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Friday, March 6

गिलोय द्वारा त्वचा रोगों का निवारण




विभिन्न भाषाओं में नाम :
                      हिन्दी-       गिलोय
                      अंग्रेजी-      गुलाचा
                      संस्कृत-     गुडूची
                      मराठी-      गुलबेल
                      बंगाली-     गुलंच
                      फारसी-     गलोय
                      गुजराती-    गलो
                      तेलगू-       तियातिज
                      अरबी-      गिलाइ
                      लैटिन-      टिनोस्पोरा कोर्डिफोलिया
रंग: - गिलोय हरे रंग की होती है।
स्वाद: - गिलोय खाने में तीखी होती है।
स्वरूप: - गिलोय एक प्रकार की बेल होती है जो बहुत लम्बी होती है। इसके पत्ते पान के पत्तों के समान होते हैं। इसके फूल छोटे-छोटे गुच्छों में लगते हैं। इसके फल मटर के दाने के जैसे होते हैं।
प्रकृति: - गिलोय की प्रकृति गर्म होती है।
मात्रा: - गिलोय की 20 ग्राम मात्रा में सेवन कर सकते हैं।
गुण: - गिलोय पुरानी पैत्तिक और रक्तविकार वाले बुखारों का ठीक कर सकती है। यह खांसी, पीलिया, उल्टी और बेहोशीपन को दूर करने के लिए लाभकारी है। यह कफ को छांटता है। धातु को पुष्ट करता है। भूख को खोलता है। वीर्य को पैदा करता है तथा उसे गाढा करता है, यह मल का अवरोध करती है तथा दिल को बलवान बनाती है। गिलोय गुण में हल्की, चिकनी, प्रकृति में गर्म, पकने पर मीठी, स्वाद में तीखी, कड़वी, खाने में स्वादिष्ट, भारी, शक्ति तथा भूख को बढ़ाने वाली, वात-पित्त और कफ को नष्ट करने वाली, खून को साफ करने वाली, धातु को बढ़ाने वाली, प्यास, जलन, ज्वर, वमन, पेचिश, खांसी, बवासीर, गठिया, पथरी, प्रमेह, नेत्र, केश और चर्म रोग, अम्लपित्त, पेट के रोग, मूत्रावरोध (पेशाब का रुकना), मधुमेह, कृमि और क्षय (टी.बी.) रोग आदि को ठीक करने में लाभकारी है।
गिलोय का उपयोग:
                      घी के साथ गिलोया का सेवन करने से वात रोग नष्ट होता है।
                      गुड़ के साथ गिलोय का सेवन करने से कब्ज दूर होती है।
                      खाण्ड के साथ गिलोया का सेवन करने से पित्त दूर होती है।
                      शहद के साथ गिलोय का सेवन करने से कफ की शिकायत दूर होती है।
                      रेण्डी के तेल के साथ गिलोय का उपयोग करने से गैस दूर होती है।
                      सोंठ के साथ गिलोय का उपयोग करने से गठिया रोग ठीक होता है।
        
 गिलोय में गिलोइन नामक कड़वा ग्लूकोसाइड, वसा अल्कोहल ग्लिस्टेराल, बर्बेरिन एल्केलाइड, अनेक प्रकार की वसा अम्ल एवं उड़नशील तेल पाये जाते हैं। पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फास्फोरस और तने में स्टार्च भी मिलता है। कई प्रकार के परीक्षणों से ज्ञात हुआ की वायरस पर गिलोय का प्राणघातक असर होता है। इसमें सोडियम सेलिसिलेट होने के कारण से अधिक मात्रा में दर्द निवारक गुण पाये जाते हैं। यह क्षय रोग के जीवाणुओं की वृद्धि को रोकती है। यह इन्सुलिन की उत्पत्ति को बढ़ाकर ग्लूकोज का पाचन करना तथा रोग के संक्रमणों को रोकने का कार्य करती है।


रक्तपित्त (खूनी पित्त):
         10-10 ग्राम मुलेठी, गिलोय, और मुनक्का को लेकर 500 मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं। इस काढ़े को 1 कप रोजाना 2-3 बार पीने से रक्तपित के रोग में लाभ मिलता है।
खुजली :
         हल्दी को गिलोय के पत्तों के रस के साथ पीसकर खुजली वाले अंगों पर लगाने और 3 चम्मच गिलोय का रस और 1 चम्मच शहद को मिलाकर सुबह-शाम पीने से खुजली पूरी तरह से खत्म हो जाती है।

         बवासीर, कुष्ठ और पीलिया:
7 से 14 मिलीलीटर गिलोय के तने का ताजा रस शहद के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से बवासीर, कोढ़ और पीलिया का रोग ठीक हो जाता है।
चेहरे के दाग-धब्बे:
गिलोय की बेल पर लगे फलों को पीसकर चेहरे पर मलने से चेहरे के मुंहासे, फोड़े-फुंसियां और झाइयां दूर हो जाती है।
शीतपित्त (खूनी पित्त):
                      10 से 20 ग्राम गिलोय के रस में बावची को पीसकर लेप बना लें। इस लेप को खूनी पित्त के दानों पर लगाने तथा मालिश करने से शीतपित्त का रोग ठीक हो जाता है।
घाव (व्रण):
                      4 ग्राम से 6 ग्राम गिलोय का काढ़ा प्रतिदिन पीने से घाव ठीक हो जाता है।
उपदंश (फिरंग):
                      गिलोय के काढ़े में 10-20 मिलीलीटर अरण्डी का तेल मिलाकर पीने से उपदंश रोग में लाभ मिलता है। इसको खाने से खून साफ होता है और गठिया-रोग भी ठीक हो जाता है।
कुष्ठ (कोढ़):
                      100 मिलीलीटर बिल्कुल साफ गिलोय का रस और 10 ग्राम अनन्तमूल का चूर्ण 1 लीटर उबलते हुए पानी में मिलाकर किसी बंद बर्तन में 2 घंटे के लिये रखकर छोड़ दें। 2 घंटे के बाद इसे बर्तन में से निकालकर मसलकर छान लें। इसमें से 50 से 100 ग्राम की मात्रा प्रतिदिन दिन में 3 बार सेवन करने से खून साफ होकर कुष्ठ (कोढ़) रोग ठीक हो जाता है।
सफेद दाग:
                      सफेद दाग के रोग में 10 से 20 मिलीलीटर गिलोय के रस को रोजाना 2-3 बार कुछ महीनों तक सफेद दाग के स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।

Saturday, November 25

शरीर में कैसी भी गाँठ हो, ख़त्म कर देता है यह नुस्खा !





