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Friday, March 6

पेट को रोगमुक्त रखेंगे घर में बने ये 4 चूर्ण


पेट की समस्या से हर घर में अधिकतर व्यक्ति परेशान होते हैं। पेट की मुख्‍य समस्‍याओं में कमजोर पाचन तंत्र, कब्‍ज, गैस बनना हो सकता है। इनके लिए डॉक्‍टरी इलाज करने के साथ ही आप इन घरेलू नुस्‍खों को भी अपना सकते हैं। आज हम आपको पेट की आम समस्‍याओं के लिए इलाज के लिए घरेलू चीजों से बनने वाले 4 चूर्ण के बारे में बता रहे हैं। इनके प्रयोग से कई रोगों से मुक्त हो सकते है।
गैस हर चूर्ण :
सामग्री
·       10 ग्राम सेंधा नमक
·       10 ग्राम हींग
·       10 ग्राम सज्जीखार ( शुद्ध )
·       10 ग्राम हरड़ छोटी
·       10 ग्राम अजवायन
·       10 ग्राम काली मिर्च
चूर्ण बनाने की विधि
इस चूर्ण को बनाने के लिए उपर्युक्त  सामग्री को इक्कठा करें और अच्छी तरह से बारीक पीस लें। जब पाउडर बन जाए तो उसे किसी बारीक कपड़े या छन्‍नी से छान कर किसी कांच की शीशी में भरकर रख लें।
गैस और अपच के लिए :
सामग्री
·       जीरा 120 ग्राम 
·       सेंधानमक 100 ग्राम 
·       धनिया 80 ग्राम
·       कालीमिर्च 40 ग्राम 
·       सोंठ 40 ग्राम
·       छोटी इलायची 20 ग्राम
·       पीपर छोटी 20 ग्राम 
·       नींबू सत्व 15 ग्राम 
·       खाण्ड देशी 160 ग्राम
चूर्ण बनाने की विधि
नींबू और खाण्‍ड को छोड़ कर बाकी की सभी सामग्रियों को पीस कर चूर्ण तैयार करें।  फिर उसमें नींबू निचोड़े और खाण्‍ड मिलाएं। इस मिश्रण को 3 घंटे के लिये एक कांच के बरतन में रख दें।  फिर इसका सेवन खाना खाने के बाद 2 से 5 ग्राम करें।
कब्‍ज निवारक चूर्ण
सामाग्री
·       जीरा
·       अजवाइन
·       काला नमक
·       मेथी
·       सौंफ
·       हींग
चूर्ण बनाने की विधि
सबसे पहले जीरा, अजवाइन, मेथी और सौंफ को अलग-अलग धीमी आंच पर भून लें। भूनने के बाद इन्‍हें अलग-अलग बारीक पीस लें। इसके बाद एक बर्तन में काला नमक और आधा चम्‍मच हींग लें। अब इसमें जीरा, सौंफ, अजवाइन का पाउडर डाल लें। इन तीनों से कम मात्रा में मेथी पाउडर डालें। इस मिश्रण को अच्‍छी तरह मिला लें। ध्‍यान ये रखना है कि जीरा, अजवाइन और सौंफा की मात्रा समान होनी चाहिए। इसको अच्‍छी तरह से मिक्‍स करने के बाद किसी डिब्‍बे में रख लें।

पेट के लिए रामबाण है यह चूर्ण
खाना खाने के बाद कई लोगों को बदहजमी हो जाती है। कभी-कभी तो पेट दर्द बर्दाशत से बाहर हो जाता है।इस चूर्ण से पाचन क्रिया ठीक रहती है।
सामग्री
·       अनारदाना 10 ग्राम
·       छोटी इलायची 10 ग्राम
·       दालचीनी 10 ग्राम
·       सौंठ 20 ग्राम
·       पीपल 20 ग्राम
·       कालीमिर्च 20 ग्राम
·       तेजपत्ता 20 ग्राम
·       पीपलामूल 20 ग्राम
·       नींबू का सत्व 20 ग्राम
·       धनिया 40 ग्राम
·       सेंधा नमक 50 ग्राम
·       काला नमक 50 ग्राम
·       सफेद नमक 50 ग्राम
·       मिश्री की डली 350 ग्राम
चूर्ण बनाने की विधि
सेंधा नमक, काला नमक, सफेद नमक, मिश्री और नींबू का सत्व को छोड़कर सभी सामान को कड़ी धूप में 2-3 घण्टे सुखा लें। फिर इसे मिक्सी में डालकर बारीक पीस लें।
इसके बाद बाकी सामान को अलग से बारीक पीस लें और फिर सभी सामानों के इस पाउडर को अच्छे से मिला लें। अब इसे किसी कांच की शीशी भरकर रख लें।

Saturday, November 25

शरीर में कैसी भी गाँठ हो, ख़त्म कर देता है यह नुस्खा !





