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Monday, November 20

किस रोग में कौन सा आसन करे


By- Dr.Kailash Dwivedi

👉🏻 पेट की बिमारियों में- उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन, वज्रासन, योगमुद्रासन, भुजंगासन, मत्स्यासन।
👉🏻 सिर की बिमारियों में- सर्वांगासन, शीर्षासन, चन्द्रासन।
👉🏻 मधुमेह- पश्चिमोत्तानासन, नौकासन, वज्रासन, भुजंगासन, हलासन, शीर्षासन।
👉🏻 वीर्यदोष– सर्वांगासन, वज्रासन, योगमुद्रा।
👉🏻 गला- सुप्तवज्रासन, भुजंगासन, चन्द्रासन।
👉🏻 आंखें- सर्वांगासन, शीर्षासन, भुजंगासन।
👉🏻 गठिया– पवनमुक्तासन, पद्ïमासन, सुप्तवज्रासन, मत्स्यासन, उष्ट्रासन।
👉🏻 नाभि- धनुरासन, नाभि-आसन, भुजंगासन।
👉🏻 गर्भाशय– उत्तानपादासन, भुजंगासन, सर्वांगासन, ताड़ासन, चन्द्रानमस्कारासन।
👉🏻 कमर दर्द – हलासन, चक्रासन, धनुरासन, भुजंगासन।
👉🏻 फेफड़े- वज्रासन, मत्स्यासन, सर्वांगासन।
👉🏻 यकृत- लतासन, पवनमुक्तासन, यानासन।
👉🏻 गुदा,बवासीर,भंगदर आदि में- उत्तानपादासन, सर्वांगासन, जानुशिरासन, यानासन।
👉🏻 दमा- सुप्तवज्रासन, मत्स्यासन, भुजंगासन।
👉🏻 अनिद्रा- शीर्षासन, सर्वांगासन, हलासन, योगमुद्रासन।
👉🏻 गैस– पवनमुक्तासन, जानुशिरासन, योगमुद्रा, वज्रासन।
👉🏻 जुकाम– सर्वांगासन, हलासन, शीर्षासन।
👉🏻 मानसिक शांति के लिए– सिद्धासन, योगासन, शतुरमुर्गासन, खगासन योगमुद्रासन।
👉🏻 रीढ़ की हड्डी के लिए- सर्पासन, पवनमुक्तासन, सर्वांगासन, शतुरमुर्गासन करें।
👉🏻 गठिया के लिए- पवनमुक्तासन, साइकिल संचालन, ताड़ासन किया करें।

👉🏻 गुर्दे की बीमारी में– सर्वांगासन, हलासन, वज्रासन, पवनमुक्तासन करें।
👉🏻 गले के लिए- सर्पासन, सर्वांगासन, हलासन, योगमुद्रा करें।
👉🏻 हृदय रोग के लिए- शवासन, साइकिल संचालन, सिद्धासन किया करें।
👉🏻 दमा के लिए- सुप्तवज्रासन, सर्पासन, सर्वांगासन, पवनतुक्तासन, उष्ट्रासन करें।
👉🏻 रक्तचाप के लिए– योगमुद्रासन, सिद्धासन, शवासन, शक्तिसंचालन क्रिया करें।
👉🏻 सिर दर्द के लिए- सर्वांगासन, सर्पासन, वज्रासन, धनुरासन, शतुरमुर्गासन करें।
👉🏻 पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए- यानासन, नाभि आसन, सर्वांगासन, वज्रासन करें।
👉🏻 मधुमेह के लिए- मत्स्यासन, सुप्तवज्रासन, योगमुद्रासन, हलासन, सर्वांगासन, उत्तानपादासन करें।
👉🏻 मोटापा घटाने के लिए– पवनमुक्तासन, सर्वांगासन, सर्पासन, वज्रासन, नाभि आसन करें।
👉🏻 आंखों के लिए- सर्वांगासन, सर्पासन, वज्रासन, धनुरासन, चक्रासन करें।
👉🏻 बालों के लिए– सर्वांगासन, सर्पासन, शतुरमुर्गासन, वज्रासन करें।
👉🏻 प्लीहा के लिए- सर्वांगासन, हलासन, नाभि आसन, यानासन करें।
👉🏻 कमर के लिए– सर्पासन, पवनमुक्तासन, सर्वांगासन, वज्रासन, योगमुद्रासन करें।
👉🏻 कद बड़ा करने के लिए- ताड़ासन, शक्ति संचालन, धनुरासन, चक्रासन, नाभि आसन करें।
👉🏻 कानों के लिए– सर्वांगासन, सर्पासन, धनुरासन, चक्रासन करें।
👉🏻 नींद के लिए– सर्वांगासन, सर्पासन, सुप्तवज्रासन, योगमुद्रासन, नाभि आसन करें |
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Sunday, January 22

इन 6 आसनों से बनाएं अपनी बॉडी स्लिम !