By- Dr. Kailash Dwivedi

शरीर के किसी भी अंग में उत्पन्न हुयी गाँठ साधारण गाँठ से लेकर कैंसर तक हो सकती हैं। ठीक न होने वाली असामान्य गांठ अथवा आंतरिक या बाह्य रक्तस्राव कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि सभी गांठे कैंसर ही हों। परन्तु फिर भी इस सम्बन्ध में सावधानी रखते हुए समय से इसकी जाँच एवं उपचार बहुत आवश्यक है | साधारण गांठे भले ही कैंसर की न हों लेकिन इनका भी इलाज आवश्यक होता है। उपचार के अभाव में ये असाध्य रूप ले लेती हैं, परिणाम स्वरूप उनका उपचार लंबा और जटिल हो जाता हैएवं इनका कैंसर में परिवर्तित होने की सम्भावना भी बढ़ जाती है | इस लेख में जानिये एक ऐसे नुस्खे के विषय में जिससे कैसी भी गांठ हो, ठीक हो सकती है | यह औषधि स्वाद में कड़वी होती है परंतु अत्यधिक प्रभावी है। जब तक गाँठ पूरी तरह से समाप्त न हो जाये इस औषधि को बंद नहीं करना चाहिए |

निम्न गांठो में प्रभावी है यह नुस्खा :



  • गर्भाशय की गांठ
  • स्त्री पुरुष के स्तनो की गांठ
  • टॉन्सिल 
  • गले की गाँठ  (बढ़ी हुयी थायराइड ग्लैण्ड -Goiter) 
  • फैट की गांठ (LIPOMA)
  • प्रोस्टेट की गांठ 
  • जांघ के पास की गांठ
  • काँख की गांठ
  • गले के बाहर की गांठ

आवश्यक सामग्री :

पंसारी के यहाँ से निम्न औषधि ले लें -

  • कचनार की शाखा की ताजी छाल 25-30 ग्राम (यदि सूखी छाल हो तो - 15 ग्राम )
  • गोरखमुंडी पाउडर  - 1 चम्मच 

तैयार करने की विधि :

कचनार की छाल को कूटकर  1 गिलास पानी मे उबाले। 2 मिनट तक उबालने के पश्चात् इसमे पिसी हुयी गोरखमुंडी 1 चम्मच की मात्रा में मिला दें | इस मिश्रण को 1 मिनट तक उबालकर छान लें ।

सेवन विधि :

प्रतिदिन प्रातः खाली पेट इस काढ़े को बनाकर गुनगुना रह जाये तब पियें । गाँठ पुरानी होने की स्थिति में इस काढ़े को प्रातः-सायं दोनों समय ले।







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Saturday, March 4

रतनजोत के इस प्रयोग से बाल हो जायेंगे काले !




By- Dr. Kailash Dwivedi
जेट्रोफा की जड़ से एक महीन लाल रंगने वाला पदार्थ मिलता है जिसका प्रयोग खाने,पीने की चीज़ों को लाल रंगने के लिए होता है, भारत के रोग़न जोश व्यंजन की तरी का लाल रंग अक्सर इसी से बनाया जाता है। इसके अलावा दवाईयों, तेलों, शराब, इत्याद में भी इसके लाल रंग का इस्तेमाल होता है। इसे रतनजोत भी कहते हैं परन्तु वास्तव में 'रतनजोत' नाम इस पौधे की जड़ से निकलने वाले रंग का है | जेट्रोफा से बायो डीजल बनता है | चिकित्सकीय दृष्टि से यह कई रोगों की रामबाण औषधि है। इस लेख में पढ़िए सफ़ेद बालों को प्राकृतिक रूप से काला करने का एक बेहद असरकारी प्रयोग |

आवश्यक सामग्री :

रतनजोत की ताज़ी जड़  : 100 ग्राम
मेंहदी के पत्ते :                 100 ग्राम
जलभांगर के पत्ते :           100 ग्राम
आम की गुठलियां :          100 ग्राम
सरसों का तेल :                1 किलोग्राम

बनाने की विधि :

उपर्युक्त सभी सामग्री (सरसों के तेल को छोडकर) आपस में मिलाकर कूट लें | जब यह अच्छे से कुट जाये तो इसे निचोड़ लें | तत्पश्चात इस रस को 1 किलो सरसों के तेल में इतना उबाल ले कि इसका पानी खत्म हो जाये और केवल तेल बचे | ठंडा होने पर इसे छानकर कांच की शीशी में भरकर रख लें | इस तेल को प्रतिदिन सिर पर लगाने से बाल काले हो जाते है | 
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Tuesday, January 31

यह प्रयोग सभी तरह के वात दर्द को कर देगा चुटकियों में गायब !