By- Dr. Kailash Dwivedi

शरीर के किसी भी अंग में उत्पन्न हुयी गाँठ साधारण गाँठ से लेकर कैंसर तक हो सकती हैं। ठीक न होने वाली असामान्य गांठ अथवा आंतरिक या बाह्य रक्तस्राव कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि सभी गांठे कैंसर ही हों। परन्तु फिर भी इस सम्बन्ध में सावधानी रखते हुए समय से इसकी जाँच एवं उपचार बहुत आवश्यक है | साधारण गांठे भले ही कैंसर की न हों लेकिन इनका भी इलाज आवश्यक होता है। उपचार के अभाव में ये असाध्य रूप ले लेती हैं, परिणाम स्वरूप उनका उपचार लंबा और जटिल हो जाता हैएवं इनका कैंसर में परिवर्तित होने की सम्भावना भी बढ़ जाती है | इस लेख में जानिये एक ऐसे नुस्खे के विषय में जिससे कैसी भी गांठ हो, ठीक हो सकती है | यह औषधि स्वाद में कड़वी होती है परंतु अत्यधिक प्रभावी है। जब तक गाँठ पूरी तरह से समाप्त न हो जाये इस औषधि को बंद नहीं करना चाहिए |

निम्न गांठो में प्रभावी है यह नुस्खा :



  • गर्भाशय की गांठ
  • स्त्री पुरुष के स्तनो की गांठ
  • टॉन्सिल 
  • गले की गाँठ  (बढ़ी हुयी थायराइड ग्लैण्ड -Goiter) 
  • फैट की गांठ (LIPOMA)
  • प्रोस्टेट की गांठ 
  • जांघ के पास की गांठ
  • काँख की गांठ
  • गले के बाहर की गांठ

आवश्यक सामग्री :

पंसारी के यहाँ से निम्न औषधि ले लें -

  • कचनार की शाखा की ताजी छाल 25-30 ग्राम (यदि सूखी छाल हो तो - 15 ग्राम )
  • गोरखमुंडी पाउडर  - 1 चम्मच 

तैयार करने की विधि :

कचनार की छाल को कूटकर  1 गिलास पानी मे उबाले। 2 मिनट तक उबालने के पश्चात् इसमे पिसी हुयी गोरखमुंडी 1 चम्मच की मात्रा में मिला दें | इस मिश्रण को 1 मिनट तक उबालकर छान लें ।

सेवन विधि :

प्रतिदिन प्रातः खाली पेट इस काढ़े को बनाकर गुनगुना रह जाये तब पियें । गाँठ पुरानी होने की स्थिति में इस काढ़े को प्रातः-सायं दोनों समय ले।







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Tuesday, April 25

इस प्रयोग से पेट का अल्सर हो जायेगा गायब !



जब भोजन को पचाने वाला अम्लीय पदार्थ अमाशय की दीवारों को क्षति पहुंचाने लगता हैं तो व्यक्ति को अल्सर का रोग हो जाता हैं. अल्सर व्यक्ति के अमाशय या छोटी आंत के ऊपरी हिस्से में फोड़े निकलते हैं. अल्सर को अमाशय का अल्सर, पेप्टिक अल्सर तथा गैस्ट्रिक अल्सर के नाम से भी जाना जाता हैं.




प्रयोग :


1 सेब में लौंग को इस प्रकार से चारों तरफ चुभों दें कि कोई भाग खाली न रह जायें। 40 दिन बाद लौंगों को निकाल कर शीशी में रख दें। खाना खाने के बाद एक लौंग को चूसने से पेट का घाव भरने लगता है।
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Wednesday, April 19

गर्मी में सर्दी जुकाम एवं बुखार से परेशान हैं तो इन्हें आजमायें !




By- Dr. Kailash Dwivedi
बुखार की घरेलू चिकित्सा :

  • 10 तुलसी के पत्तों का रस  
  • 5 पीसी हुयी काली मिर्च


उपर्युक्त दोनों चीजों को 50 मिली. पानी में मिलाकर प्रातः-सायं लेने से गर्मियों में होने वाले बुखार में लाभ मिलता है | इस योग को आवश्यकतानुसार 3 से 7 दिन तक लेना चाहिए | यह मात्रा वयस्क के लिए है | बच्चों के लिए इसकी मात्रा चौथाई कर लेनी चाहिए |

खांसी जुकाम की घरेलू चिकित्सा :

