Saturday, April 2

आंतें कमजोर हैं तो करें - शक्तिदायक एनिमा

लगभग 250 मिली. से 400 मिली. साधारण ठण्डा - ताज़ा पानी आंत में चढ़ाकर कम से कम 30 मिनट तक रोककर रखना तत्पश्चात यदि आवश्यक हो तो शौच के लिए जाना, शक्तिदायक एनिमा कहलाता है |इस क्रिया को संस्कृत में 'रक्त प्रक्षालिका वस्ति एवं अंग्रेजी में Tonic Enima के नाम से जाना जाता है |

शक्तिदायक एनिमा की विधि :

साधन:

एनिमा पॉट, (चित्र देखें)

  • एक टेबल जिस पर आराम से लेटा जा सके

  • सरसों का तेल (लगभग 50 मिली)

  • डूस नली


विधि : पैरों की तरफ से टेबल के पायों के नीचे ईंट आदि लगाकर थोड़ा ऊँचा कर लें। एनिमा पॉट को पैरों की तरफ स्टैण्ड पर या दीवार के सहारे टांग दें। एनिमा पॉट  में 250 से 400 मिली. आवश्यकतानुसार पानी भर लें । अब टेबल पर सीधे लेटकर पैरों को घुटनों से मोड़ लें तत्पश्चात् एनिमा पॉट से लगी पाइप के नोजल पर थोड़ा सा तेल लगाकर गुदा द्वार से अन्दर प्रवेश करा दें तथा पानी खोल दें। पानी स्वतः आंत में पहुँचने लगेगा। नोजल एनिमा पॉट के साथ ही आता है | पूरा पानी आंत में पहुँचने के बाद 30 मिनट तक उसे रोकें, तत्पश्चात् यदि आवश्यक हो तो शौच के लिए जाएँ |

लाभ :

  • शक्तिदायक एनिमा से आंतों की कार्यक्षमता बढ़ जाती है जिससे कब्ज दूर होता है |

  • शरीर में अत्यधिक गर्मी महसूस करना, सुजाक, ज्वर, आंतो के रोग जैसे कोलाइटिस आदि रोगों में अत्यंत लाभ मिलता है |


सावधानियां :

  • इस एनिमा में बहुत ज्यादा ठंडा पानी नहीं लेना चाहिए |ठंडे पानी से पेट में ऐंठन होती है जबकि गर्म पानी आँतों को कमजोर करता है |

  • शक्तिदायक एनिमा लेने के दिनों में सप्ताह में एक बार पानी की पूरी मात्रा (1 से 1.5 ली.) का एनिमा भी लेना चाहिए |

  • इस एनिमा को लेने के लिए एनिमा की वह नली प्रयोग में लानी चाहिए जो स्त्रियों की योनि बस्ति (vaginal enima) के काम आती है - (चित्र देखें) | इस नली के छिद्र बहुत बारीक होते हैं जिनके द्वारा पानी अन्दर इस प्रकार प्रवेश करता है कि वह आंत में एकत्र नहीं होता | बल्कि आंतो द्वारा सोखने के बाद धीरे-धीरे रक्त में मिलकर सारे शरीर में घूमता हुआ मूत्र के रूप में बाहर निकल जाता है |

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