. By- Dr. Kailash Dwivedi

जानिए एक अनुभूत एवं अदभुत तेल बानाने की विधि जो जोड़ों के दर्द, घुटनो के दर्द, कंधे की जकड़न , साइटिका, कमर दर्द आदि को कर देगा चुटकियों में गायब।

आवश्यक सामग्री :


  • सरसों या तिल का तेल :  500 ग्राम
  • दालचीनी  :                     25 ग्राम
  • कायफल की छाल  :      250 ग्राम
  • कपूर :                          5 टिकिया


कायफल :

कायफल की छाल देखने मे गहरे लाल रंग की खुरदरी होती है | यह लगभग 2 इंच के टुकड़ों मे मिलती है। यह जड़ी बूटी बेचने वाली दुकानों पर आसानी से मिल जाता है। तेल बनाने के लिए कायफल की छाल को कूट कर बारीक पीस लेना चाहिए।



तेल बनाने की विधि : 


सर्वप्रथम लोहे की कड़ाही मे धीमी आंच पर सरसों या तिल का तेल गर्म करें। जब तेल गर्म हो जाए तब थोड़ा थोड़ा करके कायफल छाल का चूर्ण डालते जाएँ। कायफल छाल का चूर्ण डालने के पश्चात् दालचीनी का पाउडर डालें। जब सारा चूर्ण खत्म हो जाए तब कड़ाही के नीचे से आग बंद कर दे।
ठंडा हो जाने पर इस तेल को एक महीन सूती कपड़े छान ले। छानने के बाद इस तेल को हल्का गर्म कर इसमें  5 टिकिया कपूर का पाउडर मिला दे | इस तेल को कांच की बोतल मे रख ले। कुछ दिन मे तेल मे से लाल रंग का पदार्ध नीचे बैठ जाएगा। इसके बाद ऊपर के साफ़ तेल को दूसरी शीशी मे भर लें एवं 25 ग्राम दालचीनी का चूर्ण और मिला लें |
तेल छानने के बाद जो लाल रंग का पदार्थ बच जाए उसे फेंके नहीं बल्कि सुरक्षित रख लें |

प्रयोग विधि :

तेल को हल्का गर्म करके दर्द वाले अंग कम दबाव के साथ धीरे धीरे मालिश करें। इसके बाद लाल रंग वाले पदार्थ को कपड़े की पोटली में भरकर पोटली को तवे पर गर्म करके इस पोटली से दर्दयुक्त अंग की 10 मिनट तक सिंकाई करें |

सावधानी :

तेल मालिश एवं सेक के 2 घंटे बाद तक ठंडा पानी न पियें।


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Monday, January 30

वर्षों पुराना गठिया, सायटिका दूर करता है - हरसिंगार !



By- Dr. Kailash Dwivedi

विभिन्न भाषाओँ में नाम : 


वैज्ञानिक नाम - निक्टेन्थिस आर्बोर्ट्रिस्टिस

हिन्दी -  हरसिंगार, परजा, पारिजात

संस्कृत -  पारिजात

उर्दू -  गुलजाफरी

अँग्रेजी -  कोरल जेस्मिन

मराठी -  पारिजातक या प्राजक्ता

गुजराती -  हरशणगार

तेलुगू -  पारिजातमु

तमिल -  पवलमल्लिकै, मज्जपु

बंगाली -  शेफाली, शिउली, , पगडमल्लै

कन्नड़ - पारिजात

मलयालम -  पारिजातकोय, पविझमल्लि



हरसिंगार को  झाड़ीनुमा या छोटा पेड़ कहा जा सकता है। इसके वृक्ष की ऊँचाई लगभग दस मीटर तक होती है | इसके पेड़ की छाल जगह जगह परत दार सलेटी से रंग की होती है एवं पत्तियाँ हल्की रोयेंदार छह से बारह सेमी लंबी और ढाई से.मी. चौड़ी होती हैं। हरसिंगार के पेड़ पर रात्रि में खुशबूदार छोटे छोटे सफ़ेद फूल आते है, और एवं फूल की डंडी नारंगी रंग की होती है, प्रातःकाल तक यह फूल स्वतः ही जमीन पर गिर जाते है। इसके फूल अगस्त से दिसम्बर तक आते हैं |

हरसिंगार के औषधीय प्रयोग :


सायटिका (गृध्रसी ) :


दो कप पानी में हरसिंगार के 8-10 पत्तों के छोटे-छोटे टुकड़े करके डाल लें, इस पानी को धीमी आंच पर आधा रह जाने तक पकाएं | ठंडा हो जाने पर इसे छानकर पियें | इस काढ़े को दिन में दो बार - प्रातः खाली पेट एवं सायं भोजन के एक डेढ़ घंटा पहले पियें | इस प्रयोग से सायटिका रोग जड़ से चला जाता है। इस काढ़े का प्रयोग कम से कम 8 दिन तक अवश्य करना चाहिए |

गठिया रोग :


हरसिंगार के पांच पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लें, इस पेस्ट को एक गिलास पानी में मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं | जब पानी आधा रह जाये तब इसे पीने लायक ठंडा करके पियें | इस काढ़े का सेवन प्रातः खाली पेट पियें | इससे वर्षों पुराना गठिया के दर्द में भी निश्चित रूप से लाभ होता है।

बबासीर :


बबासीर के लिए हरसिंगार के बीज रामबाण औषधि माने गए हैं इसके एक बीज का सेवन प्रतिदिन किया जाये तो बवासीर रोग ठीक हो जाता है। यदि गुदाद्वार में सूजन या मस्से हों तो हरसिंगार के बीजों का लेप बनाकर गुदा पर लगाने से लाभ होता है।

गंजापन :


हरसिंगार के बीजों को पानी के साथ पीसकर पेस्ट बना लें | इस पेस्ट को 30 मिनट तक गंजे सिर पर लगायें | इस प्रयोग को लगातार 21 दिन तक करने से गंजेपन में अत्याधिक लाभ होता है |

ज्वर :


इस काढ़े को विभिन्न ज्वर जैसे - चिकनगुनिया का बुखार, डेंगू फीवर, दिमागी बुखार आदि सभी प्रकार के ज्वर में अत्यंत लाभ मिलता।

मलेरिया :


मलेरिया बुखार हो तो 2 चम्मच हरसिंगार के पत्ते का रस + 2 चम्मच अदरक का रस + 2 चम्मच शहद आपस में मिलाकर प्रातः सायं सेवन करने से मलेरिया के बुखार में अत्यधिक लाभ होता है |

स्त्री रोग :


हरसिंगार की 7 कोंपलों (नयी पत्तियों) को पाँच काली मिर्च के साथ पीसकर प्रातः खाली पेट सेवन करने से विभिन्न स्त्री रोगों में लाभ मिलता है।

 

त्वचा रोग :