  • एक कप पानी में 8-10 तुलसी पात्र एवं 5 पुदीने के पत्तों को अच्छी तरह से उबालें | इसे छानकर एक चम्मच शहद मिला लें | यह चाय बदलते मौसम की खांसी - जुकाम को दूर करने में बहुत मददगार है |
  • रात्रि सोते समय एक गिलास गुनगुने दूध में एक चम्मच हल्दी का पाउडर मिलाकर पीने से खांसी-जुकाम में राहत मिलती है |
  • एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू के रस मिलाएं | इसमें स्वाद के अनुसार शहद मिलाकर पिएँ।


Thursday, April 13

पेट के लिए रामबाण है बेल



By- Dr. Kailash Dwivedi

गर्मियों की शुरुआत के साथ ही शरीर के लिए ऐसे खाद्य और पेय पदार्थों की आवश्यकता बढ़ जाती है, जो शरीर को गर्मी से राहत देते हुए ठंडक प्रदान करें। उनमें से बेल भी एक है, जो पेट के लिए सबसे अच्छा माना गया है।ऊपर से भूरे सुनहरे रंग वाले पके बेल फल का गूदा पीला और खुशबूदार होता है। ठंडी तासीर होने की वजह से इसे शीतल फल भी कहा जाता है।

न्यूट्रिशनल वैल्यू :

बेल में प्रोटीन, फास्फोरस, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, कैल्शियम, फैट,फाइबर, विटामिन-सी, बी पाया जाता है। आयुर्वेद में इसके रस को खाली पेट पीने की सलाह दी गई है। यह ज्यादा फायदेमंद होता है। दिन भर बेल का शरबत पीने से कोई फायदा नहीं।

पेट के लिए रामबाण है बेल :

दिमाग और हृदय को शक्ति प्रदान करने के साथ पेट के रोगों में भी बेल को रामबाण माना गया है। यह एसिडिटी दूर करता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमताभी बढ़ाता है। अल्सर और कब्ज के साथ पेचिश की समस्या में यह फायदेमंद है।पेट संबंधी समस्या के लिए इसके मुरब्बे का सेवन करें।

लू से बचाता है :

गर्मियों में लू लगने पर बेल के ताजे पत्तों को पीसकर पैर के तलवे पर लगाने से आराम मिलता है। लू लगने पर इसके रस को मिश्री के साथ पीना भी सहीरहता है। दस्त हो रहा हो, तो इसके कच्चे फल के गूदे का चूर्ण बनाकर काले तिल के चूर्ण के साथ खाएं।

कैसे करें स्टोर  :

बेल के गूदे में पर्याप्त मात्रा मेंबीज पाए जाते हैं, जिन्हें निकालकर गूदे को सुखाने के बाद चूर्ण बनाया जा सकता है। इस चूर्ण का सेवन पेट के रोगों में फायदेमंद होता है। गांवों में लोग बेल के गूदे की टिकिया बनाकर रखते हैं। इस मौसम में आप पके बेल और कच्चे बेल दोनों के गूदे का चूर्ण बनाकर स्टोर कर लें। कच्चे बेल के टुकड़े काटकर उनका हवन करने से घर कीटाणु रहित हो जाता है।

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Saturday, March 4

रतनजोत के इस प्रयोग से बाल हो जायेंगे काले !




By- Dr. Kailash Dwivedi
जेट्रोफा की जड़ से एक महीन लाल रंगने वाला पदार्थ मिलता है जिसका प्रयोग खाने,पीने की चीज़ों को लाल रंगने के लिए होता है, भारत के रोग़न जोश व्यंजन की तरी का लाल रंग अक्सर इसी से बनाया जाता है। इसके अलावा दवाईयों, तेलों, शराब, इत्याद में भी इसके लाल रंग का इस्तेमाल होता है। इसे रतनजोत भी कहते हैं परन्तु वास्तव में 'रतनजोत' नाम इस पौधे की जड़ से निकलने वाले रंग का है | जेट्रोफा से बायो डीजल बनता है | चिकित्सकीय दृष्टि से यह कई रोगों की रामबाण औषधि है। इस लेख में पढ़िए सफ़ेद बालों को प्राकृतिक रूप से काला करने का एक बेहद असरकारी प्रयोग |

आवश्यक सामग्री :

रतनजोत की ताज़ी जड़  : 100 ग्राम
मेंहदी के पत्ते :                 100 ग्राम
जलभांगर के पत्ते :           100 ग्राम
आम की गुठलियां :          100 ग्राम
सरसों का तेल :                1 किलोग्राम

बनाने की विधि :

उपर्युक्त सभी सामग्री (सरसों के तेल को छोडकर) आपस में मिलाकर कूट लें | जब यह अच्छे से कुट जाये तो इसे निचोड़ लें | तत्पश्चात इस रस को 1 किलो सरसों के तेल में इतना उबाल ले कि इसका पानी खत्म हो जाये और केवल तेल बचे | ठंडा होने पर इसे छानकर कांच की शीशी में भरकर रख लें | इस तेल को प्रतिदिन सिर पर लगाने से बाल काले हो जाते है | 
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Tuesday, January 31

यह प्रयोग सभी तरह के वात दर्द को कर देगा चुटकियों में गायब !



