Nutrition Facts
Amount Per 100 grams
|
| Calories 43 |
| % Daily Value* | |
| Total Fat 0.3 g | 0% |
| Saturated fat 0.1 g | 0% |
| Polyunsaturated fat 0.1 g | |
| Monounsaturated fat 0.1 g | |
| Cholesterol 0 mg | 0% |
| Sodium 8 mg | 0% |
| Potassium 182 mg | 5% |
| Total Carbohydrate 11 g | 3% |
| Dietary fiber 1.7 g | 6% |
| Sugar 8 g | |
| Protein 0.5 g | 1% |
| Vitamin A | 19% | Vitamin C | 101% |
| Calcium | 2% | Iron | 1% |
| Vitamin D | 0% | Vitamin B-6 | 0% |
| Vitamin B-12 | 0% | Magnesium | 5% |
पपीता एक स्वादिष्ट एवं पौष्टिकता से भरपूर फल है। पपीता कच्चे रहने पर हरा और पक जाने पर पीले रंग का हो
जाता है। कच्चे पपीते की सब्जी और अचार भी बनती है। पके पपीते की चटनी व कचूमर भी बनाई जाती है। प्रतिदिन प्रातः पपीते का सेवन करने से कब्ज दूर होती है और पाचन शक्ति बढ़ती है। यह पेट की गैस को दूर करता है। आंतों में सूखे मल को बाहर करके आंतों को एकदम साफ कर देता है।
जाता है। कच्चे पपीते की सब्जी और अचार भी बनती है। पके पपीते की चटनी व कचूमर भी बनाई जाती है। प्रतिदिन प्रातः पपीते का सेवन करने से कब्ज दूर होती है और पाचन शक्ति बढ़ती है। यह पेट की गैस को दूर करता है। आंतों में सूखे मल को बाहर करके आंतों को एकदम साफ कर देता है।
विभिन्न भाषाओं में नाम :
• हिंदी - अरण्ड खर्बूजा
• अंग्रेजी - पपेया
• संस्कृत - मधुकर्कटी या वातकुंभफल
• बंगाली - पोपैय।
हानिकारक :
- गर्भावस्था के दौरान कच्चा या पका पपीता नहीं खाना चाहिए।
- जिन स्त्रियों को मासिक-धर्म अधिक आता हो उन्हें भी पपीता नहीं खाना चाहिए।
- पपीता के बीजो का सेवन करने से गर्भपात हो सकता है।
चिकित्सकीय गुण :
- पपीता आसानी से पचने वाला फल है।
- पपीता भूख व शक्ति को बढ़ाता है। यह प्लीहा (तिल्ली), यकृत (लीवर),
- पांडु (पीलिया) आदि रोगों को समाप्त करता है।
- पेट के रोगों को दूर करने के लिए पपीते का सेवन करना लाभकारी होता है।
- पपीते का रस अरूचि, अनिद्रा (नींद का न आना), सिर दर्द, कब्ज व आंवदस्त आदि रोगों को ठीक करता है
- पपीते का रस सेवन करने से अम्लपित्त (खट्टी डकारें) बंद हो जाती है।
- पपीता हृदय रोग को नियंत्रित करता है | पपीते के पत्तों के उपयोग से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है एवं हृदय की धड़कन नियमित होती है।
- पपीता वीर्य को बढ़ाता है, पागलपन को दूर करता है एवं वात दोषों को नष्ट करता है।
- इसके सेवन से जख्म भरता है और दस्त व पेशाब की रुकावट दूर होती है।
- कच्चे पपीते का दूध त्वचा रोग एवं बबासीर के मस्सों के लिए बहुत लाभकारी होता है।
- पपीते के बीज कीड़े को नष्ट करने वाला और मासिक-धर्म को नियमित बनाने वाला होता है।
- पपीते का चूर्ण सेवन करने से आमाशय की जलन, जख्म, अर्बुद व अपच दूर होता है।
- पपीते में विटामिन `सी´ अधिक होता है। यह हड्डी, दांत, उच्चरक्त चाप, पक्षाघात, गठिया व उल्टी आदि में लाभकारी होता है।

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