हरसिंगार की पत्तियों को पीसकर त्वचा पर लगाने से त्वचा से सम्बंधित रोगों में लाभ मिलता है | त्वचा रोगों में इसके तेल का प्रयोग भी उपयोगी है |

बालों की रूसी :


50 ग्राम हरसिंगार के बीज पीस कर 1 लीटर पानी में मिलाकर बाल धोने से रुसी समाप्त हो जाती है | इसका प्रयोग सप्ताह में 3 बार करें |

पेट के कीड़े :

प्रातः,दोपहर एवं सायंकाल एक चम्मच हरसिंगार के पत्तों के रस में आधा चम्मच शहद मिला कर चाटने पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं | इस प्रयोग को कम से कम तीन दिन तक करना चाहिए |

ह्रदय रोग :


हरसिंगार के फूल हृदय के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं हैं। एक माह तक प्रातः खाली पेट हरसिंगार के 15-20 फूल या फूलों का रस का सेवन हृदय रोग से बचाता है।

स्वास्थ्य रक्षक :


स्वस्थ्य व्यक्ति भी यदि सर्दियों में एक सप्ताह तक हरसिंगार के पत्तों का काढ़ा पियें तो शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढती है एवं शरीर यदि किसी प्रकार का संक्रमण हो रहा है तो वह भी समाप्त हो जाता है |

अस्थमा :


अस्थमा की खांसी में आधा चम्मच हरसिंगार के ताने कि छाल का चूर्ण पान के पत्ते में रखकर चूसने से लाभ मिलता है | इस प्रयोग को दिन में दो बार करना चाहिए |

सूखी खांसी :


हरसिंगार की 2-3 पत्तियों को पीस कर एक चम्मच शहद में मिलाकर सेवन करने से सूखी खाँसी ठीक हो जाती है।

मांसपेशियों का दर्द :


2 चम्मच हरसिंगार के पत्तो का रस एवं 2 चम्मच अदरक का रस आपस में मिलाकर प्रातः खाली पेट पीने से मांसपेशियों का दर्द समाप्त हो जाता है |

सौन्दर्य वर्धक :


हरसिंगार के फूलों का पेस्ट + मैदा को दूध मिलाकर उबटन बना लें, शरीर पर लेप करने के 30 मिनट बाद स्नान कर लें। इस प्रयोग से त्वचा में निखार आता है।

विशेष : आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार वसन्त ऋतु में हरसिंगार के पत्ते गुणहीन रहते हैं अतः इसका प्रयोग वसन्त ऋतु में लाभ नहीं करता।

यदि आप प्राकृतिक चिकित्सक बनना चाहते हैं तो  - पढ़ें,  अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद्,दिल्ली द्वारा संचालित पाठ्यक्रम 
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Saturday, January 28

इस औषधि से बवासीर (Hemorrhoids) ख़त्म होगी सिर्फ एक सप्ताह में !



By- Dr. Kailash Dwivedi

औषधि बनाने की विधि - 1 :

रीठा के छिलके को पीसकर इसके पाउडर में दूध मिला लें | जब इस मिश्रण का पेस्ट जैसा बन जाए तो बेर के बराबर गोलियां बना लें।

सेवन विधि :

प्रतिदिन प्रातः सायं  1-1 गोली छाछ के साथ लें |

औषधि बनाने की विधि - 2 :

रीठा के छिलके को जलाकर भस्म बना लें | इस भस्म (राख) में बराबर मात्रा में पिसा हुआ सफेद कत्था मिलाकर किसी कांच के बर्तन में भरकर रख लें।

सेवन विधि :

आधे से एक ग्राम चूर्ण को प्रतिदिन प्रातः पानी के साथ लें |




औषधि बनाने की विधि - 3 :

रीठे के फल के छिलके को तवे पर भूनकर कोयला बना लें, तत्पश्चात इसमें बराबर मात्रा में पपड़िया कत्था मिलाकर अच्छी तरह से पीसकर कपडे़ से छान लें।

सेवन विधि :

125 मिलीग्राम चूर्ण प्रतिदिन प्रातः-सायं मक्खन या मलाई के साथ 7 दिनों तक सेवन करें। इन सात दिनों में नमक एवं खटाई का सेवन भूलकर भी न करें | इस औषधि से कब्ज,बवासीर की खुजली,बवासीर से खून बहना आदि समाप्त हो जाती है |
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Tuesday, January 10

40 दिन के इस प्रयोग से दूर हो सकती है नपुंसकता !



3 ग्राम बरगद के पेड़ की कोंपले (मुलायम पत्तियां) और 3 ग्राम गूलर के पेड़ की छाल तथा  6 ग्राम मिश्री को पीसकर लुगदी सी बना लें फिर इसे तीन बार मुंह में रखकर चबा लें और ऊपर से 250 ग्राम दूध पी लें। 40 दिन तक खाने से वीर्य बढ़ता है और संभोग से खत्म हुई शक्ति लौट आती है।


अथवा

बरगद के पके फल को छाया में सुखाकर पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को बराबर मात्रा की मिश्री के साथ मिलाकर पीस लें। इसे एक चम्मच की मात्रा में सुबह खाली पेट और सोने से पहले एक कप दूध से नियमित रूप से सेवन करते रहने से कुछ हफ्तों में यौन शक्ति में बहुत लाभ मिलता है




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Wednesday, December 21

जानिये, पालक के गुण



पालक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी सब्जी है। रेतीली जमीन को छोड़कर शेष प्रकार की जमीन पर पालक खेती के लिए अनुकूल रहती है। कच्चा पालक खाने में कड़वा और खारा लगता है, परंतु गुणकारी होता है। दही के साथ कच्चे पालक का रायता बहुत ही स्वादिष्ट और गुणकारी होता है। इसमें कैल्शियम, विटामिन-सी और लौह तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर में पोषक तत्वों की पूर्ति करते हैं।

पालक के गुण :