. By- Dr. Kailash Dwivedi

जानिए एक अनुभूत एवं अदभुत तेल बानाने की विधि जो जोड़ों के दर्द, घुटनो के दर्द, कंधे की जकड़न , साइटिका, कमर दर्द आदि को कर देगा चुटकियों में गायब।

आवश्यक सामग्री :


  • सरसों या तिल का तेल :  500 ग्राम
  • दालचीनी  :                     25 ग्राम
  • कायफल की छाल  :      250 ग्राम
  • कपूर :                          5 टिकिया


कायफल :

कायफल की छाल देखने मे गहरे लाल रंग की खुरदरी होती है | यह लगभग 2 इंच के टुकड़ों मे मिलती है। यह जड़ी बूटी बेचने वाली दुकानों पर आसानी से मिल जाता है। तेल बनाने के लिए कायफल की छाल को कूट कर बारीक पीस लेना चाहिए।



तेल बनाने की विधि : 


सर्वप्रथम लोहे की कड़ाही मे धीमी आंच पर सरसों या तिल का तेल गर्म करें। जब तेल गर्म हो जाए तब थोड़ा थोड़ा करके कायफल छाल का चूर्ण डालते जाएँ। कायफल छाल का चूर्ण डालने के पश्चात् दालचीनी का पाउडर डालें। जब सारा चूर्ण खत्म हो जाए तब कड़ाही के नीचे से आग बंद कर दे।
ठंडा हो जाने पर इस तेल को एक महीन सूती कपड़े छान ले। छानने के बाद इस तेल को हल्का गर्म कर इसमें  5 टिकिया कपूर का पाउडर मिला दे | इस तेल को कांच की बोतल मे रख ले। कुछ दिन मे तेल मे से लाल रंग का पदार्ध नीचे बैठ जाएगा। इसके बाद ऊपर के साफ़ तेल को दूसरी शीशी मे भर लें एवं 25 ग्राम दालचीनी का चूर्ण और मिला लें |
तेल छानने के बाद जो लाल रंग का पदार्थ बच जाए उसे फेंके नहीं बल्कि सुरक्षित रख लें |

प्रयोग विधि :

तेल को हल्का गर्म करके दर्द वाले अंग कम दबाव के साथ धीरे धीरे मालिश करें। इसके बाद लाल रंग वाले पदार्थ को कपड़े की पोटली में भरकर पोटली को तवे पर गर्म करके इस पोटली से दर्दयुक्त अंग की 10 मिनट तक सिंकाई करें |

सावधानी :

तेल मालिश एवं सेक के 2 घंटे बाद तक ठंडा पानी न पियें।


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Sunday, January 29

इन सरल प्रयोगों से नाखूनों का फंगल संक्रमण हटायें






. By- Dr. Kailash Dwivedi

नाखूनों में फंगल इन्फेक्शन हो जाने से न सिर्फ बल्कि नाखूनों की सुन्दरता भी नष्ट हो जाती है बल्कि कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है | ऐसी स्थिति में व्यक्ति अपने नाखूनों को छिपाने की कोशिश करता है | उसमे शर्म और हीन भावना का भाव उत्पन्न होने लगता है | कुछ सावधानियों के साथ इस लेख में दिए गए टिप्स अपनाकर आप अपने नाखूनों को स्वस्थ बना सकते हैं |

फंगलग्रस्त नाखूनों को हटायें : 

जिन नाखूनों में संक्रमण हो उन्हें काट देना चाहिए | इसके लिए  पहले नाखूनों को 20-30 मिनट के लिए गर्म पानी में डुबाकर रखें। फिर नाखून को काटना शुरू करें। नाखूनों से मोटी पपड़ीदार फफूँद को जितना हो सके खुरचकर हटा दें।

टी-ट्री तेल इस्तेमाल करें: 

नाखूनों के पूर्णतया स्वस्थ होने तक प्रतिदिन प्रातः-सायं शुद्ध टी-ट्री तेल लगायें | टी ट्री तेल  एक बहुत ही फायदेमंद तेल है। यह एक प्राकृतिक तेल है। जो कि एक पेड़ से प्राप्त किया जाता है। यह किसी भी औषधि विक्रेता के यहाँ से ले सकते हैं | इसे दवाई डालने के ड्रॉपर से नाखून की खुली हुई जगह (exposed nail bed) और उसके किनारों के नीचे तक अच्छी तरह से लगायें |

