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Friday, March 6

पेट को रोगमुक्त रखेंगे घर में बने ये 4 चूर्ण


पेट की समस्या से हर घर में अधिकतर व्यक्ति परेशान होते हैं। पेट की मुख्‍य समस्‍याओं में कमजोर पाचन तंत्र, कब्‍ज, गैस बनना हो सकता है। इनके लिए डॉक्‍टरी इलाज करने के साथ ही आप इन घरेलू नुस्‍खों को भी अपना सकते हैं। आज हम आपको पेट की आम समस्‍याओं के लिए इलाज के लिए घरेलू चीजों से बनने वाले 4 चूर्ण के बारे में बता रहे हैं। इनके प्रयोग से कई रोगों से मुक्त हो सकते है।
गैस हर चूर्ण :
सामग्री
·       10 ग्राम सेंधा नमक
·       10 ग्राम हींग
·       10 ग्राम सज्जीखार ( शुद्ध )
·       10 ग्राम हरड़ छोटी
·       10 ग्राम अजवायन
·       10 ग्राम काली मिर्च
चूर्ण बनाने की विधि
इस चूर्ण को बनाने के लिए उपर्युक्त  सामग्री को इक्कठा करें और अच्छी तरह से बारीक पीस लें। जब पाउडर बन जाए तो उसे किसी बारीक कपड़े या छन्‍नी से छान कर किसी कांच की शीशी में भरकर रख लें।
गैस और अपच के लिए :
सामग्री
·       जीरा 120 ग्राम 
·       सेंधानमक 100 ग्राम 
·       धनिया 80 ग्राम
·       कालीमिर्च 40 ग्राम 
·       सोंठ 40 ग्राम
·       छोटी इलायची 20 ग्राम
·       पीपर छोटी 20 ग्राम 
·       नींबू सत्व 15 ग्राम 
·       खाण्ड देशी 160 ग्राम
चूर्ण बनाने की विधि
नींबू और खाण्‍ड को छोड़ कर बाकी की सभी सामग्रियों को पीस कर चूर्ण तैयार करें।  फिर उसमें नींबू निचोड़े और खाण्‍ड मिलाएं। इस मिश्रण को 3 घंटे के लिये एक कांच के बरतन में रख दें।  फिर इसका सेवन खाना खाने के बाद 2 से 5 ग्राम करें।
कब्‍ज निवारक चूर्ण
सामाग्री
·       जीरा
·       अजवाइन
·       काला नमक
·       मेथी
·       सौंफ
·       हींग
चूर्ण बनाने की विधि
सबसे पहले जीरा, अजवाइन, मेथी और सौंफ को अलग-अलग धीमी आंच पर भून लें। भूनने के बाद इन्‍हें अलग-अलग बारीक पीस लें। इसके बाद एक बर्तन में काला नमक और आधा चम्‍मच हींग लें। अब इसमें जीरा, सौंफ, अजवाइन का पाउडर डाल लें। इन तीनों से कम मात्रा में मेथी पाउडर डालें। इस मिश्रण को अच्‍छी तरह मिला लें। ध्‍यान ये रखना है कि जीरा, अजवाइन और सौंफा की मात्रा समान होनी चाहिए। इसको अच्‍छी तरह से मिक्‍स करने के बाद किसी डिब्‍बे में रख लें।

पेट के लिए रामबाण है यह चूर्ण
खाना खाने के बाद कई लोगों को बदहजमी हो जाती है। कभी-कभी तो पेट दर्द बर्दाशत से बाहर हो जाता है।इस चूर्ण से पाचन क्रिया ठीक रहती है।
सामग्री
·       अनारदाना 10 ग्राम
·       छोटी इलायची 10 ग्राम
·       दालचीनी 10 ग्राम
·       सौंठ 20 ग्राम
·       पीपल 20 ग्राम
·       कालीमिर्च 20 ग्राम
·       तेजपत्ता 20 ग्राम
·       पीपलामूल 20 ग्राम
·       नींबू का सत्व 20 ग्राम
·       धनिया 40 ग्राम
·       सेंधा नमक 50 ग्राम
·       काला नमक 50 ग्राम
·       सफेद नमक 50 ग्राम
·       मिश्री की डली 350 ग्राम
चूर्ण बनाने की विधि
सेंधा नमक, काला नमक, सफेद नमक, मिश्री और नींबू का सत्व को छोड़कर सभी सामान को कड़ी धूप में 2-3 घण्टे सुखा लें। फिर इसे मिक्सी में डालकर बारीक पीस लें।
इसके बाद बाकी सामान को अलग से बारीक पीस लें और फिर सभी सामानों के इस पाउडर को अच्छे से मिला लें। अब इसे किसी कांच की शीशी भरकर रख लें।

Saturday, November 25

शरीर में कैसी भी गाँठ हो, ख़त्म कर देता है यह नुस्खा !