पालक स्नेहन, रुचिकारी, मूत्रल (अधिक पेशाब का आना) एवं शोथहर (सूजन को हटाने वाला) होती है। पालक में खून बढ़ाने का गुण ज्यादा है यह खून को साफ करता है और हड्डियों को मजबूत बनाता है। पालक बच्चों, गर्भवती और स्तनपान (दूध पिलाने वाली) कराने वाली माताओं के लिए पौष्टिकता से भरपूर खाद्य है। गर्भावस्था के दिनों में महिलाओं को अधिक मात्रा में पालक का सेवन सलाद या सब्जी के रूप में करना चाहिए, पालक से होने वाले बच्चे को पोषक खुराक मिलती है, उसका रंग गोरा होता है तथा वजन भी बढ़ता है। पालक फेफड़े की सड़न को भी दूर करता है। आंतों के रोग, दस्त, संग्रहणी आदि रोगों में भी पालक लाभदायक है। आईये जाने पालक के औषधीय गुणों के बारे में

पायरिया दूर करे पालक:


प्रातःकाल पालक का रस पीने से पायरिया रोग ठीक होता है। इसमें गाजर का रस मिलाकर सेवन करने से मसूढ़ों से खून का आना बंद हो जाता है।

दांतों के दर्द में लाभकारी :

आधा गिलास पानी में आधा गिलास पालक का रस मिलाकर रोजाना कुल्ला करने से दांतों से खून का आना तथा दर्द में लाभ मिलता है।

रक्ताल्पता (खून की कमी):

2 माह तक लगातार आधा गिलास पालक के रस में 1 चम्मच शहद मिलाकर  सेवन करने से शरीर में खून शुद्ध होता है खून की कमी को पूरा करने के लिए 125 मिलीलीटर पालक का रस दिन में 3 तीन बार पीना चाहिए | इससे रक्त की कमी तो पूरी ही होगी साथ ही चेहरे पर लालिमा, शरीर में उत्साह और स्फूर्ति पैदा होकर शक्ति का संचार भी होता है। छिलके वाली मुंग की दाल में पालक मिलाकर खाने से पीलिया, उन्माद , हिस्टीरिया , प्यास, जलन दूर होती है |

गले का दर्द:

यदि गले में दर्द हो रहा हो तो 250 ग्राम पालक के पत्ते लेकर 2 गिलास पानी में डालकर उबाल लें और  उबलने के बाद जब पानी आधा रह जाये तो उसे छान लें और पत्ते भी निचोड़ लें। इस गर्म-गर्म पानी से गरारे करने से गले का दर्द ठीक हो जाता है।

कब्ज भगाए :

प्रतिदिन प्रातः खाली पेट आधा गिलास कच्चे पालक का रस पीने से कब्ज ठीक हो जाती है। आंतों के रोग में पालक की सब्जी खाने से लाभ मिलता है।

श्वास रोग दूर करे  :


  • प्रातः- सायं 3 से 6 ग्राम पालक के बीज का चूर्ण सेवन करने से दमा रोग में अत्यंत लाभ मिलता है |

  • दमा की बीमारी में एक कप पालक के रस में सेंधानमक मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है |

एसिडिटी में पालक  :

पालक एवं परवल को एक साथ उबाल लें। ठंडा होने पर इसमें थोड़ी-सी मात्रा में हरा धनिया और नमक मिलाकर जूस बना लें। इस जूस को अम्लपित्त से पीड़ित रोगी को सुबह-शाम पिलाने से गले व छाती में जलन, डकारे और बैचेनी में लाभ मिलता है।

लिवर की सूजन :

3-6 ग्राम पालक के बीज सुबह-शाम सेवन करने से लिवर की सूजन दूर होती है।

पेशाब की जलन दूर करे पालक :

50 मिलीलीटर पालक के रस में 100 मिलीलीटर नारियल का पानी मिलाकर पीने से पेशाब खुलकर आता है एवं जलन दूर होती है।

मोटापा कम करे पालक का रस :

पालक के 25 मिलीलीटर रस में गाजर का 50 मिलीलीटर रस को मिलाकर पीने से शरीर की अतिरिक्त चर्बी समाप्त होने लगती है।

एक्जिमा दूर करे :

पालक की जड़ नींबू के रस में पीसकर लगाने से एक्जिमा समाप्त हो जाता है।
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Wednesday, December 30

यौन रोगों में तुलसी के उपयोग



वीर्यवृद्धि हेतु :



तुलसी के बीजों का चूर्ण 2 ग्राम की मात्रा में पुराने गुड़ के साथ मिलाकार खाएं और इसके बाद 1 कप दूध पीएं। इसका सेवन नियमित रूप से सुबह-शाम नियमित रूप से कुछ महीनों तक लेने से सेक्स सम्बंधी धातु की वृद्धि होती है। इससे नपुंसकता (नामर्दी) और शीघ्रपतन (धातु का शीघ्र निकल जाना) की समस्याएं दूर हो जाती है।

धातुदुर्बलता :



वीर्य की कमजोरी होने पर तुलसी के बीज का चूर्ण 60 ग्राम और मिश्री 75 ग्राम को एक साथ पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण प्रतिदिन 3 ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ सेवन करें। इससे धातु की कमजोरी दूर होती है।

स्वप्नदोष :



तुलसी की जड़ का काढ़ा 4-5 चम्मच की मात्रा में रात को सोने से पहले नियमित रूप से कुछ सप्ताह तक पीने से स्वप्नदोष से छुटकारा मिलता है।

शीघ्रपतन :



तुलसी की जड़ या बीज चौथाई चम्मच की मात्रा में पानी में रात को भिगोकर रख दें और सुबह उसका सेवन करें। इससे शीघ्रपतन दूर होकर वीर्य पुष्ट (गाढ़ा) होता है।

शरीर को ताकतवर बनाना :




  1. तुलसी के बीज या पत्ते को भूनकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण के बराबर मात्रा में गुड़ मिलाकर लगभग 1-1 ग्राम की गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली गाय के दूध के साथ सुबह-शाम लेने से शरीर में भरपूर ताकत आती है।

  2. लगभग आधा ग्राम तुलसी के पीसे हुए बीजों को सादे या कत्था लगे पान के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम खाली पेट खाने से बल, वीर्य, खून बढ़ता है।

