Wednesday, March 30

गर्मियों में खरबूजा खाएं - स्वस्थ्य रहें !

गर्मी के मौसम में ठंडे फलों के रूप में खरबूजे का प्रयोग खाने में अधिक किया जाता है। खरबूजा कच्चा होने पर हरे रंग का होता है और उस पर काली व कत्थई पटि्टयां होती हैं। पकने पर खरबूजा हरा व कुछ पीला हो जाता है और इसके ऊपर वाली पटि्टयां सफेद हो जाती हैं।

खरबूजा मन व मस्तिष्क को ठंडा व शांत करने वाला, प्यास को दूर करने वाला, मूत्रल, शक्तिदायक, कब्ज दूर करने वाला, शीतल एवं वीर्यवर्धक होता है। यह  भूख बढ़ाता है एवं पेट की गर्मी व खराबी को दूर करता है। खरबूजा पथरी को गलाकर गुर्दे के रोग को खत्म करता है, यह जलोदर एवं पीलिया रोग को समाप्त करता है। इसका प्रयोग छाती का दर्द और लिवर की सूजन को ठीक करने के लिए किया जाता है। खरबूजे के बीजों का चेहरे पर लेप करने से चेहरे की चमक बढ़ती है।

100 ग्राम खरबूजे में पाए जाने वाले विभिन्न तत्व :













Calories 34























































% Daily Value*
Total Fat 0.2 g0%
Saturated fat 0.1 g0%
Polyunsaturated fat 0.1 g
Monounsaturated fat 0 g
Cholesterol 0 mg0%
Sodium 16 mg0%
Potassium 267 mg7%
Total Carbohydrate 8 g2%
Dietary fiber 0.9 g3%
Sugar 8 g
Protein 0.8 g1%




























Vitamin A67%Vitamin C61%
Calcium0%Iron1%
Vitamin D0%Vitamin B-65%
Vitamin B-120%Magnesium3%




विभिन्न भाषाओं में खरबूजे के नाम :


हिन्दी    :  खरबूजा
अंग्रेजी   :  मेलन
संस्कृत  :  दशांगुल, खर्बूज
बंगाली   :  खरबूजा
मराठी    :  खर्बुज
गुजराती  :  खरबूज
तैलगी    :   खरबूजं
फारसी   :   खरपुजा
अरबी    :   वित्तिखा


विभिन्न रोगों में खरबूजे का प्रयोग :


पथरी:

1 चम्मच खरबूजे का छीला हुआ बीज + 15 दाने बड़ी इलायची +2 चम्मच मिश्री के साथ पीस लें इस मिश्रण को  1 कप पानी में मिलाकर प्रतिदिन प्रातः- सायं पीने से गुर्दे की पथरी में अत्यंत लाभ मिलता है।

कब्ज:

कब्ज से पीड़ित रोगी को पक्का खरबूजा खाना चाहिए। इससे कब्ज नष्ट होती है।

मूत्रकृच्छ्र (पेशाब करने में परेशानी):

खरबूजा के बीजों को खाने से मूत्रकृच्छ रोग ठीक होता है।

त्वचा :

त्वचा में कनेक्टिव टिशू पाए जाते हैं। खरबूजे में पाए जाने वाले कोलाजन प्रोटीन इन कनेक्टिव टिशू में कोशिका की संरचना को बनाए रखता है। कोलाजन से जख्म भी जल्दी ठीक होते हैं और त्वचा को मजबूती मिलती है। इसलिए खरबूजे का नियमित सेवन त्वचा से रुखापन को दूर करता है।

पुरानी खाज :

खरबूजे में विटामिन सी पाया जाता है जोकि पुरानी खाज में लाभदायक है।

गैस्ट्रिक (अल्सर):

खरबूजे का रस निकालकर खाली पेट पीने से गैस्ट्रिक रोग समाप्त होता है।

गुर्दों का रोग:

खरबूजे के बीजों को छीलकर पीस लें इसे पानी में मिलाकर हल्का सा गर्म करके पीएं। इसका प्रयोग कुछ दिनों तक करने से गुर्दों का रोग ठीक हो जाता है।

लिवर की सूजन :

खरबूजा सेवन करने से लिवर की सूजन दूर होती है।

रक्तपित्त:

खरबूजे के बीजों को कूटकर पानी में 12 घंटे तक भिगोएं और फिर इसमें सौंफ की जड़, कासनी की जड़ व मिश्री मिलाकर शर्बत बना लें। इस शर्बत का सेवन करने से रक्तपित्त का रोग ठीक होता है।

सिर का दर्द:

खरबूजे के बीजों को गाय के घी व मिश्री में मिला लें और इसे बर्फी की तरह जमाकर सुबह-शाम लगभग 50-50 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इसके बाद गाय के दूध में गाय का घी मिलाकर पीएं। इससे सिर का दर्द ठीक होता है।

शरीर की कमजोरी:

खरबूजा 250 ग्राम की मात्रा में खाकर ऊपर से एक किलो पानी का शर्बत बनाकर पीने से शरीर शक्तिशाली बनता है।

गर्दन में दर्द:

खरबूजे के पत्ते को गर्म करके उस पर थोड़ा सा तेल लगा कर गर्दन पर लपेटकर ऊपर से पट्टी बांधने से गर्दन का दर्द दूर होता है।
वजन कम करता है खरबूजा


वजन कम करने की इच्छा वालों के लिए खरबूजा बहुत अनुकूल फल है |

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