By- Dr. Kailash Dwivedi

शरीर के किसी भी अंग में उत्पन्न हुयी गाँठ साधारण गाँठ से लेकर कैंसर तक हो सकती हैं। ठीक न होने वाली असामान्य गांठ अथवा आंतरिक या बाह्य रक्तस्राव कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि सभी गांठे कैंसर ही हों। परन्तु फिर भी इस सम्बन्ध में सावधानी रखते हुए समय से इसकी जाँच एवं उपचार बहुत आवश्यक है | साधारण गांठे भले ही कैंसर की न हों लेकिन इनका भी इलाज आवश्यक होता है। उपचार के अभाव में ये असाध्य रूप ले लेती हैं, परिणाम स्वरूप उनका उपचार लंबा और जटिल हो जाता हैएवं इनका कैंसर में परिवर्तित होने की सम्भावना भी बढ़ जाती है | इस लेख में जानिये एक ऐसे नुस्खे के विषय में जिससे कैसी भी गांठ हो, ठीक हो सकती है | यह औषधि स्वाद में कड़वी होती है परंतु अत्यधिक प्रभावी है। जब तक गाँठ पूरी तरह से समाप्त न हो जाये इस औषधि को बंद नहीं करना चाहिए |

निम्न गांठो में प्रभावी है यह नुस्खा :



  • गर्भाशय की गांठ
  • स्त्री पुरुष के स्तनो की गांठ
  • टॉन्सिल 
  • गले की गाँठ  (बढ़ी हुयी थायराइड ग्लैण्ड -Goiter) 
  • फैट की गांठ (LIPOMA)
  • प्रोस्टेट की गांठ 
  • जांघ के पास की गांठ
  • काँख की गांठ
  • गले के बाहर की गांठ

आवश्यक सामग्री :

पंसारी के यहाँ से निम्न औषधि ले लें -

  • कचनार की शाखा की ताजी छाल 25-30 ग्राम (यदि सूखी छाल हो तो - 15 ग्राम )
  • गोरखमुंडी पाउडर  - 1 चम्मच 

तैयार करने की विधि :

कचनार की छाल को कूटकर  1 गिलास पानी मे उबाले। 2 मिनट तक उबालने के पश्चात् इसमे पिसी हुयी गोरखमुंडी 1 चम्मच की मात्रा में मिला दें | इस मिश्रण को 1 मिनट तक उबालकर छान लें ।

सेवन विधि :

प्रतिदिन प्रातः खाली पेट इस काढ़े को बनाकर गुनगुना रह जाये तब पियें । गाँठ पुरानी होने की स्थिति में इस काढ़े को प्रातः-सायं दोनों समय ले।







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Friday, March 10

दमा के लिए कुछ कारगर घरेलू उपाय



दमा एक आम बीमारी है जिसमें सांस लेने में और छोड़ने में तकलीफ होती है।  दमा कई कारणों से हो सकता है जैसे ख़राब मौसम, धूल, धुंआ जैसे अलर्जन्स , अलेर्जिक खाद्य पदार्थ, इत्र इत्यादि।

दमा के लिए कुछ कारगर घरेलू नुस्खे



  • दमा रोगी पानी में अजवाइन मिलाकर इसे उबालें और पानी से उठती भाप लें, यह घरेलू उपाय काफी फायदेमंद होता है। 4-5 लौंग लें और 125 मिली पानी में 5 मिनट तक उबालें। इस मिश्रण को छानकर इसमें एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाएँ और गरम-गरम पी लें। हर रोज दो से तीन बार यह काढ़ा बनाकर पीने से मरीज को निश्चित रूप से लाभ होता है।
  • अदरक का एक चम्मच ताजा रस, एक कप मैथी के काढ़े और स्वादानुसार शहद इस मिश्रण में मिलाएं। दमे के मरीजों के लिए यह मिश्रण लाजवाब साबित होता है। मैथी का काढ़ा तैयार करने के लिए एक चम्मच मैथीदाना और एक कप पानी उबालें। हर रोज सबेरे-शाम इस मिश्रण का सेवन करने से निश्चित लाभ मिलता है ।
  • अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है। सबेरे और शाम इस चाय का सेवन करने से मरीज को फायदा होता है।
  • रोगियों को दिन में तीन बार लेने से आराम मिलता है।
  • अदरक का रस और शहद समान मात्रा में लेकर चाटने से श्वास कष्ट दूर होता है और हिचकियाँ बंद हो जाती हैं।
  • 10 ग्राम तुलसी के रस को 5 ग्राम शहद के साथ सेवन करने से हिचकी एवं अस्थमा के रोगी को ठीक किया जा सकता है।
  • करेले की  जड़ का चूर्ण -1 चम्मच  + 1 चम्मच  शहद दोनों को मिलाकर । शहद के स्थान पर  तुलसी के पत्तों का रस भी मिला सकते हैं। इसे एक माह तक प्रतिदिन रात्रि सोते समय लें |यह दमे के लिए बहुत हीं प्रभावकारी औषधि का काम करता है। 
  • लहसुन के लगभग 10 कलियों को लगभग 30 मिली लिटर दूध में उबाल लें। इस मिश्रण को प्रतिदिन एक बार लें |
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Saturday, March 4

रतनजोत के इस प्रयोग से बाल हो जायेंगे काले !