  3. लगभग 10 ग्राम तुलसी के बीजों के चूर्ण को 20 ग्राम पुराने गुड़ में मिलाकर प्रतिदिन खाने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है। इसका प्रयोग 40 दिनों तक करना चाहिए। इसका सेवन केवल सर्दी के दिनों में ही करना चाहिए क्योकि यह गर्म होता है।

  4. शौच आदि से आने के बाद सुबह के समय तुलसी के 5 पत्ते पानी के साथ खाने से बल, तेज व स्मरणशक्ति बढ़ती है।

  5. तुलसी के पत्तों का रस 8 बूंद पानी में मिलाकर प्रतिदिन पीने से मांसपेशियां और हडि्डयां मजबूत होती है।

  6. तुलसी के बीज दूध में उबालकर चीनी मिलाकर पीने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है।


नपुंसकता :




  1. धातु दुर्बलता में तुलसी के बीज एक ग्राम दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने नपुंसकता दूर होती है और कामशक्ति बढ़ती है।

  2. तुलसी की जड़ और जमीकंद को पान में रखकर खाने से शीध्रपतन की शिकायते दूर होती है।

  3. तुलसी के बीज या तुलसी की जड़ के चूर्ण में पुराना गुड़ समान मात्रा में मिलाकर 3-3 ग्राम की गोली बना लें। यह 1-1 गोली सुबह-शाम गाय के ताजे दूध के साथ 1 से 6 सप्ताह तक लेने से नपुंसकता दूर होती है।
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Sunday, October 11

अमरूद है एक बेहतरीन औषधि, इन रोगों में करता है दवा का काम !



साभार :  Acharya Bal Krishna



  • अमरूद एक बेहतरीन स्वादिष्ट फल है। अमरूद कई गुणों से भरपूर है। अमरूद में प्रोटीन 10.5 प्रतिशत, वसा 0. 2 कैल्शियम 1.01 प्रतिशत बी पाया जाता है। अमरूद का फलों में तीसरा स्थान है। पहले दो नम्बर पर आंवला और चेरी हैं। इन फलों का उपयोग ताजे फलों की तरह नहीं किया जाता, इसलिए अमरूद विटामिन सी पूर्ति के लिए सर्वोत्तम है।

  • विटामिन सी छिलके में और उसके ठीक नीचे होता है तथा भीतरी भाग में यह मात्रा घटती जाती है। फल के पकने के साथ-साथ यह मात्रा बढती जाती है। अमरूद में प्रमुख सिट्रिक अम्ल है 6 से 12 प्रतिशत भाग में बीज होते है। इसमें नारंगी, पीला सुगंधित तेल प्राप्त होता है। अमरूद स्वादिष्ट फल होने के साथ-साथ अनेक गुणों से भरा से होता है।

  • यदि कभी आपका गला ज्यादा ख़राब हो गया हो तो अमरुद के तीन -चार ताज़े पत्ते लें ,उन्हें साफ़ धो लें तथा उनके छोटे-छोटे टुकड़े तोड़ लें | एक गिलास पानी लेकर उसमे इन पत्तों को डाल कर उबाल लें , थोड़ा पकाने के बाद आंच बंद कर दें | थोड़ी देर इस पानी को ठंडा होने दें ,जब गरारे करने लायक ठंडा हो जाये तो इसे छानकर ,इसमें नमक मिलाकर गरारे करें , याद रखें कि इसमें ठंडा पानी नहीं मिलना है |

  • अमरूद के ताजे पत्तों का रस 10 ग्राम तथा पिसी मिश्री 10 ग्राम मिलाकर 21 दिन प्रात: खाली पेट सेवन करने से भूख खुलकर लगती है और शरीर सौंदर्य में भी वृद्धि होती है।

  • अमरूद खाने या अमरूद के पत्तों का रस पिलाने से शराब का नशा कम हो जाता है। कच्चे अमरूद को पत्थर पर घिसकर उसका एक सप्ताह तक लेप करने से आधा सिर दर्द समाप्त हो जाता है। यह प्रयोग प्रात:काल करना चाहिए। गठिया के दर्द को सही करने के लिए अमरूद की 4-5 नई कोमल पत्तियों को पीसकर उसमें थोड़ा सा काला नमक मिलाकर रोजाना खाने से से जोड़ो के दर्द में काफी राहत मिलती है।

  • डायबिटीज के रोगी के लिए एक पके हुये अमरूद को आग में डालकर उसे भूनकर निकाल लें और भुने हुई अमरुद को छीलकर साफ़ करके उसे अच्छे से मैश करके उसका भरता बना लें, उसमें स्वादानुसार नमक, कालीमिर्च, जीरा मिलाकर खाएं, इससे डायबिटीज में काफी लाभ होता है। ताजे अमरूद के 100 ग्राम बीजरहित टुकड़े लेकर उसे ठंडे पानी में 4 घंटे भीगने दीजिए। इसके बाद अमरूद के टुकड़े निकालकर फेंक दें। इस पानी को मधुमेह के रोगी को पिलाने से लाभ होता है।

  • जब भी आप फोड़े और फुंसियों से परेशान हो तो अमरूद की 7-8 पत्तियों को लेकर थोड़े से पानी में उबालकर पीसकर पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को फोड़े-फुंसियों पर लगाने से आराम मिल जाएगा। चार हफ्तों तक नियमित रूप से अमरूद खाने से भी पेट साफ रहता है व फुंसियों की समस्या से राहत मिलती है।
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Saturday, September 5

पनसिका (Acne rosacea) का घरेलू उपचार

एक्ने रोससया (Acne rosacea) को पनसिका नाम से भी जाना जाता है | यह  चेहरे की त्वचा का एक जीर्ण रोग है, यह रोग सामान्य मुहांसों से अलग प्रकार का होता है | यह सामान्यतः महिलाओं को अधिक होता है। | इस रोग में चेहरे पर लाली आ जाती है एवं रक्त धमनियों की सूजन चेहरे पर उभर आती हैं | इसके अतिरिक्त चेहरे पर छोटे-छोटे लाल दाने एवं चकत्ते पड़ जाते हैं | यह रोग विशेष रूप से नाक, चेहरे पर परिलक्षित होता है | पनसिका अधिकतर महिलाओं को 30 से 60 वर्ष की उम्र में होता है | अन्य लक्षणों में बल्बनुमा नाक, मस्तक एवं गाल की त्वचा का एक मोटा होना शामिल हैं।चेहरे के अतिरिक्त आंखों में जलन एवं पलकों में सूजन हो सकती है। इसे नेत्र पनसिका कहा जाता है।

