Wednesday, December 30

यौन रोगों में तुलसी के उपयोग



वीर्यवृद्धि हेतु :



तुलसी के बीजों का चूर्ण 2 ग्राम की मात्रा में पुराने गुड़ के साथ मिलाकार खाएं और इसके बाद 1 कप दूध पीएं। इसका सेवन नियमित रूप से सुबह-शाम नियमित रूप से कुछ महीनों तक लेने से सेक्स सम्बंधी धातु की वृद्धि होती है। इससे नपुंसकता (नामर्दी) और शीघ्रपतन (धातु का शीघ्र निकल जाना) की समस्याएं दूर हो जाती है।

धातुदुर्बलता :



वीर्य की कमजोरी होने पर तुलसी के बीज का चूर्ण 60 ग्राम और मिश्री 75 ग्राम को एक साथ पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण प्रतिदिन 3 ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ सेवन करें। इससे धातु की कमजोरी दूर होती है।

स्वप्नदोष :



तुलसी की जड़ का काढ़ा 4-5 चम्मच की मात्रा में रात को सोने से पहले नियमित रूप से कुछ सप्ताह तक पीने से स्वप्नदोष से छुटकारा मिलता है।

शीघ्रपतन :



तुलसी की जड़ या बीज चौथाई चम्मच की मात्रा में पानी में रात को भिगोकर रख दें और सुबह उसका सेवन करें। इससे शीघ्रपतन दूर होकर वीर्य पुष्ट (गाढ़ा) होता है।

शरीर को ताकतवर बनाना :




  1. तुलसी के बीज या पत्ते को भूनकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण के बराबर मात्रा में गुड़ मिलाकर लगभग 1-1 ग्राम की गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली गाय के दूध के साथ सुबह-शाम लेने से शरीर में भरपूर ताकत आती है।

  2. लगभग आधा ग्राम तुलसी के पीसे हुए बीजों को सादे या कत्था लगे पान के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम खाली पेट खाने से बल, वीर्य, खून बढ़ता है।

  3. लगभग 10 ग्राम तुलसी के बीजों के चूर्ण को 20 ग्राम पुराने गुड़ में मिलाकर प्रतिदिन खाने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है। इसका प्रयोग 40 दिनों तक करना चाहिए। इसका सेवन केवल सर्दी के दिनों में ही करना चाहिए क्योकि यह गर्म होता है।

  4. शौच आदि से आने के बाद सुबह के समय तुलसी के 5 पत्ते पानी के साथ खाने से बल, तेज व स्मरणशक्ति बढ़ती है।

  5. तुलसी के पत्तों का रस 8 बूंद पानी में मिलाकर प्रतिदिन पीने से मांसपेशियां और हडि्डयां मजबूत होती है।

  6. तुलसी के बीज दूध में उबालकर चीनी मिलाकर पीने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है।


नपुंसकता :




  1. धातु दुर्बलता में तुलसी के बीज एक ग्राम दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने नपुंसकता दूर होती है और कामशक्ति बढ़ती है।

  2. तुलसी की जड़ और जमीकंद को पान में रखकर खाने से शीध्रपतन की शिकायते दूर होती है।

  3. तुलसी के बीज या तुलसी की जड़ के चूर्ण में पुराना गुड़ समान मात्रा में मिलाकर 3-3 ग्राम की गोली बना लें। यह 1-1 गोली सुबह-शाम गाय के ताजे दूध के साथ 1 से 6 सप्ताह तक लेने से नपुंसकता दूर होती है।
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