By- Dr. Kailash Dwivedi
जेट्रोफा की जड़ से एक महीन लाल रंगने वाला पदार्थ मिलता है जिसका प्रयोग खाने,पीने की चीज़ों को लाल रंगने के लिए होता है, भारत के रोग़न जोश व्यंजन की तरी का लाल रंग अक्सर इसी से बनाया जाता है। इसके अलावा दवाईयों, तेलों, शराब, इत्याद में भी इसके लाल रंग का इस्तेमाल होता है। इसे रतनजोत भी कहते हैं परन्तु वास्तव में 'रतनजोत' नाम इस पौधे की जड़ से निकलने वाले रंग का है | जेट्रोफा से बायो डीजल बनता है | चिकित्सकीय दृष्टि से यह कई रोगों की रामबाण औषधि है। इस लेख में पढ़िए सफ़ेद बालों को प्राकृतिक रूप से काला करने का एक बेहद असरकारी प्रयोग |

आवश्यक सामग्री :

रतनजोत की ताज़ी जड़  : 100 ग्राम
मेंहदी के पत्ते :                 100 ग्राम
जलभांगर के पत्ते :           100 ग्राम
आम की गुठलियां :          100 ग्राम
सरसों का तेल :                1 किलोग्राम

बनाने की विधि :

उपर्युक्त सभी सामग्री (सरसों के तेल को छोडकर) आपस में मिलाकर कूट लें | जब यह अच्छे से कुट जाये तो इसे निचोड़ लें | तत्पश्चात इस रस को 1 किलो सरसों के तेल में इतना उबाल ले कि इसका पानी खत्म हो जाये और केवल तेल बचे | ठंडा होने पर इसे छानकर कांच की शीशी में भरकर रख लें | इस तेल को प्रतिदिन सिर पर लगाने से बाल काले हो जाते है | 
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Saturday, February 25

कमर दर्द : कारण और घरेलू उपचार



By- Dr. Kailash Dwivedi

कारण :

  1. हमेशा ऊंची एड़ी के जूते या सेंडिल पहनना।
  2. मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव।
  3. गलत तरीके से अधिक वजन।
  4. गलत तरीके से बैठना।

उपचार :

  1. रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियां काली न हो जायें) गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें।
  2. नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। इसके बाद पेट के बल लेट जाएं। दर्द के स्थान पर तौलिये से भाप लें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है।
  3. कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। इस नमक को थोड़े मोटे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। कमर पर इस पोटली से सेक करने से भी दर्द से आराम मिलता है।
  4. अजवाइन को तवे के पर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें। ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। इसके नियमित सेवन से कमर दर्द में लाभ मिलता है।
  5. अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम न करें। हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें।
  6. नर्म गद्देदार सीटों से परहेज करना चाहिए। कमर दर्द के रोगियों को थोड़ा सख्ते बिस्तर बिछाकर सोना चाहिए।
  7. योग भी कमर दर्द में लाभ पहुंचाता है। भुजंगासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपादासन, शवासन आदि कुछ ऐसे योगासन हैं जो की कमर दर्द में काफी लाभ पहुंचाते हैं। कमर दर्द के योगासनों को योगगुरु की देख रेख में ही करने चाहिए।
  8. कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, इसलिए कैल्शियमयुक्त चीजों का सेवन करें।
  9. कमर दर्द के लिए व्यायाम भी करना चाहिए। सैर करना, तैरना या साइकिल चलाना सुरक्षित व्यायाम हैं। तैराकी जहां वजन तो कम करती है, वहीं यह कमर के लिए भी लाभकारी है। साइकिल चलाते समय कमर सीधी रखनी चाहिए। व्यायाम करने से मांसपेशियों को ताकत मिलेगी तथा वजन भी नहीं बढ़ेगा।
  10. कमर दर्द में भारी वजन उठाते समय या जमीन से किसी भी चीज को उठाते समय कमर के बल ना झुकें बल्कि पहले घुटने मोड़कर नीचे झुकें और जब हाथ नीचे वस्तु तक पहुंच जाए तो उसे उठाकर घुटने को सीधा करते हुए खड़े हो जाएं।
  11. कार चलाते वक्त सीट सख्त होनी चाहिए, बैठने का पोश्चर भी सही रखें और कार ड्राइव करते समय सीट बेल्ट टाइट कर लें।
  12. ऑफिस में काम करते समय कभी भी पीठ के सहारे न बैठें। अपनी पीठ को कुर्सी पर इस तरह टिकाएं कि यह हमेशा सीधी रहे। गर्दन को सीधा रखने के लिए कुर्सी में पीछे की ओर मोटा तौलिया मोड़ कर लगाया जा सकता है।
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Wednesday, February 22

खुजली का घरेलू उपचार



  • नींबू का रस एवं अलसी के तेल को बराबर मात्रा में  मिलाकर खुजली वाली जगह पर मलने से हर तरह की खुजली से छुटकारा मिलता है।

  • नारियल के ताज़े रस और टमाटर का मिश्रण खुजली वाली जगह पर लगाने से भी खुजली दूर हो जाती है।
  • यदि  खुजली पूरे शरीर में फैल रही है तो 3 या 4 दिनों तक पीसी हुई अरहर की दाल दही में मिश्रित करके पूरे शरीर पर लगायें। 

  • शुष्क त्वचा के कारण होनेवाली खुजली पर  दूध की क्रीम लगाने से यह कम हो जाती है।

  • खुजली वाली त्वचा पर नारियल तेल अथवा अरंडी का तेल लगाने से बहुत लाभ होता  है |

  • बबूल के पेड़ की छाल से एक्ज़िमा के कारण हो रही खुजली नियंत्रण में आती है।
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Sunday, February 19

शीतपित्त ; कारण,लक्षण और उपचार



शीतपित्त के कारण :

  • गर्मी से आने के बाद ठंड़ा पानी, कोल्ड ड्रिंक या आइसक्रीम खाना |
  • तेल-मिर्च, गर्म मसाले और अम्ल रसों से बने चटपटे खाद्य पदार्थों और बाजार में बिकने वाले फास्ट फूट व चाइनीज खाना खाने से भी यह रोग होता है।