कारण :




  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली

  • पराबैंगनी प्रकाश किरण

  • हार्मोनल परिवर्तन

  • मानसिक तनाव

  • शराब (विशेष रूप से रेड वाइन) का सेवन

  • संवेदनशील त्वचा उत्पादों का प्रयोग करना

  • गर्म और मसालेदार भोजन जैसे कैफीन, शराब, सोडा, और चॉकलेट, सिरका, सोया सॉस, साल्सा, गर्म सॉस,ne मिर्च का सेवन



उपचार :



कैमोमाइल तेल :



कैमोमाइल तेल को फ़्रिज में ठंडा करने के बाद Acne rosacea ग्रस्त त्वचा पर रुई में भिगोकर लगायें | इससे 15-20 मिनट में ही त्वचा की लालिमा कम हो जाएगी |

white daisies on blue sky background






एप्पल मास्क :



एक ताजा सेब का का पेस्ट बनाकर 15 मिनट के लिए चेहरे पर लगायें | सूख जाने के बाद, ठंडे पानी से धो दें | इस प्रयोग को प्रतिदिन एक बार करें |

APPLE PASTE






हर्बल पेस्ट :



2 चम्मच हल्दी पाउडर + 4 चम्मच धनिया पाउडर + 2 बड़े चम्मच ताज़ा दूध | इन सब को आपस में अच्छी तरह मिलाकर कुछ देर के लिए फ़्रिज में रख दें | इस पेस्ट का मास्क चेहरे पर लगायें एवं 10 मिनट बाद चेहरे को ताज़े पानी से धो लें | इस प्रयोग को प्रतिदिन दो बार प्रातः- सायं करें |

Herbal paste








एलोवेरा :



एलोवेरा के अन्य अनेक लाभ के अतिरिक्त यह त्वचा के लिए भी बेहद उपयोगी है | Acne rosacea से निजात पाने के लिए दिन में दो बार एलोवेरा जेल को लगाना लाभकारी है | प्रातः सायं एलोवेरा जूस पीना भी लाभदायक है |

एलोवेरा






 चाय के पेड का तेल :



चाय के पेड का तेल एक अच्छा एंटीइन्फ्लेम्टरी और एंटीसेप्टिक गुण से भरपूर होता है | रोगग्रस्त अंग पर इसे लगाना अत्यंत लाभकारी होता है |

tea tree oil






खीरा के पेस्ट का लेप :



ताज़े खीरा के पेस्ट को 30 मिनट के लिए चेहरे पर लगायें तत्पश्चात ठन्डे पानी से चेहरा धो लें |Acne rosacea को दूर करने का यह एक प्रभावशाली उपाय है | इस प्रयोग को नियमित रूप से प्रतिदिन एक बार एक माह तक करना चाहिए |

cucumber-






 ग्रीन टी :



ग्रीन टी एंटी इन्फ्लेम्टरी,एंटीसेप्टिक एवं कैंसररोधी गुणों से भरपूर होती है | Acne rosacea से प्रभावित त्वचा पर ग्रीन टी को धीरे-धीरे रगड़ना लाभकारी है |

green-tea








ओटमील :



Acne rosacea के कारण यदि त्वचा पर लाली एवं खुजली हो रही हो तो एक कप पानी में दो चम्मच ओटमील को घोलकर इस पेस्ट को प्रभावित त्वचा पर लगायें |

oatmeal




 गुलाब के फल का तेल :



गुलाब के फल का तेल त्वचा रोगों की एक प्रभावकारी औषधि है | यह Acne rosacea के अतिरिक्त त्वचा के दाग,सनबर्न,एक्जिमा आदि में भी लाभ करता है | rosacea ग्रस्त त्वचा पर प्रतिदिन गुलाब के फल के तेल की कुछ बूंदें लगाने से आशाजनक लाभ होता है |

Rose seed oil






 ठंडा सेंक :



यह त्वचा की लालिमा को कम करने के लिए एक अन्य प्रभावकारी प्रयोग है | एक कटोरी गर्म पानी में 10 मिनट के लिए तीन कैमोमाइल चाय बैग को भिगो दें तत्पश्चात इस पानी को फ़्रिज में रख दें | ठंडा हो जाने पर इस पानी से रोगग्रस्त त्वचा की ठंडी सेंक करें | यह एक आश्चर्यजनक परिणाम देने वाला प्रयोग है |



कैमोमाइल चाय बैग








सेब का सिरका :



दो चम्मच सेब के सिरके को प्रतिदिन पियें | इसे त्वचा पर भी लगा सकते हैं | सेब के सिरका में एंटीइन्फ्लेम्टरी गुण होता है जोकि rosacea को दूर करने में मद्ददगार है |







सेब का सिरका




 



 

 

 

 

अंगूर के बीज :



प्रतिदिन 3 बार (एक दिन में 50 मिलीग्राम) अंगूर के बीज खाने से rosacea रोग में अत्यंत लाभ होता है |Green Grapes Isolated on White




 अलसी का तेल :



प्रातः,दोपहर एवं सायं को एक-एक चम्मच अलसी का तेल पीने से भी rosacea सहित सभी त्वचा रोगों से मुक्ति मिलती है |

अलसी








 

Tuesday, August 4

हर्बल थेरेपी द्वारा डेंगू का उपचार



वर्तमान में डेंगू एक बड़ी समस्या के तौर पर उभरा है, सम्पूर्ण भारत में ये बड़ी तेजी से बढ़ता ही जा रहा है जिससे कई लोगों की जान जा रही है |
यह एक  वायरल रोग है  आयुर्वेद में इसका इलाज है और वह इतना सरल और सस्ता है कि उसे कोई भी कर सकता है |

