साधन
- एक तख़्त (लगभग 6 फिट लम्बा 3 फिट चौड़ा)
- सफेद मारकीन की 7 x 6 फिट की एक चादर
- सफेद मारकीन की 4 x 2 फिट की एक चादर
- 7 x 6 फिट माप के चार कम्बल
- एक छोटा तौलिया
- एक मग
- एक बाल्टी पानी सहित
- दो ईंट
- एक तकिया रैक्सीन कवर सहित
- दो गर्म पानी की बोतल,
- एक जालीदार कपड़ा
- गर्म पानी
- एक गिलास
विधि
रोगी की अवस्था के अनुसार यदि वह सामान्य है तो उसके कपडे निकाल कर सीधे सारे बदन की गीली पट्टी दे सकते हैं , परन्तु यदि वह कमजोर है तो पहले उसके शरीर को हथेली से रगडकर शरीर को गर्म कर लें | सामान्य रोगी को -यदि गर्मी है तो ठंडा पानी तथा सर्दी में गुनगुना पानी पिला देना चाहिए |
एक कम्बल तख़्त पर बिछाकर तकिया रख दें उपर से दूसरा कम्बल तकिया के नीचे से बिछा दें | यदि रोगी अति कमजोर है तो तीसरा कम्बल भी बिछा दें, तत्पश्चात मारकीन की ७*६ फिट की चादर को ठन्डे पानी में भिगोकर निचोड़ लें और तख़्त पर कम्बलों के ऊपर बिछा दें , फिर मारकीन की 4*2 फिट की चादर ठन्डे पानी में
भिगोकर निचोड़कर तकिया से ठीक नीचे से इस तरह बिछा दें की वह छाती को ढक सके |
अब रोगी को तख़्त पर लिटाकर पहले मारकीन की 4*2 फिट की चादर को छाती से लपेट दें फिर बड़ी मारकीन की चादर को अचछी तरह से पुरे शरीर पर , एक तरफ आधी एवं दूसरी तरफ से आधी इस तरह लपेटें की पूरा बदन ढक जाये | अब नीचे बिछे कम्बलों से रोगी को ठीक तरह से ढक दें | अब उसके सिर को ठन्डे पानी से भीगी एक छोटा तौलिया से ढक दें | मौसम के अनुसार रोगी के सिर पर प्रति पांच मिनट पर या लगातार पानी डालते रहना चाहिए अधिकतम ४५ मिनट तक यह उपचार दें
सावधानियां
- बुखार की अवस्था में २०-३० मिनट बाद चादर हटा देना चाहिए |
- कमजोर रोगी जिसे ठण्ड लग रही हो ,उसके आस-पास गर्म पानी की बोतल लगा देना चाहिए |
- उपचार देने के बाद सामान्य व्यक्ति शरीर को हथेलियों से रगडकर ताजे पानी से नहा सकता है परन्तु अति कमजोर रोगी का शरीर गर्म पानी में भिगोई तौलिया से पोंछकर लिटा दें और आवश्यकता होने पर उसे कम्बल से ढक दें |
- सारे बदन की गीली पट्टी खाली पेट लेना चाहिए , नाश्ते के एक घंटे बाद भी सारे बदन की गीली पट्टी दी सकती है |
- रक्ताल्पता , गठिया ,साईटिका ,दर्द हो तो पैरों के नीचे गर्म पानी की बोतल लगा दें ,आवश्यकता होने पर पुरे शरीर के आस-पास गर्म पानी की बोतल लगा सकते हैं |
- मलेरिया बुखार में सारे बदन की गीली पट्टी न दें , सामान्य बुखार में अति लाभकारी है ,दे सकते हैं |
- अति रक्ताल्पता में केवल कमर के नीचे लपेट दें |
- हार्ट अटैक , निमोनिया की अवस्था में , अत्यधिक नाडी दौर्बल्य , जीवनी शक्ति की कमी , अति सुजन में सारे बदन की गीली पट्टी नही देना चाहिए |
- सारे बदन की गीली पट्टी देने के बाद एक घंटे बाद तक कुछ खाने को न दिया जाये |
- सारे बदन की गीली पट्टी सम्पूर्ण शरीर को उद्दीप्त कर देती है | नींद अच्छी आने लगती है,बेचैनी दूर हो जाती है |
- पुरानी सूजन दूर हो जाती है | यह खून को साफ करने का अच्छा तरीका है |
- टायफायड व् अन्य हर तरह के तेज बुखार [ मलेरिया की कंपकंपी की अवस्था को छोड़ कर ] में अत्यंत लाभकारी है |
- कब्ज ,मोटापा मधुमेह,अनिद्रा,बेहोशी,मांसपेशियों में ऐंठन और बेचैनी,नाड़ी दौर्बल्य,मूर्छा,बडबडाना [प्रलाप ],चर्म-रोग [घमौरी ], एक्जीमा,पित्ती,श्वेत कुष्ठ,चेचक,मसूरिका,खसरा,खांसी में लाभ कारी है |
- ब्रोंकाईट्स,दमा,क्षय,धातु दौर्बल्य,उच्च रक्तचाप,वात्ज्वर,गठिया,फाईलेरिया , लकवा,श्वेत प्रदर,रक्त स्राव कम होना,गर्भपात बार-बार होना, सिफलिस,सिरदर्द,गंजापन,मिर्गी,हिस्टीरिया,चिडचिड़ापन,डिप्रेशन, में लाभकारी है |
- निमोनिया की अवस्था में चादर को पहले ठन्डे पानी में भिगो कर निचोड़े फिर गर्म पानी में,तत्पश्चात उसका प्रयोग करें |
उपयोगी जानकारी।
ReplyDeleteधन्यवाद ! प्रवीण जी ...
ReplyDelete