लक्षण :
शरीर पर लाल-लाल चकत्ते या ददोड़ पड़ना जिनमें मीठी- मीठी खुजली होना या चींटी की तरह काटने सा एहसास होता है। यह पूरे शरीर में फैल जाती है। चकत्ते की जगह त्वचा लाल और सूजनयुक्त हो जाती है और उनमें उभार दिखाई देता है।

घरेलू उपचार :
काली मिर्च पीसकर घी में मिलाकर चाटने से शीत पित्त में आराम मिलता है।
गेरु, हल्दी, मजीठ, काली मिर्च, अडूसा सब 10-10 ग्राम लेकर कूट- पीसकर मिलाकर सुबह-शाम चाटने से शीत पित्त में आराम होता है।
गुड के साथ हल्दी भुनकर खाने से शीत -पित्त और खुजली में बहुत आराम मिलता है।
अजवाइन और गुड़ खाने से शीतपित्त मिट जाता है।

परहेज :

  1. हरी साग-सब्जी, फल, रेशेदार खाद्य पदार्थ, पुराने चावल, जौ, मूंग, चना आदि का सेवन करें। नहाने में गर्म पानी का उपयोग करें।
  2. यदि  पित्ती उछल रही है तो उस समय नहाना नहीं चाहिए, ठंड़ी हवा से बचना चाहिए। ऐसी स्थिति में यदि कूलर या A/c चल रहा हो तो उसे बन्द कर दें |
  3.  भोजन में नमक की मात्रा कम कर दें ।
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Wednesday, February 15

मोटापा कम करने के कुछ घरेलू उपाय



वजन कम करना और चर्बी को गला देना दोनों ही अलग अलग बातें हैं। आज कल हम तरह तरह के जंक फूड खाते रहते हैं, जिनमें खाद्य पदार्थ और पोषण के नाम पर कुछ भी नहीं होता, लेकिन हां, इससे फैट खूब मिल जाता है। यही फैट आपके शरीर में जम जाता है जो कई दिनों तक रहने से विष का रूप ले लेता है।

कुछ घरेलू उपायों से आप इस चर्बी तथा टॉक्‍सिन को अपने शरीर से निकाल सकते हैं। जब आप शरीर से इस फैट को निकालेगें तो आपके शरीर की सफाई भी होगी, जिससे पेट साफ रहेगा और त्‍वचा दमकने लगेगी। यह घरेलू उपचार हैं, जिनका कोई साइड इफेक्‍ट नहीं होगा और मोटापा भी अलग से दूर होगा।

आप इन पेय को अपने घर पर ही बना सकते हैं। यह घरेलू पेय अभी से नहीं बल्कि कई दशको से अलग-अलग देशों में प्रयोग किये जाते आ रहे हैं। तो आइये देखते हैं कौन से हैं वे पेय जो शरीर से फैट को गला देते हैं।

नींबू, शहद और गरम पानी :

रोज सुबह खाली पेट इसे पीने से आपको पेट सही रहेगा, स्‍किन साफ रहेगी और मोटापा भी दूर रहेगा।

ग्रीन टी :

ग्रीन टी में एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो कि झुर्रियों को दूर रखती है। अगर आपको अपना मोटापा घटाना है तो ग्रीन टी को बिना चीनी मिलाए पियें।

लौकी जूस :

यह एक पौष्टिक सब्‍जी है। इसे पीने से पेट भर जाता है, इसमें फाइबर होता है और यह पेट को ठंडक पहुंचाती है। लौकी का जूस पीने से घंटो तक पेट भरा रहता है और मोटापा भी कंट्रोल होता है।

धनिया जूस :

इस जूस को पीने से किडनी सही रहती है और मोटापा भी कंट्रोल रहता है। इसे पीने से पेट देर तक भरा रहता है और यह शरीर की शुद्धि करता है।
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Monday, February 13

अनगिनत रोगों की औषधि है पीपल का वृक्ष - जानिए उपयोग




  • स्कन्द पुराण के अनुसार - अश्वत्थ (पीपल) के मूल में भगवान विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में श्रीहरि और फलों में सभी देवताओं के साथ अच्युत सदैव निवास करते हैं। पीपल भगवान विष्णु का जीवन्त और पूर्णत:मूर्तिमान स्वरूप है।
  • भगवान कृष्ण कहते हैं- समस्त वृक्षों में मैं पीपल का वृक्ष हूँ। स्वयं भगवान ने उससे अपनी उपमा देकर पीपल के देवत्व और दिव्यत्व को व्यक्त किया है।
  • शास्त्रों में वर्णित है कि पीपल की सविधि पूजा-अर्चना करने से सम्पूर्ण देवता स्वयं ही पूजित हो जाते हैं।
  • प्रसिद्ध ग्रन्थ व्रतराज के अनुसार -  अश्वत्थोपासना में पीपल वृक्ष की महिमा का उल्लेख है। अश्वत्थोपनयनव्रत में महर्षि शौनक द्वारा इसके महत्त्व का वर्णन किया गया है।
  • अथर्ववेदके उपवेद आयुर्वेद के अनुसार -  पीपल के औषधीय गुणों का अनेक असाध्य रोगों में उपयोग वर्णित है। पीपल के वृक्ष के नीचे मंत्र, जप और ध्यान तथा सभी प्रकार के संस्कारों को शुभ माना गया है।
  • श्रीमद्भागवत् में वर्णित है कि द्वापर युग में परमधाम जाने से पूर्व योगेश्वर श्रीकृष्ण इस दिव्य पीपल वृक्ष के नीचे बैठकर ध्यान में लीन हुए।
पीपल के बीज राई के दाने के आधे आकार में होते हैं। परन्तु इनसे उत्पन्न वृक्ष विशालतम रूप धारण करके सैकड़ों वर्षो तक खड़ा रहता है। पीपल के वृक्ष के पत्ते मार्च के महीने में झड़ जाते हैं और गर्मी के मौसम में इसमें फल की बहार आती है, जो बारिश के मौसम में पकते हैं। पुराने पीपल के पेड़ से लाक्षा (लाख, चपड़ा) भी प्राप्त होती है।
पीपल के पेड़ के अनेक अलौकिक स्वास्थ्यकर गुणों के कारण इसे हिन्दू धर्म में इसे बहुत ही पवित्र माना गया है |पीपल पाचनशक्तिवर्द्धक, वीर्यवर्द्धक (धातु को बढ़ाने वाला), मधुर-रसायन, वातकफनाशक, हल्की, दस्तावर, श्वास (दमा), खांसी, बुखार, कोढ़, प्रमेह (वीर्य विकार), बवासीर, प्लीहा शूल तथा आमवात आदि रोगों में लाभकारी है। यह पेशाब और मासिक-धर्म के बहने को जारी करती है, गर्भ को गिरने नहीं देती है। हृदय (दिल) की बीमारियों को हटाती है। कृमि (कीड़े) रोगों का नाश करती है। पीपल की छाल का लेप सूजन को मिटाता है, नासूर के लिए लाभकारी है तथा घावों को भरता है।