लक्षण :




  • तीव्र ज्वर

  • सिर में तेज़ दर्द

  • आँखों के पीछे दर्द होना

  • उल्टियाँ होना

  • त्वचा का सूखना

  • खून के प्लेटलेट की मात्रा का तेज़ी से कम होना


यह डेंगू के कुछ लक्षण हैं जिनका यदि समय रहते इलाज न किया जाए तो रोगी की मृत्यु भी हो सकती है |  डेंगू के लक्षण जैसे बुखार, तेज सिरदर्द, जोड़ों में दर्द, दिखाई पड़ते ही नजदीकी डॉक्टर को दिखाएं। इसमें लापरवाही करना खतरनाक हो सकता है।

बचाव :




  1. जिन बर्तनों में पानी रखा जाता है उन पर हमेशा ढक्कन लगा कर रखें।

  2. कूलर में पानी जमा न रहने दें, उसकी नियमित सफाई करें।

  3. वॉश बेसिन, सिंक, नालियां जहां भी धुलाई-सफाई का काम होता है वे जगहें साफ व सूखी रखें।

  4. कई दिनों तक किसी भी बर्तन में पानी भरकर न रखें। एक हफ्ते के भीतर उसे बदलते रहें।

  5. खराब हो चुकी वस्तुओं जैसे टायर, नारियल के खोल, बोतलें आदि को फेंक दें या नष्ट कर दें।

  6. छत, छज्जे आदि पर भी बरसात का पानी जमा न होने दें।

  7. मच्छर मारने की दवाओं का प्रयोग करें।


डेंगू संक्रमित मच्छर दिन के वक्त काटता है, इसलिए अच्छा हो कि आप दिन के समय नमी वाली जगहों पर न जाएं और पूरे शरीर को ढंकने वाले वस्त्र पहनें।

उपचार :




  • यदि आपके आस-पास किसी को यह रोग हुआ हो और खून में प्लेटलेट की संख्या कम होती जा रही हो तो निम्न चार चीज़ें रोगी को दें :

  • अनार जूस

  • गेहूं घास रस

  • पपीते के पत्तों का रस

  • गिलोय/अमृता/अमरबेल सत्व


डेंगू से घटे प्लेटलेट्स की भरपाई करेगी ये डाइट :



- अधिक से अधिक तरल पदार्थ पिएं।
- खूब पानी पिएं।
- दिन में तीन बार एक-एक चम्मच हल्दी, दूध या पानी के साथ लें।
- नींबू-पानी का सेवन करें।

giloyगिलोय :



गिलोय का जूस डेंगू के दौरान नियमित रूप से इसके सेवन से  प्रतिरोधी क्षमता मजबूत होती है। गिलोय की बेल का सत्व मरीज़ को दिन में २-३ बार दें, इससे खून में प्लेटलेट की संख्या बढती है, रोग से लड़ने की शक्ति बढती है तथा कई रोगों का नाश होता है l यदि गिलोय की बेल आपको ना मिले तो किसी भी नजदीकी पतंजली चिकित्सालय में जाकर "गिलोय घनवटी" ले आयें जिसकी एक एक गोली रोगी को दिन में 3 बार दें |






papayaपपीता और इसके पत्ते का रस :



शरीर की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने और ब्लड प्लेटलेट की रिकवरी के लिए पपीता या इसके पत्तों का जूस भी बहुत फायदेमंद है। आप चाहें तो पपीते की पत्तियों को चाय की तरह भी पानी में उबालकर पी सकते हैं, इसका स्वाद ग्रीन टी की तरह लगेगा। पपीते के पत्तों का रस सबसे महत्वपूर्ण है, पपीते का पेड़ आसानी से मिल जाता है उसकी ताज़ी पत्तियों का रस निकाल कर मरीज़ को दिन में २ से ३ बार दें , एक दिन की खुराक के बाद ही प्लेटलेट की संख्या बढ़ने लगेगी |








अनार जूसअनार जूस तथा गेहूं घास रस :



यह नया खून बनाने तथा रोगी की रोग से लड़ने की शक्ति प्रदान करने के लिए है, अनार जूस आसानी से उपलब्ध है यदि गेहूं घास रस ना मिले तो रोगी को सेब का रस भी दिया जा सकता है |








Untitledनारियल पानी :



नारियल पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स अच्छी मात्रा में होते हैं। इसके अलावा यह मिनिरल्स का भी अच्छा स्रोत है जो शरीर में ब्लड प्लेटलेट्स की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं।








vageलाल फल और सब्जियां :



टमाटर, तरबूज, चेरी आदि फल और सब्जियों में विटामिन और मिनिरल्स के साथ-साथ एंटी ऑक्स‌िडेंट्स अच्छी मात्रा में होते हैं। ये शरीर में ब्लड प्लेटलेट्स बढ़ाने में मदद करते हैं |








6 kadduकद्दू का रस :

कद्दू के आधे ग्लास जूस में एक से दो चम्मच शहद डालकर दिन में दो बार लेने से भी खून में प्लेटलेट की संख्या बढ़ती है।








Carrot-Juiceचुकंदर और गाजर :



चुकंदर के रस में अच्छी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो शरीर की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाते हैं। अगर दो से तीन चम्मच चुकंदर के रस को एक ग्लास गाजर के रस में मिलाकर पिएं तो ब्लड प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ती हैं।








apple



उल्टी होने पर :



यदि रोगी बार बार उलटी करे तो सेब के रस में थोडा नींबू रस मिला कर रोगी को दें, उल्टियाँ बंद हो जाएंगी |








विशेष :




  • यदि बुखार १ दिन से ज्यादा रहे तो खून की जांच अवश्य करवा लें |

  • ये रोगी को अंग्रेजी दवाइयां दी जा रही है तब भी यह चीज़ें रोगी को बिना किसी डर के दी जा सकती हैं |

  • डेंगू जितना जल्दी पकड़ में आये उतना जल्दी उपचार आसान हो जाता है और रोग जल्दी ख़त्म होता है |


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