पानी और सिरका इस्तेमाल करें: 

प्रतिदिन रात को 30 मिनट के लिए रोगग्रस्त नाखूनों को  को पानी और सिरके के घोल में डुबाकर रखें। इससे नाखूनों का pH कम हो जाता है और फफूँद जीवित नहीं रह पाते। पूर्ण लाभ के लिए यह प्रयोग तीन से छह महीने तक प्रतिदिन करना पड़ सकता है।


विक्स वेपोरब का प्रयोग करें :

प्रतिदिन रात्रि को सोते समय संक्रमण वाले नाखून पर थोड़ा सा विक्स वेपोरब लगायें। विक्स वेपोरब लगाने से पूर्व नाखूनों को अच्छी तरह से सुखा लें |

नाखुनों में एंटी फंगल क्रीम लगायें :

नाखूनों से फंगल समाप्त करने के लिए उन्हें अच्छी तरह से धोकर पोंछे खास तौर से उँगलियों के बीच में, नाखूनों के आस-पास जहाँ नमी रह जाने की आशंका है। तत्पश्चात एंटी-फंगल क्रीम लगायें।

मधुमेह की जाँच कराएँ :

यदि नाखूनों में फंगल संक्रमण बहुत धीरे स्वस्थ होते हैं तो मधुमेह (diabetes) के लिए खून की जाँच करवानी चाहिए।

ध्यान रखें :


  • नाखूनों को उँगलियों से कभी न चीरें  हमेशा साफ नेल कटर का इस्तेमाल करें। काटने से पूर्व नाखूनों को पानी में भिगोकर मुलायम कर ले |
  • नाखून काटने और घिसने के सभी उपकरणों को 15 मिनट तक पानी में उबालकर रोगाणुओं से मुक्त कर लें।
  • संक्रमण वाले नाखूनों पर नेल पॉलिश न लगायें।


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Saturday, January 28

इस औषधि से बवासीर (Hemorrhoids) ख़त्म होगी सिर्फ एक सप्ताह में !



By- Dr. Kailash Dwivedi

औषधि बनाने की विधि - 1 :

रीठा के छिलके को पीसकर इसके पाउडर में दूध मिला लें | जब इस मिश्रण का पेस्ट जैसा बन जाए तो बेर के बराबर गोलियां बना लें।

सेवन विधि :

प्रतिदिन प्रातः सायं  1-1 गोली छाछ के साथ लें |

औषधि बनाने की विधि - 2 :

रीठा के छिलके को जलाकर भस्म बना लें | इस भस्म (राख) में बराबर मात्रा में पिसा हुआ सफेद कत्था मिलाकर किसी कांच के बर्तन में भरकर रख लें।

सेवन विधि :

आधे से एक ग्राम चूर्ण को प्रतिदिन प्रातः पानी के साथ लें |




औषधि बनाने की विधि - 3 :

रीठे के फल के छिलके को तवे पर भूनकर कोयला बना लें, तत्पश्चात इसमें बराबर मात्रा में पपड़िया कत्था मिलाकर अच्छी तरह से पीसकर कपडे़ से छान लें।

सेवन विधि :

125 मिलीग्राम चूर्ण प्रतिदिन प्रातः-सायं मक्खन या मलाई के साथ 7 दिनों तक सेवन करें। इन सात दिनों में नमक एवं खटाई का सेवन भूलकर भी न करें | इस औषधि से कब्ज,बवासीर की खुजली,बवासीर से खून बहना आदि समाप्त हो जाती है |
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Friday, January 27

प्रोस्टेट का बढ़ना - प्राकृतिक उपचार





By- Dr. Kailash Dwivedi

प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ने की समस्या 40 वर्ष की आयु के बाद सामने आती है | लगभग 70-80 प्रतिशत व्यक्ति इस बीमारी से ग्रस्त होते हैं। प्रोस्टेट की अनदेखी करने पर अन्य समस्यायों के साथ गुर्दा फेल होने की संभावना भी बढ़ जाती है। 
मेडिकल साइंस के आकड़ों के अनुसार, यदि व्यक्ति 60 वर्ष से अधिक उम्र का है तो उसकी बीमारी ठीक होने की सम्भावना 60 प्रतिशत दवाओं से और 40 प्रतिशत ऑपरेशन से रहती है।
सामान्य रूप से प्रोस्टेट का साइज 18 से 20 ग्राम होता है। हर साल इसके आकार में 2-3 ग्राम की बढ़ोतरी होती है। यदि प्रोस्टेट की बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति की प्रोस्टेट का आकार 100 ग्राम से अधिक बढ़ जाए तो यह गुर्दों के लिए घातक होता है। इसकी अनदेखी करने पर पीड़ित व्यक्ति की किडनी फेल होने की संभावना बढ़ जाती है। प्राकृतिक चिकित्सा से इस रोग में लाभ प्राप्त किया जा सकता है | जहाँ तक संभव हो सर्जरी से बचना चाहिए | सर्जरी के बाद निम्न समस्याएं आ सकती हैं -

