Monday, September 12

वर्षा ऋतू में होने वाले रोग और उनका उपचार

हम सभी को बरसात का मौसम अच्छा लगता है | पसीने से तर-बतर कर देने वाली गर्मी के बाद, राहत भरी मानसून की बारिश आती है । काले बादलों के इस मौसम में ठंडी  हवा, बारिश की बूंदों के साथ गर्म चाय और पकौड़ों का स्वाद भला किसे अच्छा नहीं लगता | लेकिन दुर्भाग्य से इस नम और उमस भरे  मौसम के साथ यह कई त्वचा और बालों की समस्यायें भी उत्पन्न होने लगती है। कवक, जीवाणु और परजीवी के संक्रमण बरसात के मौसम में आम हैं। सुस्त, तैलीय त्वचा और बालों का झड़ना इस मौसम की अन्य आम शिकायतें हैं। इस लेख में प्रस्तुत हैं वर्षा ऋतू में होने वाले प्रमुख त्वचा रोग एवं उनका प्राकृतिक उपचार |

घमौरियां :

घमौरियां त्वचा में उत्पन्न होने वाले लाल फुंसीदार दाने हैं । यह दाने लाल तीव्र खुजली और चुभन उत्पन्न करते हैं | यह पसीना से उत्पन्न होती हैं | शरीर के वे अंग जहाँ हवा मुश्किल से लग पाती है वहाँ नमी के कारण फंगल इंफेक्शन हो जाता है। त्वचा का रंग बदरंग लाल सा हो जाता है। । शरीर की सफाई का ध्यान ना रखने पर फोड़े फुंसी हो जाते है।

उपचार :

  • इन दिनों में सूती एवं ढीले पहनने से इस समस्या से बहुत कुछ हद तक बचा जा सकता है।
  • कैलामिन लोशन खुजली कम करने में मदद कर सकता है।

नाखूनों का संक्रमण :

मानसून के मौसम के दौरान नाखूनों में फंगल संक्रमण का खतरा रहता है। संक्रमित होने पर नाख़ून बेरंग एवं भुरभुरे पड़ने लगते हैं |

उपचार :

  • बरसात के मौसम में नाखून लंबे न रखें, क्योंकि इनमे गंदगी भरने से नमी मिलते ही फंगल संक्रमण होने का खतरा उत्पन्न हो जाता है।
  • एंटी फंगल क्रीम या पाउडर का इस्तेमाल करें |

सोरायसिस :

इस रोग में त्वचा पर लाल चकत्ते उत्पन्न हो जाते हैं।

उपचार :

  • इस समस्या से छुटकारा पाने में एलोवेरा बहुत फायदेमंद होता है। इसे बरसात के अन्य अन्य त्वचा रोगों में भी प्रयोग किया जा सकता है |
  • बेसन, गुलाब जल एवं दूध का एक मिश्रण बनाकर चकत्तों पर लगाने से भी लाभ होता है।
  • एंटी बैक्टीरियल साबुन, टेलकम पाउडर एवं फेश वाश भी प्रयोग करें |

 पैर के तलवे या उँगलियों में संक्रमण (Athlete’s foot:

यह पैरों का एक दर्दनाक फंगल इन्फेक्शन है जोकि बिना फिटिंग एवं गिले जूते पहनने से होता है | इस संक्रमण में पैर ले उंगलियों की जड़ों एवं तलवे में फंगल संक्रमण उत्पन्न हो जाता है |

उपचार :

  • प्लास्टिक, चमड़े या कैनवास के जूते न पहनें | इनके स्थान पर चप्पल एवं खुले सैंडल का प्रयोग करें |
  • साफ सूती मोजे पहनें एवं पैरों को साफ व सूखा रखें।

 खुजली :

बरसात में प्राय: त्वचा में खुजली होने लगती है। आमतौर पर हाथ, कलाई, कांख, पेट, कमर और नितंबों पर लाल चकत्तों के रूप में तीव्र खुजली होती है। यह स्थिति बेहद संक्रामक होती है और यदि ठीक से इलाज नहीं किया गया तो निरपवाद रूप से परिवार के अन्य सदस्यों में भी फाइट सकती है ।

उपचार :

नीम की पत्तियों को उबालकर, ठंडाकर इसके पानी से स्नान करना चाहिए अथवा डिटॉल डालकर स्नान करें । वस्त्रों को प्रतिदिन बदलें। नारियल के तेल में कपूर डालकर त्वचा पर लगाएं।

दाद :

वर्षा ऋतू में प्राय: गीले कपड़े पहने रहने से त्वचा पर दाद  हो जाती है। यह खुजलीयुक्त लाल या भूरे चकत्ते के रूप में हो सकती है |

उपचार :