विभिन्न भाषाओं में नाम :

हिंदी       :  पीपरि, पीपल।
संस्कृत    :  अश्वत्थ, पिप्पल, चलपत्र, गजाशन, बौधिद्रु।
बंगाली     :  पिपुल, अश्वत्थ।
मराठी      :  पिम्पली, पीपल।
कर्नाटकी   :  अरलीमारा।
तैलगू       :  रावीचेट्टु।
तमिल     :  आराकमरं, अष्वत्थम।
कन्नड़     :  अश्वत्थ।
गुजराती   :  लिंडी पीपर, पीपलों।
मलयलम :  अरायल।
फारसी    :  फिल-फिल दराज, दरख्तलरजा।
अंग्रेजी    :  डारफिल, सेक्रेड फिग, पोपलरलिब्ड फिग ट्री।
लैटिन    :  पाइपर लांगम, फाइकरिलिजियोजा।
  • रंग : इसका रंग भूरा और हरा होता है।
  • स्वाद : पीपल खाने में चरपरा होता है। कच्चा पीपल बाखट और पका पीपल फीका और मीठा होता है।
  • स्वरूप : यह एक प्रकार की गुल्म जातीय लता है। इसमें ही फल लगा करते हैं। पीपल के पत्ते पान की तरह छोटे, गोल तथा बड़ी नोक वाले नुकीले होते हैं। पीपल के फल पत्तों की जड़ में छोटे-छोटे गोल-गोल झड़बेरी के समान लगते हैं, पीपल के फल आधा व्यास के पकने पर बैंगनी या काले हो जाते हैं। इसकी डाली में लाख भी पैदा होती है।
  • स्वभाव : पीपल की तासीर गर्म होती है। पीपल का पत्ता और छाल ठंडी और रूखी होती है। बाकी भाग गर्म होता है।

रोगों में सेवन योग्य मात्रा :

  • पीपल की छाल और फलों का चूर्ण :  1 से 3 ग्राम।
  • लाक्षा (गोंद का) चूर्ण :  1 से 2 ग्राम।
  • छाल, पत्तों का काढ़ा :  50 से 100 मिलीलीटर।
  • पत्तों का रस :  10 से 20 मिलीलीटर |

विभिन्न रोंगों का पीपल से उपचार :

 मुंह के छाले :

पीपल की छाल के काढ़े से सुबह-शाम गरारे करने और छाल के चूर्ण को शहद में मिलाकर छालों पर लगाने से छालों में आराम मिलता है।

अफीम का नशा उतारने हेतु :

पीपल की छाल का काढ़ा रोगी को पिलाने से अफीम का जहर उतर जाता है |

हिचकी का रोग:

  • 1 ग्राम की मात्रा में पीपल का चूर्ण शहद या शर्करा के साथ चाटने से हिचकी आना बंद हो जाती है।
    पीपल के पेड़ की छाल पानी में घोलकर कुछ देर छोड़ दें। फिर इसके पानी को निथारकर पीने से हिचकी ठीक हो जाती है।
  • 1 ग्राम पीपल की लाख का चूर्ण शहद में मिलाकर रोगी को चटाने से हिचकी का रोग दूर हो जाता है।

खूनी दस्त :

पीपल की कोमल टहनियां, धनिये के बीज तथा मिश्री को बराबर मात्रा में मिलाकर 3-4 ग्राम रोजाना सुबह-शाम सेवन कराने से खूनी दस्त के रोग में लाभ होता है।

उपदंश (सिफलिस):

पीपल के तने की 50 ग्राम सूखी छाल की राख, उपदंश पर छिड़कने से उपदंश के घाव ठीक हो जाते हैं।

पेट में दर्द:

पीपल के मुलायम 3 पत्तों को बारीक पीसकर गुड़ को मिलाकर छोटी-छोटी गोली बना लें। इन गोलियों को सुबह-शाम 1-1 गोली खुराक के रूप में खाने से पेट के दर्द में लाभ हो जाता है।

