाता, हम जिस भय की चर्चा कर रहे हैं वह है अकाल मृत्यु का भय, यह भय हर उस व्यक्ति के मन में होता है जो घर से बाहर निकल कर कार,बस,ट्रेन,मोटर साईकिल,हवाई जहाज इत्यादि में सफर कर रहा हो,यही नही सड़क पर पैदल चलने वाला व्यक्ति या घर की चारदीवारी में बैठा व्यक्ति कोई भी इससे अछूता नहीं है, इसका शिकार कोई भी कभी भी बन सकता है, अब प्रश्न उठता है कि कोई भी व्यक्ति जिसकी मृत्यु हुई है वह स्वाभाविक मृत्यु है या अकाल मृत्यु

जो व्यक्ति जन्म लेकर इस संसार में आता है वह एक दिन मृत्यु को अवश्य प्राप्त होकर इस संसार को अलविदा कहेगा यह तो चक्र है जो कभी भी किसी के लिए भी नही रुकता और न ही बदलता है परन्तु एक चीज और भी है वो है अकाल मृत्यु, यह वह मृत्यु है जो असमय या अकारण ही आ जाये जिसकी किसी ने कल्पना तक न की हो, हम सब यह मानकर संतोष कर लेते हैं की शायद इश्वर की यही इच्छा हो परन्तु कुछ लोग ऐसा भी सोचते हैं कि क्या अकाल मृत्यु को टाला जा सकता है ? जी हाँ,महाकाल की बराबर उपासना करने से इस तरह की अकाल मृत्यु से छूटा जा सकता है