यह एक सामान्य रोग है जो किसी को भी हो सकता है | पुरुषो की अपेक्षा महिलाएं इस रोग से अधिक ग्रस्त होती हैं | ऐसा माना जाता है कि यह एक वैक्टीरिया जनित रोग है | इस संक्रमण से उत्पन्न हुए लक्षण 5-6 दिन तक बने रह सकते हैं | लापरवाही करने पर गुर्दों को क्षति पहुंच सकती हैं |
इस रोग के अन्य कारण यह भी हो सकते है –
- स्त्रियों को यह समस्या अधिकतर गर्भकाल के दौरान होती है
- रजोनिवृत्ति के समय भी इस की संभावना बढ़ जाती है |
- मधुमेह के रोगी भी इस संक्रमण से जल्दी ग्रस्त हो जाते हैं |
- कई बार असुरक्षित यौन सम्बन्ध से भी यह रोग होता है |
- किसी रोग के कारण यदि मूत्र मार्ग में रबड़ का कैथेटर डाला गया है, तो इसके कारण भी UTI हो जाता है |
लक्षण :
- मूत्र त्याग करते समय जलन एवं बार-बार मूत्र त्याग की इच्छा होना पर मूत्र कम आना |
- पीठ में दर्द,पेट दर्द, कमर में तेज दर्द, बुखार, मिचली और उल्टी होना ।
- मूत्र के रंग में परिवर्तन होना, कभी-कभार मूत्र में रक्त की कुछ मात्रा की उपस्थिति भी हो सकती है या प्यूरिया (मूत्र में मवाद) की कुछ मात्रा भी दिख सकती है।
घरेलू चिकित्सा :
60 मिली. पानी में 1 चम्मच आंवला चूर्ण एवं 1 चम्मच हल्दी का पावडर मिलाकर धीमी आंच पर उबालें | पानी की मात्रा आधी रह जाने पर, पीने योग्य ठंडा करके पी लें | इस प्रयोग को प्रातः,दोपहर,सायं दिन में तीन बार 4-5 दिन तक लगातार करें |
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