रक्त शुद्धि हेतु :

1-2 ग्राम पीपल के बीजों के चूर्ण को शहद के साथ सुबह-शाम चाटने से खून साफ हो जाता है।

प्रदर:

40 ग्राम पीपल के गोंद को कूट-पीसकर इसे 5 ग्राम गाय के कच्चे दूध के साथ प्रातः सेवन करने से प्रदर रोग मिट जाता है।
• पीपल के सूखे गोंद को आटे में मिलाकर गाय के दूध में हलवा बनाकर खाने से प्रदर में लाभ मिलता है।

श्वास (दमा) :

पीपल की लाख का चूर्ण घी और शक्कर के साथ मिलाकर खाने से दमा के रोग में आराम आता है।

कब्ज:

  • पीपल के 5-10 फल को प्रतिदिन खाने से कब्ज समाप्त हो जाती है ।
  • पीपल के पत्ते और कोमल कोपलों का 40 मिलीलीटर काढ़ा पीने से पेट साफ होता है।
घाव :
• पिसी हुई पीपल की छाल का काढ़ा बनाकर उससे घाव को धोने से घाव जल्दी भर जाता है।
• पीपल की छाल का बारीक चूर्ण घाव पर लगाने से रक्तस्राव (खून का बहना) बंद होकर घाव जल्दी भर जाता है।
• पीपल की छाल का बारीक चूर्ण लगाने से सड़े हुए तथा न भरने वाले घाव जल्दी ठीक होकर भर जाते हैं। भगंदर और कंठमाला के रोग में भी इससे लाभ होता है।
• पीपल की सूखी छाल को पीसकर जले हुए स्थान पर बुरकने से आग से जला हुआ घाव ठीक हो जाता है।

पुरानी खांसी में कफ के साथ खून आना :

  • लगभग आधा ग्राम पीपल की लाख, 1 चम्मच शहद, 2 चम्मच घी और थोड़ी सी मिश्री को मिलाकर दिन में 5-6 बार रोगी को देने से खून की खांसी बंद हो जाती है।
  • पीपल की लाख का चूर्ण घी और शक्कर के साथ खाने से सूखी खांसी में आराम आता है।

बुखार:

  • पीपल के पेड़ की टहनी तोड़कर उसे चबाकर रस को चूसे और लकड़ी थूक दें। इससे मलेरिया व हर प्रकार का बुखार उतर जायेगा।
  • हल्का बुखार, सूखी खांसी और कमजोरी के रोग में घी, शहद और चीनी के साथ पीपल की लाख देनी चाहिए।

बच्चों का शारीरिक दर्द एवं अनिद्रा :

एक चुटकी पीपल की लाख को थोड़े से दूध में मिलाकर बच्चों को पिलाने से बच्चों के दर्द और नींद न आना दूर होता है।

दांतों के रोग :

पीपल की ताजी टहनी को दांतों से चबाकर दातुन करने से और इसकी छाल के काढ़े से गरारे करने से मुंह की दुर्गंध मिटती है, दांतों का दर्द, पायरिया एवं मसूढ़ों की सूजन में भी लाभ होता है ।

चर्म रोग:

  • पीपल के पत्तों को पानी में उबालकर उसके काढ़े से नहाने से त्वचा के अनेक रोग दूर हो जाते हैं।
  • पीपल की कोमल कोपलें खाने से खुजली और त्वचा पर फैलने वाले चर्मरोग दूर हो जाते हैं। इसका 40 मिलीलीटर काढ़ा बनाकर पीने से भी यही लाभ होता है।
  • 6 ग्राम पीपल के पेड़ की जड़ के चूर्ण को 5 कालीमिर्च के साथ बारीक पीसकर और छानकर पीने से और इसी लेप बनाकर श्वेत कुष्ठ (कोढ़) में लगाने से श्वेत कुष्ठ दूर होता है।

गर्भ का न ठहरना :

  • 250 ग्राम पीपल के पेड़ की सूखी पिसी हुई जड़ों में 250 ग्राम बूरा मिलाकर रख लें। जिस दिन से पत्नी का मासिक-धर्म आरम्भ हो, उस दिन से इसे पति व पत्नी दोनों 4-4 चम्मच गर्म दूध के साथ 11 दिनों तक फंकी लें। जिस दिन यह मिश्रण समाप्त हो, उसी रात से 12 बजे के बाद प्रतिदिन संभोग (स्त्री प्रंसग) करने से बांझपन की स्थिति में भी गर्भधारण की संम्भावना बढ़ जाती है।
  • पीपल के सूखे फलों के 1-2 ग्राम चूर्ण कच्चे दूध के साथ मासिक-धर्म के शुद्ध होने के बाद 14 दिनों तक देने से बांझपन में लाभ होता है।

हकलाहट :

आधा चम्मच पीपल के पके फलों का चूर्ण शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से हकलाहट में लाभ होता है।

नपुंसकता :

आधा चम्मच पीपल के फल का चूर्ण दिन में 3 बार दूध के साथ सेवन करते रहने से नपुंसकता (नामर्दी) दूर होकर, बल, वीर्य तथा पौरुष बढ़ता है।

वीर्यवर्धक :

  • पीपल की जड़ की छाल का प्रयोग करने से वीर्य अधिक गाढ़ा होता है |
  • छाया में सुखाये गए पीपल के फल को पीसकर छान लें। इस चौथाई चम्मच चूर्ण को 250 मिलीलीटर गर्म दूध में मिलाकर प्रतिदिन पीने से वीर्य बढ़ जाता है। नपुंसकता दूर होती है। इससे मासिक-धर्म के रोग, श्वेतप्रदर एवं कब्ज में भी अत्यंत लाभ होता है।

