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Sunday, March 6

ह्रदय की संरचना एवं कार्य - 1

 ह्रदय रक्त परिसंचरण तन्त्र का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है | किसी के भी ह्रदय का पूर्णरूप से कार्य करना बंद होने का अर्थ होता है उसकी मृत्यु हो जाना | आज हम चर्चा करेंगे ह्रदय की संरचना एवं कार्यप्रणाली के विषय में |

  • ह्रदय एक पेशीय,खोखला,संकुचनशील,शंक्वाकार अंग है जो वक्ष में स्टर्नम के पीछे दोनों फेफड़ों के मध्य उतकों के एक भाग जिसे मीडिएस्टिनम कहते हैं कुछ बायीं ओर को हटा हुआ तिरछेपन के साथ स्थित है | बायीं तरफ हटा होने के कारण ह्रदय का एक तिहाई भाग शरीर की मध्यरेखा से दाहिनी ओर एवं दो तिहाई भाग बायीं ओर स्थित रहता है |

  • ह्रदय का उपर का हिस्सा कुछ चौड़ा होता है जो आधार (Base) कहलाता है | यह हिस्सा कुछ दहिनी तरफ झुका होता है |

  • ह्रदय का निचला हिस्सा नुकीला होता है यह शिखर (Apex) कहलाता है | यह थोडा बायीं ओर झुका डायाफ्राम पर स्थित होता है | यह हिस्सा पांचवी एवं छठी बायीं पसलियों के मध्य (इन्टरकॉस्टल) तक पहुँचता है | इसी स्थान पर हाथ रखने से ह्रदय स्पंदन (धड़कन) का आभास मिलता है |

  • ह्रदय का आकार स्वयं की मुट्ठी के आकार का होता है | ह्रदय की औसतन लम्बाई लगभग 12 सेमी. एवं चौड़ाई 9 सेमी. (5x3.5 इंच) होती है |

  • वयस्क व्यक्ति के ह्रदय का वजन लगभग 250 से 390 ग्राम एवं स्त्रियों में 200 से 275 ग्राम के बीच होता है |


ह्रदय की संरचना ( Structure of the Heart)


ह्रदय भित्ति का निर्माण तीन परतों से होता है –

  1. पेरीकार्डियम (Pericardium)

  2. मायोकार्डियम (Myocardium)

  3. एण्डोकार्डियम (Endocardium)


पेरीकार्डियम (Pericardium) :


पेरीकार्डियम या हृद्यावरण दो कोशों का बना होता है | बाह्य कोश तंतमय उतकों (Fibrous Tissue) का बना होता है | यह अन्दर से सीरमी कला (Serous membrane) की दोहरी परत की निरंतरता में होता है | बाह्य तंतुमय कोश ऊपर ह्रदय की बड़ी रक्तवाहिकाओं के टुनिका एडवेंटिशिया (Tunica edventitia) के साथ निरंतरता में रहता है तथा नीचे डायाफ्राम से सटा रहता है | तंतुमय एवं अप्रत्यास्थ (Inelastic) प्रकृति होने के कारण यह ह्रदय के अत्यधिक फैलाव (Overdistension) को रोकता है | सीरमी कला की बाह्य परत, पार्श्विक पेरीकार्डियम (Parietal Pericardium) तंतुमय कोश को आस्तारित करती है | आंतरिक परत, अंतरांगी पेरीकार्डियम (Visceral Pericardium) अथवा एपिकार्डियम (Epicardium) जो पार्श्विक पेरीकार्डियम के निरंतरता में होती है, ह्रदय पेशी से चिपटी होती है |

सीरमी कला में चपटी उपकला कोशिकाओं का समावेश रहता है | यह अंतरांगी एवं पार्श्विक परतों के बीच के स्थान में एक सीरमी द्रव (Serous fluid) स्रवित करती हैं जो ह्रदय स्पन्द के दौरान दोनों परतों के बीच घर्षण को रोकता है जिससे ह्रदय स्वच्छन्दतापूर्वक गतिशील बना रहता हैं |

मायोकार्डियम (Myocardium) :


यह एक विशेष प्रकार की ह्रदयपेशी (Cardiac muscle) की बनी होती है,जो केवल ह्रदय में ही पायी जाती है | इसमें विशेष प्रकार के तंतु (Fibers) रहते हैं जो अनैच्छिक वर्ग के होते हैं | मायोकार्डियम की मोटाई भिन्न-भिन्न होती है | यह शिखर (Apex) पर सबसे मोटी होती है एवं आधार (Base) की ओर पतली होती चली जाती है | यह बाएं निलय (Left Ventricle) में अधिक मोटी रहती है क्योंकि यहाँ पर इसे अधिक कार्य करना पड़ता है जबकि दाहिने निलय (Right Ventricle) में पतली रहती है, क्योकि यहाँ इसे सिर्फ फेफड़ों में रक्त प्रवाहित करना होता है | यह अलिन्दों (Atriums) में बहुत पतली रहती है |

