उपवास का उद्देश्य होता है पाचन प्रणाली को पूर्ण रूपेण अवकाश प्रदान करना | जो भी भोजन हम ग्रहण करते हैं उसे पचाने के लिए शरीर को बहुत सारी उर्जा खर्च करनी पड़ती है |शरीर की पाचन प्रणाली सुचारू ढंग से कार्य करती रहे इसलिए उसे सप्ताह में कम से कम एक दिन के लिए पूर्णतया अवकाश प्रदान करना चाहिए | हमारे धर्म शास्त्रों में विभिन्न व्रत,उपवास को स्वस्थ्य की द्रष्टि से ही जोड़ा गया है | आस्था ,पवित्रता के साथ किया गया उपवास हमारे मस्तिष्क व् शरीर दोनों को शुद्ध करता है | उपवास के दौरान भोजन को पचाने वाली जो उर्जा बचती है वह शरीर के दोष दूर करने एवं रोगमुक्त करने में लग जाती है | तीव्र रोगों में उपवास के समान कोई औषधि नही है | इस मामले में मनुष्य से अधिक जानवर अधिक संवेदनशील होते हैं क्योंकि वे बीमार पड़ने पर सबसे पहले भोजन का त्याग कर देते हैं और बिना किसी औषधि के स्वस्थ्य भी हो जाते हैं | इससे यह सिद्ध होता है कि रोगमुक्त करने की शक्ति शरीर मे ही मौजूद है , आवश्यकता इस बात की है कि उस उर्जा का सही वक्त पर सही उपयोग किया जाये |
No comments:
Post a Comment