  • 60 ग्राम नारियल का तेल में 10 ग्राम भाग गंधक को घोंटकर मलहम बना लें | दाद्युक्त स्थान पर इसे लगायें।
  • नीम की पत्तियां उबालकर, छानकर लें फिर इसके गुनगुने पानी से दाद वाले स्थान को साफ करे।
  • चक्रमर्द के बीजों को गंधक के साथ मक्खन में मिलाकर दाद पर लगाने से लाभ मिलता है |

शीत-पित्त :

बरसात में शरीर पर गोल-गोल उभरे हुए चकत्ते या रेशे पड़ना एवं इनमें खुजली होना शीतपित्त का लक्षण है।

उपचार :

  • इन चकत्तों पर शुद्ध सरसों का तेल लगाने से लाभ होता है।
  • हल्दी और दूब घास एक साथ पीसकर लगाने से भी लाभ होता है।
  • घी में शुद्ध गेरू पीसकर इसका मलहम लगाने शीतपित्त में आराम मिलता है।

त्वचा का तैलीय होना :

बरसात में नमी के कारण वसामय ग्रंथियों में अधिक तेल स्रावित होने लगता है जिससे चेहरे की त्वचा तैलीय होकर चिपचिपी हो जाती है जिससे मुंहासे आदि की समस्या हो जाती है |

उपचार :

  • वर्षा ऋतू में बाहर जाते समय छाता और रेनकोट का प्रयोग करें |
  • इस मौसम में त्वचा की देखभाल इस प्रकार करे कि त्वचा पर चिपचिपाहट या तैलीय अंश न रहे। इसके लिए दिन में दो-तीन बार किसी माइल्ड साबुन से मुँह धोएं।
  • इस मौसम में कृत्रिम मेक-अप से बचें।
  • तैलीय त्वचा पर मुल्तानी मिट्टी का लेप 'फेस मास्क' के रूप में कर सकते है।

यह भी करें :

  • नहाने के पानी में नींबू के रस  की कुछ बूंदें डालकर नहाएं।
  • नीम की पत्ती को पानी में उबालकर इस पानी को नहाने के पानी में मिलाकर नहाएं।
  • त्वचा पर जहां संक्रमण होने की सम्भवना हो वहां टेलकम पाउडर लगा कर वो जगह सूखी रखनी चाहिए।
  • संतुलित आहार लें | भोजन में फल और सब्जियों की मात्रा भरपूर रखें |
  • त्वचा की चमक चिरस्थायी बनाए रखने के लिए प्रतिदिन 8-10 गिलास पानी पियें ।
  • बारिश में न भींगे |
  • भीगे कपड़े पहनकर न रखें |
  • रात्रि-जागरण, दिन में शयन एवं खुले में शयन न करें |
  • अति परिश्रम एवं अति व्यायाम न करें |
  • नदी में तैरना, धूप में बैठना, खुले बदन घूमना त्याज्य है।
  • बाहर से घर में वर्षा से भीगकर लौटने पर स्वच्छ जल से स्नान अवश्य करें।
  • स्नान के तुरन्त बाद गीले शरीर पंखे की हवा में नहीं जाएँ।

वर्षा ऋतु में सेवन योग्य आहार :

इस ऋतु में जठराग्नि प्रदीप्त करनेवाला वात-पित्तशामक आहार लेना चाहिए | इसके लिए पुदीना, हरा धनिया, सोंठ, अजवायन, मेथी, जीरा, हींग, काली मिर्च का प्रयोग करें |
  • खीरा, लौकी, पेठा, तोरई, आम, जामुन, पपीता सेवनीय हैं |
  • ताजी छाछ में काली मिर्च, सेंधा, जीरा, धनिया, पुदीना डालकर ले सकते हैं |
  • गरम दूध, साठी के चावल, पुराना अनाज, गेहूँ, चावल, जौ, मूंग खट्टे एवं खारे पदार्थ, दलिया, गाय का घी, तिल एवं सरसों का तेल का सेवन लाभदायी है।
  • उपवास और लघु भोजन हितकारी है | रात को देर से भोजन न करे |
  • 500 ग्राम हरड़ चूर्ण और 50 ग्राम सेंधा नमक का मिश्रण बनाकर प्रतिदिन 5-6 ग्राम लेना चाहिए।
  • वर्षा ऋतु में शहद का सेवन अत्यन्त हितकर है। अदरक, लहसुन,प्याज व नींबू का सेवन वर्षा ऋतु में विशेष लाभदायी है।
  • इस ऋतु में फलों में आम,सेब तथा जामुन सर्वोत्तम माने गए हैं।
  • वर्षा ऋतु में चूसकर खाया हुआ आम पचने में हल्का, वायु तथा पित्तविकारों का शमन करने वाला होता है।
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