एण्डोकार्डियम (Endocardium) :


एण्डोकार्डियम ह्रदय में सबसे भीतर की एक पतली, चिकनी झिलमिलाती कोमल कला (membrane) है | यह चपटी उपकला कोशिकाओं से निर्मित है जो एण्डोथीलियम के साथ निरंतर रहकर रक्त वाहिकाओं के आन्तरिक स्तर में विलीन हो जाती है | एण्डोकार्डियम ह्रदय के चारों कक्षों एवं कपाटों (Valves) को आच्छादित किये रहती है |

                                       ...........अगले लेख में पढ़ें ह्रदय के कक्ष (Chambers of the Heart)

Monday, November 16

शरीर का सूक्ष्मतम रूप कोशिका (Cell) - 1

कोशिका शरीर का सूक्ष्मतम रूप है, यह एक ऐसी रचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है जो स्वतंत्र रूप से जीवन की क्रियाओं को संचालित करने की क्षमता रखती है | इन्ही असंख्य कोशिकाओं से मिलकर बना है मानव शरीर | इनका आकार शरीर के अंगों के अनुसार भिन्न हो सकता है परन्तु मूलभूत संरचना समान रहती है | कोशिका की रचना के अंतर्गत कई सम्मिलित अंग हैं, कोशिका ( Cell ) इन्ही अंगों (Bodies) का सामूहिक स्वरुप है |


कोशिका की संरचना   Structure of cell  :



प्रत्येक कोशिका के तीन भाग होते हैं -


  1. कोशिका कला (Cell membrane)

  2. कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) :

  3. केन्द्रक (Nucleus) :



1. कोशिका कला (Cell membrane) : 



कोशिका कला एक पतली झिल्ली की भांति होती है जो कोशिका की सबसे बाहरी परत को बनाती है इसे प्लाज्मा मेम्ब्रेन भी कहा जाता है | यह झिल्ली वसा (Lipid) , प्रोटीन एवं लवण की दो परतों से युक्त होती है |कोशिका कला की उत्पत्ति कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) से होती है | कोशिका कला ही दो कोशिकाओं को एक-दूसरे से अलग करती है परन्तु यह इतनी सूक्ष्म होती है कि दो कोशिकाओं के मध्य केवल एक भित्ति ही दिखाई देती है | यह पारदर्शी एवं अर्द्धपारगम्य (Semi permeable) होती है |

कोशिका कला के कार्य :




  • बाह्य उत्तेजनाओं को ग्रहण करना |

  • कोशिका की आंतरिक संरचना की रक्षा करना |

  • कोशिका द्वारा रक्त से पोषण एवं आक्सीजन ग्रहण करने एवं कार्बनडाई आक्साईड व विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में पूर्ण सहयोग प्रदान करना |

  • कोशिका में आने व जाने वाले पदार्थ जैसे - जल, ग्लूकोज, आक्सीजन, कार्बनडाई आक्साईड आदि पर कोशिका कला का पूर्ण नियंत्रण रहता है |

  • जीवद्रव्य की रासायनिक संरचना को बनाये रखने में सहायक है |



2. कोशिकाद्रव्य  (Cytoplasm) :



कोशिका के अन्दर केन्द्रक (Nucleus) के अतिरिक्त अन्य सम्पूर्ण भाग को कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) कहते हैं | यह कोशिका के जीवन का आधार है |

कोशिका की सभी जैविक क्रियाएं - श्वसन, वृद्धि, गतिशीलता, पाचन, उत्सर्जन, चापपचय, उत्तेजनशीलता एवं प्रजनन आदि साईटोप्लाज्म पर ही निर्भर करती हैं | कोशिका को जीवित रखने के लिए कोशिकद्रव्य में तीव्र गति से अनेक रासायनिक क्रियाएं होती हैं | मनुष्य के जीवित अवस्था में कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) की रचना देखना असंभव है | यदि इसका विश्लेषण करने का प्रयत्न किया जाये तो इसमें रासायनिक परिवर्तन होकर यह नष्ट हो जाता है | कोशिकद्रव्य के नष्ट होने से समस्त जैविक क्रियाएं रुक जाती हैं परिणामस्वरूप व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है |कोशिकद्रव्य अपनी दशा परिवर्तित करने की क्षमता रखता है यही कारण है कि इसकी रचना के विषय में वैज्ञानिकों में मतभिन्नता है | अधिकांश वैज्ञानिकों ने कोशिकद्रव्य की रचना जालयुक्त बताई है | जीव वैज्ञानिकों के अनुसार कोशिकद्रव्य में सूत्रों का जाल फैला रहता है, जिससे कोष्ठों (Vacuoles) के भीतर एक स्वच्छ समांशी पदार्थ भरा होता है | जाल की रचना करने वाला पदार्थ जालकद्रव्य (Spongiplasm) तथा कोष्ठों में पाया जाने वाला पदार्थ स्वच्छद्रव्य (Hyaloplasm) कहलाता है | इसके सूक्ष्म कण (Tiny particles) बराबर ब्राउनियन (Brawnian movement) गति से गतिमान रहते हैं |