By- Dr. Kailash Dwivedi

उर्ध्व हस्तोत्तानासन :

खड़े होकर पैरों को थोड़ा खोलें। हाथों की उंगलियों को फंसाकर सिर के ऊपर उठा लें। श्वास निकालें और कमर को लेफ्ट साइड में झुका लें। दाहिनी ओर से भी इसी प्रकार करें। दोनों साइड से 10-10 बार करें |

उत्तानपादासन :

कमर के बल लेटकर हाथों को जंघाओं के नीचे जमीन पर रखें। श्वास भरते हुए दोनों पैरों को 90 डिग्री तक ऊपर उठाएं एवं श्वास छोड़ते हुए वापस नीचे लायें। इस प्रकार जमीन पर बिना टिकाए बार-बार पैरों को ऊपर-नीचे करते रहें। कमर दर्द वाले इसे न करें।

हृदय स्तंभासन :

कमर के बल लेटकर हाथों को जंघाओं के ऊपर रखें। सांस भरकर पैरों को उठाएं। सिर और कमर को उठाएं। इस दौरान शरीर का भार हिप्स पर रहेगा।

द्विपाद साइकलिंग :

कमर के बल लेटे-लेटे ही दोनों पैरों को मिलाकर एक साथ साइकलिंग की तरह घुमाएं। थकान होने तक लगातार घुमाते रहें। हाथों को कमर के नीचे रखें।

कपालभाति :

सांस को तेजी से नाक से बाहर फेंकें, जिससे पेट अंदर जाएगा। 5-10 मिनट करें। हाई बीपी वाले धीरे-धीरे करें और कमर दर्द वाले कुर्सी पर बैठकर करें।

अग्निसार :

खड़े होकर पैरों को थोड़ा खोलकर हाथों को जंघाओं पर रखें। सांस को बाहर रोक दें। फिर पेट की पंपिंग करें यानी पेट अंदर खींचें, फिर छोड़ें। स्लिप डिस्क, हाई बीपी या पेट का ऑपरेशन करा चुके लोग इसे न करें।

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Wednesday, January 4

महिलायें प्रसव के बाद पेट पर पड़ने वाली झुर्रियां दूर करना चाहती हैं तो करें यह आसन



विधि :

  • जमीन पर चटाई बिछाकर पेट के बल लेट जाएं एवं दोनों हाथों को बगल से सटाकर पूरे शरीर के स्नायुओं को बिल्कुल ढीला छोड़ दें।
  • दोनों एड़ी व पंजों को आपस में मिलाते हुए व घुटनों के बीच फासला रखते हुए पैरों को धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठाते हुए सिर की तरफ मोड़ें तथा दोनों पैरों को एड़ी के पास से दोनों हाथों से पकड़ लें।
  • श्वास भरते हुए हाथों पर जोर देकर पैरों को सिर की तरफ खींचते हुए अपने सिर, छाती तथा जांघों को जितना सम्भव हो उतना ऊपर की ओर उठाने का प्रयास करें। दोनों हाथों को बिल्कुल सीधा रखें।
  • जब तक आराम से श्वास रोक सकते हैं इसी स्थिति में रहें, तत्पश्चात धीरे-धीरे श्वास  छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में आ जाएं।
  • कम से कम 3 बार इसे दोहराएँ |

विशेष :

इस आसन के अभ्यास से अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए इसको करते समय पैरों को पकड़ कर पेट के सहारे उसी स्थिति में अपने शरीर को दाएं-बाएं व ऊपर-नीचे कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त अभ्यास के समय शरीर को चक्रासन की स्थिति में लाकर एक पैर को ऊपर उठाते हुए भी कर सकते हैं।

सावधानियाँ :

  1. धनुरासन का अभ्यास योग आसन के जानकार की देखरेख में अच्छी तरह से सीख कर ही करना चाहिए।
  2. इस आसन को खाली पेट करें।
  3. उच्च रक्तचाप (हाई ब्लडप्रेशर), अल्सर तथा हार्निया वाले रोगियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
  4. स्लिप डिस्क (कमर दर्द) व रीढ़ की हड्डी में दर्द हो तो इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

लाभ :

  • यह आसन  स्त्रीरोगों में विशेष लाभकारी है। इसके अभ्यास से  प्रसव के बाद पेट पर पड़ने वाली झुर्रियां दूर हो जाती  है।
  • धनुरासन के अभ्यास से मासिकधर्म, गर्भाशय तथा डिम्बग्रंथियों के रोग समाप्त होते हैं।
  • धनुरासन मेरूदंड (रीढ़ की हड्डी) को लचीला बनाता है, जिससे व्यक्ति का यौवनकाल अधिक समय तक रहता है।
  • यह आसन शरीर के जोड़ों को मजबूत करता है।
  • इसके अभ्यास से हटी हुई नाभि अपने आप ही सामान्य स्थिति में आ जाती है।
  • इस आसन से शलभासन और भुजंगासन का लाभ भी मिलता है।
  • यह आसन कमर व गर्दन के दर्द के लिए भी लाभकारी है परन्तु रोग की तीव्र अवस्था में नही करें |
  • धनुरासन गर्दन, छाती व फेफड़ों को शक्तिशाली व क्रियाशील बनाता है।
  • यह कंधे को पुष्ट व छाती को चौड़ा व मजबूत बनाता है।
  • यह आसन पेट की अधिक चर्बी को कम करता है।
  • धनुरासन के अभ्यास से पेट से संबन्धित रोग – मंदाग्नि, अजीर्ण, लिवर की कमजोरी दूर होती हैं।
  • यह पाचनशक्ति एवं भूख को बढ़ाता है।
  • इस आसन को करने से कब्ज दूर होता है।
  • मधुमेह के रोगियों को धनुरासन से विशेष लाभ मिलता है।
  • धनुरासन के अभ्यास से गठिया रोग में लाभ मिलता है।
  • धनुरासन रक्तप्रवाह को तेज करता है और खून को शुद्ध करता है |
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Sunday, June 14

