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Thursday, February 9

हर्पीस जोस्टर रोग के लक्षण एवं उपचार


. By- Dr. Kailash Dwivedi

हर्पीस जोस्टर को शिन्गल्स के नाम से भी जाना जाता है। यह चिकनपॉक्स की उत्पत्ति करने वाले वेरिसेला ज़ोस्टर वायरस द्वारा होता है।  इस रोग में त्वचा पर दर्द एवं घावयुक्त  दाने उत्पन्न हो जाते हैं । सामान्यतः हर्पीस ज़ोस्टर 2 से 3 सप्ताह में ठीक हो जाता है। यदि इसे अधिक दिनों तक नज़रअंदाज किया जाए तो रोगी को सर्पेटिक न्यूराल्जिया जैसी गंभीर परेशानी हो सकती है फलस्वरूप नसों में दर्द की शिकायत हो सकती है। इस स्थिति को पोस्ट हर्पेटिक न्यूराल्जिया कहा जाता है |

कारण :

शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना |
लंबे समय तक स्टेरॉयड्स जैसे प्रेडनिसोन जैसी दवाइयों का सेवन करना |

लक्षण :


  • शरीर के एक तरफ की त्वचा पर पानी वाले दाने होना
  • त्वचा में खुजली या दर्द या जलन या सुन्नपन या झनझनाहट होना 
  • त्वचा बेहद संवेदनशील हो जाना
  • दानों के निकलने के पहले दर्द होना तत्पश्चात उस जगह की त्वचा पर लाल-लाल फुंसियां होना
  •  बुखार, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द, थकान आदि की शिकायत 
  • फुंसियों में दर्द होना इस बीमारी का प्रमुख लक्षण है
  • प्रभावित क्षेत्र के आसपास जलन, फड़कन या खुजली होना
  • आँखों में लालिमा, उत्तेजना या पानी होना
  • धुंधला दिखाई देना
  • सिरदर्द होना 


उपचार :


  • प्रतिदिन ताज़ी गिलोय का रस का सेवन करें |
  • प्रातः पत्तागोभी का जूस पियें |
  • घाव या फफोले को ढीली, ना चिपकने वाली, जीवाणुरहित पट्टियों से बांधें।
  • रोगग्रस्त अंग पर ठंडी, गीली पट्टियाँ या बर्फ के पेक्स लगाएँ या गुनगुने पानी में डुबोकर रखें।
  • अधिक तापमान से बचें अन्यथा खुजली बढ़ सकती है |
  • ढीले वस्त्र पहनें।


आहार चिकित्सा :

अंकुरित अन्न, पत्तागोभी, फूलगोभी आदि लें, इनमें इन्डोल-3-कार्बिनोल होता हैं, जो हर्पीस वायरस की प्रतिकृति बनने से रोकता है। मूंगफली, चॉकलेट्स, बादाम, चीनी एवं रिफाइंड से पूर्णतया परहेज रखें |

सावधानियां :

  • घाव को खुरचे नहीं |
  • गंभीर स्थिति में तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें |
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