पीलिया :

पीपल के 3-4 पत्तों को मिश्री के साथ खरल में खूब घोंटकर बारीक पीस लें इसमें 250 मिलीलीटर पानी मिलाकर छान लें। 3- 5 दिनों तक प्रतिदिन यह पेय पीने से लाभ होता है |

अपच :

  • पीपल का 1 पत्ता + 4 कलियां शीशम की + थोड़ा-सा हरा धनिया आपस में मिलाकर 1 कप पानी में तब तक उबालें जब तक पानी आधा कप न बच जाए, फिर इसमें थोड़ा-सा सेंधा नमक मिलाकर पीने से आराम होगा।
  • पीपल के पेड़ की कोपलों को मिट्टी के बर्तन में बंद करके जलाकर उसकी राख बना लें। इस राख को खाने से मंदाग्नि एवं  अजीर्ण में लाभ होता है।
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Sunday, February 12

हल्दी के बेहद असरकारी औषधीय प्रयोग



By-Dr. Kailash Dwivedi
हल्दी (टर्मरिक) भारतीय वनस्पति है। यह अदरक की प्रजाति का ५-६ फुट तक बढ़ने वाला पौधा है जिसमें जड़ की गाठों में हल्दी मिलती है। हल्दी को आयुर्वेद में प्राचीन काल से ही एक चमत्कारिक द्रव्य के रूप में मान्यता प्राप्त है।

  • लैटि‍न नाम : करकुमा लौंगा
  • अंग्रेजी नाम : टरमरि‍क (Turmeric)

हल्‍दी में पाए जाने वाले तत्‍व (100 ग्राम में) :

  •     जल 13.1  ग्राम 
  •     प्रोटीन 6.3  ग्राम 
  •     वसा 5.1  ग्राम 
  •     खनिज पदार्थ 3.5  ग्राम 
  •     रेशा 2.6  ग्राम 
  •     कारबोहा‍‍इड्रेट 69.4 ग्राम 
  •     कैल्शियम 150 मिलीग्राम 
  •     फासफोरस 282 मिलीग्राम 
  •     लोहा 15 मिलीग्राम 
  •     विटामिन ए 50 मिलीग्राम 
  •     विटामिन बी 03 मिलीग्राम 
  •     कैलोरी (प्रति 100 ग्राम में) : 349 कैलोरी 

हल्‍दी की औषधीय मात्रा

वयस्‍क व्‍यक्ति के लिये निश्चित की गयी मात्रा :
  •  कच्‍ची हल्‍दी का रस : 1 से 3 चाय चम्‍मच तक 
  •  सूखी हल्‍दी का चूर्ण : 1 ग्राम से 4 ग्राम तक 
किशोंरों के लिये :
  • 500 मिलीग्राम से 1 ग्राम तक 
बच्‍चों के लिये :
  • 50 मिलीग्राम से 100 मिली ग्राम तक 
लेने का तरीका :

 इसे आवश्‍यकतानुसार गुनगुनें पानीं, गरम चाय अथवा दूध के साथ दिन मे, तकलीफ के हिसाब से, एक बार से लेकर चार या पांच बार तक ले सकते हैं | इसके कोई साइड इफेक्‍ट नहीं हैं और हल्‍दी पूर्ण रूप से सुरक्षित औषधि है |

    विभिन्न रोगों में हल्दी का प्रयोग :




    दमा (अस्थमा) :

    दमा रोग में हल्‍दी का चूर्ण 2 से 3 ग्राम + अदरख के एक या दो चम्‍मच रस + एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में चार बार खानें से दमा रोग में लाभ होता है | कुछ दिनों तक यह प्रयोग लगातार करना  चाहिये | अगर रोगी एलापैथी की दवायें खा रहा है, तो भी यह प्रयोग कर सकते हैं जैसे जैसे आराम मिलता जाए, एलापैथी दवाओं की मात्रा कम करते जाएँ |

    लिवर के रोग :

    लिवर के सभी विकारों में - पीलिया , पान्‍डु रोग इत्‍यादि में हल्‍दी का चूर्ण 1 ग्राम , कुटकी का चूर्ण 500 मिलीग्राम मिलाकर दिन में तीन बार सादे पानीं के साथ खाना चाहिये | प्‍लीहा (तिल्ली) की सभी बीमारियों में भी यह चूर्ण लाभकारी है |

    मूत्र रोग :

    प्रमेह ,बहुमूत्र , गंदा पेशाब , पेशाब में जलन , पेशाब में एल्‍बूमन जाना , पेशाब में रक्‍त , पीब के कण आदि रोगों में हल्‍दी चूर्ण 1 ग्राम दिन में चार बार सादे पानीं से सेवन करें |

    मधुमेह :

    मधुमेह  में हल्‍दी 2 ग्राम + जामुन की गुठली का चूर्ण 2 ग्राम + कुटकी 500 मिलीग्राम मिलाकर दिन में चार बार सादे पानीं से खायें |

    अनचाहे बाल हटाने के लिए :

    यदि  त्वचा पर अनचाहे बाल उग आये हों तो इन बालों को हटाने के लिये हल्दी पाउडर को गुनगुने नारियल तेल में मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को हाथ-पैरों पर लगाएं। ऐसा करने से शरीर के अनचाहे बालों से निजात मिलती है।