प्रोस्टेट की सर्जरी के बाद आ सकती है यह समस्या :

प्रोस्टेट ग्लैंड मूत्राशय की ग्रीवा तथा मूत्रमार्ग के ऊपरी भाग को चारों तरफ से घेरकर रखती है। इस ग्लैंड से सफेद, लिसलिसा तथा गाढ़ा स्राव निकलता है। जब पुरुष उत्तेजित होता है तो उस समय शुक्राणु प्रोस्टेट में पहुंच जाते हैं। यह लिसलिसा पदार्थ इन शुक्राणुओं को जीवित रखने और बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब यह ग्रंथि अधिक बढ़ जाती है तो मूत्राशय तथा मूत्रमार्ग की क्रियाओं में बाधा उत्पन्न होती है। ऑपरेशन के बाद 100 में से 100 लोगों का सेक्स के दौरान वीर्य नहीं निकलता है, बल्की पेशाब की थैली में चला जाता है। दो प्रतिशत लोगों में नपुंसकता के चांचेज भी बढ़ जाते हैं। इसके आलाव ऑपरेशन के बाद यदि इंटरनल स्पींटर कट गया तो यूरिन रुकने की समस्या पैदा हो जाती है।



प्रोस्टेट बढ़ने के लक्षण :

  • बार-बार पेशाब का आना, रात में चार से पांच बार यूरिन परित्याग करने के लिए जाना
  • पेशाब का देर से उतरना 
  • शौच करते समय पेशाब का बूँद-बूँद कर टपकना
  • यूरिन करने के बाद भी पुनः यूरिन की शंका होना, ऐसा महसूस होता है कि तेज पेशाब लगी है लेकिन करने पर बूंद-बूंद कर होती है 
  • पेशाब में खून का आना
  • मूत्राशय में पथरी का बनना
  • गुर्दे का फे ल होना
  • सिर में दर्द, घबराहट, थकान, चिड़चिड़ापन होना 
  • लिंग का ढीला हो जाना तथा अधिक कमजोरी महसूस होना एवं वीर्य निकलने पर दर्द होता है
  • पेशाब में जलन होना  
  • मूत्र पर नियंत्रण नहीं होना एवं मूत्र त्याग कर चुकाने के बाद भी मूत्र की बूंदे टपकना  

प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ने के कारण :

  1. लगातार लम्बे समय तक बैठने का कार्य करना 
  2. अप्राकृतिक खान-पान 
  3. मानसिक तनाव, चिंता एवं अधिक क्रोध 
  4. नशीले पदार्थों का अधिक सेवन 
  5. कब्ज 
  6. मूत्र तथा शौच का वेग रोकना 

प्राकृतिक उपचार :

गर्म-ठंडा कटि स्नान :

गर्म - ठंडा कटि स्नान करने के लिए कपड़े निकालकर टब में पैरों को बाहर करके आधे लेटने की स्थिति में इस प्रकार बैठना चाहिए कि नाभि के ऊपर तक का भाग एवं आधी जंघाएँ पानी के अन्दर आ जाएँ | 
इस स्नान को करने के लिए निम्न साधनों की आवश्यकता होगी -

साधन :
कटि स्नान के टब - 2,  गरम एवं ठंडा पानी |

विधि :
कटि स्नान के एक टब में ठंडा एवं दूसरे टब में गर्म पानी भरकर इसमे निम्न क्रम में बैठना चाहिए -
  • 3 मिनट गर्म 
  • 1 मिनट ठंडा  

  • 3 मिनट गर्म 
  • 1 मिनट ठंडा 
  • 3 मिनट गर्म 
  • 1 मिनट ठंडा 
  • 3 मिनट गर्म 
  • 3 मिनट ठंडा 
इस प्रकार कुल 18 मिनट तक इस उपचार को करना चाहिए |

प्रोस्टेट में आहार चिकित्सा :