साईटोप्लाज्म में कार्बनिक पदार्थ (Organic matters)- प्रोटीन,घुलनशील कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज,माल्टोज,सुक्रोज आदि),  अघुलनशील कार्बोहाइड्रेट स्टार्च ( ग्लाइकोजन व सेल्युलोज) एवं वसा भी होती है | अकार्बनिक पदार्थ - (Inorganic matters) (कैल्शियम,फास्फेट,क्लोराइड,सोडीयम,पोटैशियम) पाए जाते हैं | इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के विटमिन एवं एंजाइम भी होते हैं |

यह सभी पदार्थ साईटोप्लाज्म के अजीवित अंग हैं जिन्हें निर्जिवास द्रव्य (Cytoplasmic inclusions) कहा जाता है |

Sunday, October 18

जानें शरीर के 8 प्रमुख संस्थानों के बारे में

शरीर के वे भाग जो किसी कार्य विशेष को करते हैं उन्हें अंग या अवयव कहा जाता है | जब अनेक अंग मिलकर शरीर के किसी विशेष कार्य को करते हैं तो उन क्रियाओं के कार्य समूह को संस्थान (System) कहा जाता है | हमारे शरीर में मुख्यतः आठ संस्थान हैं -

female skeletonअस्थि संस्थान अथवा कंकाल तन्त्र  : (Bony or Skeleton system)



इस संस्थान के अंतर्गत शरीर कि सभी छोटी-बड़ी हड्डियाँ सम्मिलित हैं | यह संस्थान शरीर को आधार,आकार एवं दृढ़ता प्रदान करता है |

 




 

Muscular system

पेशी तन्त्र अथवा मांस संस्थान : (Muscular system) 



पेशी संस्थान शरीर के विभिन्न अंगों को गति प्रदान करता है | इसके अंतर्गत शरीर की पेशियाँ आती  हैं |

 

 

 



परिवहन तन्त्र अथवा रक्तवाहक संस्थान : (Circulatory system)



यह संस्थान ह्रदय एवं रक्तवाहिनियों के माध्यम से सम्पूर्ण शरीर में रक्त संचरण (Blood circulation) का कार्य करता है |

 




Respiratory system

श्वसन तन्त्र  : (Respiratory system)



यह संस्थान नासिका,श्वासनली एवं फेफड़ों के सहयोग से श्वास-प्रश्वास के कार्य को सम्पादित करता है |

 




digestive system

आहार तन्त्र अथवा पाचन संस्थान : (Digestive system)  



इस संस्थान के अंतर्गत भोजन का पाचन एवं अवशोषण होता है | इसके अंतर्गत मुख,ग्रासनली,आमाशय,एवं छोटी व बड़ी आंत सम्मिलित रूप से कार्य करती है |

 




Reproductive system

प्रजनन तन्त्र अथवा उत्पादक संस्थान (Reproductive system)



प्रजनन तन्त्र के माध्यम से संतानोत्पत्ति का कार्य होता है | इसके अंतर्गत योनि, शिश्न,अंडकोश आदि जनन अंग सम्मिलित हैं |

 




Excretory system

उत्सर्जन तन्त्र अथवा मूत्र एवं मल त्याग संस्थान (Excretory system)



यह संस्थान शरीर के लिए त्याज्य (अनुपयोगी) पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य करता है | इसके अंतर्गत गुर्दे, शिश्न, गुदा आदि मल-मूत्र निकालने वाले अंग सम्मिलित हैं |

 




Nervous System

तन्त्रिका तन्त्र अथवा वातनाड़ी संस्थान : (Nervous system)



तन्त्रिका तन्त्र का प्रमुख कार्य शरीर के विभिन्न कार्यों पर नियंत्रण एवं बाह्य वस्तुओं का शरीर को ज्ञान कराना होता है | इसके अंतर्गत मस्तिष्क, रीढ़, रज्जू, तथा तंत्रिकाएं आती हैं |