ताड़ासन एवं तिर्यक ताड़ासन

ताड़ासन की विधि :

  1. ताड़ एक पेड़ का नाम है. ताड़ की तरह पूरे शरीर को ऊपर की ओर खींचना ही ताड़ासन कहलाता है.
  2. इसके लिए सीधे खड़े हो जाएं और प्रयास करें कि आपके पैर मिले रहें. साथ ही हथेलियों को अपने बगल में रखें.
  3. पूरे शरीर को स्थिर रखें और ये ध्यान रहे कि पूरे शरीर का वज़न दोनों पैरों पर बराबर रूप से आए. दोनो हथेलियों की अंगुलियों को मिलाकर सिर के ऊपर रखें. हथेलियों का रुख़ ऊपर की ओर होना चाहिए.
  4. सांस भरते हुए अपने हाथों को ऊपर की ओर खींचिए एवं सिर को ऊपर उठाकर हथेलियों की ओर देखिये , इससे आपके कंधों और छाती में भी खिंचाव आएगा. साथ ही साथ पैरों की एड़ी को भी ऊपर उठाएं तथा पैरों की अंगुलियों पर शरीर का संतुलन बनाए रखिए.
  5. इस स्थिति को कुछ पल बनाए रखें. कुछ पल रुकने के बाद सांस छोड़ते हुए हाथों को वापस सिर के ऊपर ले आएं. सुविधानुसार ऐसा 5-10 बार कर सकते हैं.

विशेष :
सांस भरते हुए दोनों हाथों, पैरों तथा पूरे शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव लाना चाहिए तथा सांस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में आ जाएं. एकाग्रता शरीर के संतुलन पर रहनी चाहिए.

लाभ :

  • पैरों की अंगुलियों के साथ-साथ टखने भी मज़बूत बनते हैं.
  • आमतौर पर हम अपनी छाती और पीठ की मांसपेशियों में कम-कम खिंचाव ला पाते हैं. लेकिन ताड़ासन करने से छाती, कंधे और पीठ की मांसपेशियों में भी खिंचाव आता है.
  • ये आसन रीढ़ की हड्डी में भी खिंचाव लाता है. फलस्वरूप शरीर का क़द बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है तथा स्लिप डिस्क की संभावना नहीं रहती.
  • कंधों के जोड़ मज़बूत बनते हैं और गहरी सांस लेने-छोड़ने की प्रक्रिया में सुधार होता है.


तिर्यक ताड़ासन की विधि :

  1. सीधे खड़े हों और दोनों पैरों में दो फ़ीट का अंतर रखें. दोनों हाथों की अंगुलियों को मिलाइए तथा उसे पलट कर सिर के ऊपर रखेंगे.
  2. सांस भरते हुए दोनों हाथों को सिर के ऊपर खीचेंगें तथा सांस छोड़ते हुए कमर से दायीं ओर शरीर को जितना संभव हो सके झुकाएंगे.
  3. कुछ पल रुकने का प्रयास करेंगे. इस दौरान आपकी सांस कुछ पल के लिए रुक जाएगी. आप शक्ति के अनुसार ही रुकें और न रुक पाने की स्थिति में सांस भरते हुए वापस आ जाएं.
  4. इसी तरह दूसरी ओर भी करें. इस प्रकार एक क्रम पूरा होगा. आप चाहें तो इसे तीन से पांच बार कर सकते हैं.

विशेष :
ध्यान रहे कि सिर्फ़ बगल में ही झुकना है. शरीर को आगे या पीछे न झुकाएं और न ही अपने शरीर में किसी तरह का घुमाव (Twist) आने दें.
सांस छोड़ते हुए शरीर की गति पर एकाग्रता बनाए रखें. संतुलन बनाएं तथा शरीर के बगल में खिंचाव को अंतर्मन से देखिए, उसे महसूस कीजिए.
लाभ :

  • तिर्यक ताड़ासन से शरीर के बगल की ख़ासतौर पर छाती के बगल की मांसपेशियों में खिंचाव आता है तथा उनकी मज़बूती बढ़ती है .
  • तड़ासन के सभी लाभ मिलते हैं.