कद्दू  के बीज प्रोस्टेट की समस्या से बचाव करने में अत्यंत सहायक  इन बीजों में मौजूद केमिकल शरीर में जाकर टेस्टोस्टेरोन को डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन में बदलने से बचाता है जिससे प्रोस्टेट कोशिकाएं  नहीं बन पातीं है |
इसके बीज जिंक के बेहतरीन स्रोतों में से एक माने जाते हैं |प्रतिदिन 60 मिलीग्राम जिंक का सेवन प्रोस्टेट के रोगियों को अत्यंत लाभ पहुंचाता है और उनके स्वास्थ्य में भी सुधार करता है | कद्दू के बीज कच्चे या भून कर अथवा  दूसरे बीजों के साथ मिलाकर खाए जा सकते हैं |

  • उपचार से सम्बंधित यदि कोई प्रश्न पूछना हो तो कृपया कमेन्ट बॉक्स में अपना प्रश्न लिखें -

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Wednesday, January 25

कांच निकलना (गुदाभ्रंश) (PROLAPUS ANI)





By- Dr.Kailash Dwivedi

कारण :


गुदाभ्रंश का प्रमुख कारण  कब्ज के कारण या मलत्याग के समय जोर लगाने अथवा पेचिश, आंव के समय जोर लगाना है | कब्ज की स्थिति में  मल अधिक सूखा (शुष्क)  एवं कठोर हो जाता है परिणामस्वरूप मलत्याग के समय अधिक जोर लगाना पड़ता है। जिससे गुदा की त्वचा भी मल के साथ मलद्वार से बाहर निकल आती है। इसे गुदाभ्रंश (कांच निकलना) कहते हैं। बच्चों में मलद्वार की त्वचा अधिक कोमल होती है जिससे वे वयस्कों की अपेक्षा जल्दी इस रोग से पीड़ित हो जाते हैं |

उपचार


बबूल :


10 ग्राम बबूल की छाल  को आधा लीटर पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े से गुदाद्वार को धोने से गुदाभ्रंश दूर होता है।

अमरूद :


50 ग्राम अमरूद के पेड़ की छाल + 50 ग्राम अमरूद की जड़  + 50 ग्राम अमरूद के पत्ते सब को मिलाकर एवं कूटकर 400 मिलीलीटर पानी में मिलाकर उबाल लें। जब पानी आधा रह जाये तब इसे छानकर सहने लायक गर्म रहने पर गुदा को धोऐं। इससे गुदाभ्रंश ठीक होता है। सिर्फ अमरुद के पत्तों को पीसकर इस पेस्ट को गुदा को अन्दर कर गुदाद्वार पर बांधने से गुदाभ्रंश ठीक हो जाता है |

कालीमिर्च :


5 ग्राम कालीमिर्च एवं 10 ग्राम  भुना हुआ जीरा दोनों को मिलाकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण आधा  चम्मच की मात्रा में छाछ के साथ प्रतिदिन प्रातः-सायं लेने से गुदाभ्रंश होना बन्द हो जाता है।

अनार :


100 ग्राम अनार के पत्तों को 1 लीटर पानी में उबालें। गुनगुना रहने पर इस पानी को छानकर प्रतिदिन  3 से 4 बार गुदा को धोने से गुदाभ्रश में लाभ मिलता है।

कमल :


छोटे बच्चों को आंव या पेचिश हो एवं कांच निकल रही हो तो कमल के पत्ते + मिश्री को समभाग लेकर चूर्ण बना ले | 1 - 1 चम्मच चूर्ण को दिन में 3 बार सेवन कराने से लाभ होता है।

फिटकरी:


1 ग्राम फिटकरी को 30 मिली. पानी  में घोल लें शौच के बाद मलद्वार को साफ करके फिटकरी वाले इस जल को रुई से गुदा पर लगाएं। इससे गुदाभ्रंश ठीक होता
है।

पपीता :


पपीते के पत्तों को पानी के साथ पीसकर इस पेस्ट को गुदाभ्रंश पर लगाने से गुदाभ्रंश ठीक होता है।

भांग के पत्ते का रस :


भांग के पत्तों का रस गुदाभ्रंश पर लगाने से गुदाभ्रंश में अत्यंत लाभ होता है।

एरण्ड का तेल :


एरण्ड के तेल को हरे रंग की कांच की शीशी में भरकर 1 सप्ताह तक किसी लकड़ी के पाटे पर धूप में रखें। इस सूर्यतप्त तेल को गुदाभ्रंश पर रूई से लगाएं। इससे गुदाभ्रंश में लाभ मिलेगा |

प्याज :


बच्चों को गुदाभ्रंश हो रहा है तो 2 से 4 मिली. प्याज का रस निकालकर  प्रातः-सायं पिलाने से गुदाभ्रंश होना बन्द हो जाता है।

कुटकी:


250 मिग्रा. कुटकी  1 चम्मच शहद के साथ मिलाकर प्रतिदिन प्रातः-सायं चाटने से आंत की शिथिलता दूर होती है एवं गुदाभ्रंश धीरे-धीरे अपने स्थान पर आ जाता है।

परहेज :


गुदाभ्रंश रोग में  मिर्च, मसाला व गर्म पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए।

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इन उपायों से कमर दर्द हो जायेगा गायब !