    चोट-मोच :

    चोट लगने या मोच होने पर हल्दी बहुत फायदा करती है। मांसपेशियों में खिंचाव  या अंदरूनी चोट लगने पर हल्दी का लेप लगाएं या गर्म दूध में हल्दी पाउडर डालकर पियें।

    सौन्दर्य हेतु :

    हल्दी को दूध में मिलाकर इसका पेस्ट बना लीजिए। इस पेस्ट को चेहरे पर लगाने से त्वचा का रंग निखरता है।

    चेहरे के दाग-धब्बे :

    • दाग, धब्बे व झाइंया मिटाने के लिए हल्दी बहुत फायदेमंद है। चेहरे के दाग-धब्बे और झाइयां हटाने के लिए हल्दी और काले तिल को बराबर मात्रा में पीसकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं।
    • हल्‍दी का चूर्ण 1 ग्राम और आवश्‍कतानुसार दूध मिलाकर बनाया हुआ पेस्‍ट मुहासों , सफेद दाग या काले दाग , रूखी त्‍वचा , खुजली , खारिश आदि तकलीफों में लगानें से आरोग्‍य प्राप्‍त होता है |
    • चेहरे का सौंदर्य , त्‍वचा का सौंदर्य ‍निखारनें के लिये हल्‍दी का उबटन प्रयोग करना चाहिये |

    त्वचा रोग :

    • एलर्जी , शीतपित्‍ती , जलन का अनुभव , ददोरे आदि पड़ जानें की तकलीफ में हल्‍दी को पानी के साथ पेस्‍ट जैसा बनाकर लगानें से आराम मिलता है |
    • फोड़ा फुन्‍सी पकानें के लिये - हल्‍दी की पुल्टिस रखनें से फोड़ा फुंसी शीघ्र पक जाते हैं |
    • घाव , कटे एवं पके हुये , पीब से भरे घावों में हल्‍दी का चूर्ण छिड़कनें से घाव शीघ्र भरते हैं |
    • चाकू या धारदार अस्‍त्र से शरीर का कोई अंग कट जानें पर हल्‍दी का चूर्ण छिड़कनें से लाभ प्राप्‍त होता है |

    मुंह के छाले :

    मुंह में छाले होने पर गुनगुने पानी में हल्दी पाउडर मिलाकर कुल्ला करें या हलका गर्म हल्दी पाउडर छालों पर लगाएं। इससे मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

    बबासीर का दर्द :

    बवासीर के मस्‍सों का दर्द अथवा जलन ठीक करनें के लिये हल्‍दी का चूर्ण मस्‍सों पर छिड़कना चाहिये |

    सूजन-दर्द :

    शरीर के किसी भी स्‍थान की सूजन के साथ दर्द और जलन हो तो हल्‍दी के पेस्‍ट का बाहरी प्रयोग करनें से इन तकलीफों में आराम मिल जाता है |

    जुखाम, बुखार, खांसी :

    सभी प्रकार के बुखार , जुखाम एवं खांसी में हल्‍दी का चूर्ण 1 से 3 ग्राम तक गरम पानीं से दिन में दो बार , सुबह शाम , खानें से लाभ होता है
    • नाक से संबंधित सभी तरह की तकलीफों , पुराना जुकाम , पीनस , नाक का मांस बढ़ जानें , साइनुसाइटिस में हल्‍दी का चूर्ण 1 से 2 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार खाने से लाभ होता है उक्‍त तकलीफों से होनें वाले सिर दर्द , बुखार , बदन दर्द आदि लक्षण भी ठीक हो जाते हैं |

    इस्‍नोफीलिया :

    इस्‍नोफीलिया मे  2 से 3 ग्राम हल्‍दी चूर्ण गुनगुनें पानीं से , दिन में तीन बार , खानें से इस रोग में आराम मिलता  है कुछ दिनों तक लगातार खानें से रोग समूल नष्‍ट हो जाते हैं | जैसे जैसे इस्नोफिल काउन्‍ट कम होता जाये, वैसे हल्‍दी की मात्रा घटाते जाना चाहिये |
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    Saturday, February 11

    स्वप्नदोष दूर करने के कुछ सरल घरेलू उपाय




    • प्रतिदिन रात्रि को सोने से पहले 4- 5 चमच्च की मात्रा में तुलसी की जड़ का काढा  कुछ हफ़्तों तक पीने से स्वप्नदोष दूर होता है |
    • एक चमच्च की मात्रा में बड़े गोखरू के फल का चूर्ण , थोडा घी और मिश्री मिलाकर एक हफ्ते तक सुबह शाम लेने से भी स्वप्नदोष दूर होता है |
    • अपामार्ग की जड़ का चूर्ण और मिश्री को समान मात्रा में पीस कर एक साथ मिश्रण कर लें ! इस मिश्रण को एक चमच्च की मात्रा में दिन में तीन बार दो हफ्ते तक सेवन करने से स्वप्नदोष से छुटकारा मिल जाता है |
    • इसबगोल और मिश्री बराबर मिलाकर एक चमच्च एक कप दूध के साथ रात को सोने से एक घंटे पहले लें और उसके बाद सोते समय मूत्र त्याग करके सो जाएँ ! इससे भी स्वप्नदोष का निराकरण होता है l
    • आँवले के रस में इलायची के दाने और इसबगोल बराबर की मात्रा में मिलाकर सुबह शाम एक एक चमच्च का सेवन करने से भी स्वप्नदोष दूर होता है |
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