By- Dr. Kailash Dwivedi

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कारण :

  1. हमेशा ऊंची एड़ी के जूते या सेंडिल पहनना
  2. मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव
  3. गलत तरीके से अधिक वजन उठाना 
  4. गलत तरीके से बैठना

उपचार :


  • रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियां काली न हो जायें) गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें।
  • नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। इसके बाद पेट के बल लेट जाएं। दर्द के स्थान पर तौलिये से भाप लें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है।
  • कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। इस नमक को थोड़े मोटे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। कमर पर इस पोटली से सेक करने से भी दर्द से आराम मिलता है।
  • अजवाइन को तवे के पर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें। ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। इसके नियमित सेवन से कमर दर्द में लाभ मिलता है।
  • अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम न करें। हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें।
  • नर्म गद्देदार सीटों से परहेज करना चाहिए। कमर दर्द के रोगियों को थोड़ा सख्ते बिस्तर बिछाकर सोना चाहिए।
  • योग भी कमर दर्द में लाभ पहुंचाता है। भुजंगासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपादासन, श्वसन आदि कुछ ऐसे योगासन हैं जो की कमर दर्द में काफी लाभ पहुंचाते हैं। कमर दर्द के योगासनों को योगगुरु की देख रेख में ही करने चाहिए।
  • कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, इसलिए कैल्शियमयुक्त चीजों का सेवन करें।
  • कमर दर्द के लिए व्यायाम भी करना चाहिए। सैर करना, तैरना या साइकिल चलाना सुरक्षित व्यायाम हैं। तैराकी जहां वजन तो कम करती है, वहीं यह कमर के लिए भी लाभकारी है। साइकिल चलाते समय कमर सीधी रखनी चाहिए। व्यायाम करने से मांसपेशियों को ताकत मिलेगी तथा वजन भी नहीं बढ़ेगा।
  • कमर दर्द में भारी वजन उठाते समय या जमीन से किसी भी चीज को उठाते समय कमर के बल ना झुकें बल्कि पहले घुटने मोड़कर नीचे झुकें और जब हाथ नीचे वस्तु तक पहुंच जाए तो उसे उठाकर घुटने को सीधा करते हुए खड़े हो जाएं।
  • कार चलाते वक्त सीट सख्त होनी चाहिए, बैठने का पोश्चर भी सही रखें और कार ड्राइव करते समय सीट बेल्ट टाइट कर लें।
  • ऑफिस में काम करते समय कभी भी पीठ के सहारे न बैठें। अपनी पीठ को कुर्सी पर इस तरह टिकाएं कि यह हमेशा सीधी रहे। गर्दन को सीधा रखने के लिए कुर्सी में पीछे की ओर मोटा तौलिया मोड़ कर लगाया जा सकता है।
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Friday, January 20

इन सरल उपायों से आप निजात पा सकते हैं मुहांसो से !




By- Dr. Kailash Dwivedi

युवावस्था में हार्मोन्स के बदलाव के कारण मुंह पर कील मुहांसे निकल जाते हैं जिनके दाग धब्बे भी चेहरे पर पड़ जाते हैं | इन उपायों से आप लाभ प्राप्त कर सकते हैं |

चिरौंजी


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गाय के ताजे दूध में चिरौंजी पीसकर इसका लेप बनाकर चेहरे पर लगाएं और सूखने पर धो लें, इससे एक्ने की समस्या से निजात मिलेगी।






जायफल

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मुंहासों को दूर करने के लिए जायफल भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए साफ पत्थर पर पानी डालकर जायफल घिसकर लेप को कील-मुंहासों पर लगाएं।










चमेली का तेल


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चमेली के तेल को सुहागा में मिलाकर रात को सोते समय चेहरे पर लगाकर मसलें। सुबह बेसन को पानी से गीला कर गाढ़ा-गाढ़ा चेहरे पर लगाकर मसलें और पानी से चेहरा धो डालें। इससे चेहरे पर होने वाली जलन पर बहुत आराम मिलेगा।







मसूर की दाल


www.nihsarg.comमसूर की दाल 2 चम्मच लेकर बारीक पीस लें। इसमें थोड़ा सा दूध और घी मिलाकर फेंट लें और पतला-पतला लेप बना लें। इस लेप को मुंहासों पर लगाएं।

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