Tuesday, September 20

जानिए, चिकनगुनिया रोग की सम्पूर्ण जानकारी !

इस समय पूरा देश चिकनगुनिया की चपेट में है। तेज बुखार आना (लगभग 102 डिग्री), जोड़ों में दर्द होना चिकनगुनिया के प्रमुख शुरूआती लक्षण है लेकिन इसकी सही जानकारी कई तरह के ब्लड टेस्ट करवाने के बाद ही पता चलती है।

चिकनगुनिया टेस्ट:


इस समय बुखार से पीड़ित रहने पर जब भी डॉक्टर के पास जायेंगे तो वे आपको कई तरह के ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। इस ब्लड टेस्ट में आपके खून में चिकनगुनिया वायरस या एंटी बॉडीज की मौजूदगी का पता लगाया जाता है। ब्लड टेस्ट की मदद से खून में चिकनगुनिया वायरस, वायरल न्यूक्लिक एसिड या वायरस स्पेसिफिक इम्यूनोग्लोबुलिन की मौजूदगी का पता चल जाता है।

डॉक्टर के पास कब जायें:


जब भी आपको चिकनगुनिया से मिलते जुलते कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत ही डॉक्टर के पास अपना चेकअप कराने के लिए जायें। जैसा कि हम सब जानते हैं कि ये रोग मच्छर के काटने से फैलता है इसलिए मानसून के सीजन में इसके शिकार होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। शुरुआत के आठ दिनों के बुखार में ही आप अगर चेकअप करवा लेते हैं तो आसानी से इस वायरस का पता चल जाता है। 7-8 दिनों के बाद यह वायरस शरीर में एंटी-बॉडीज बनाने लगता है जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है। इसलिए सबसे बेहतर है कि बुखार होने के पहले हफ्ते में ही इसकी जांच करवाएं। चिकनगुनिया को डेंगू या मलेरिया समझने की गलती न करें। चिकनगुनिया, डेंगू और मलेरिया में अंतर को पहले ठीक से पहचान लें।

ब्लड टेस्ट की कीमत :


दिल्ली में चिकनगुनिया में किये जाने वाले ELISA (enzyme-linked immunosorbent assays) टेस्ट की कीमत लगभग 600 रूपए और आर.टी.पी.सी.आर (RTPCR) टेस्ट की कीमत लगभग 1500 रूपए है। एंटी-बॉडीज और सी.बी.सी. (CBC)  की रिपोर्ट तो उसी दिन मिल जाती है लेकिन आरएनए की रिपोर्ट आने में लगभग 2 दिन का समय लगता है।

चिकनगुनिया टेस्ट की रिपोर्ट को कैसे समझें :


ब्लड रिपोर्ट में लिम्फोसाइट की घटी मात्रा, प्लेटलेट्स की मात्रा, क्रीटोनिन की बढ़ी मात्रा और एसजीपीटी की बढ़ी मात्रा को चेक करना होता है।

कैसे इलाज कराएं :


चिकनगुनिया वायरस इन्फेक्शन से बचने के लिए वैसे तो कोई ख़ास एंटीवायरल थेरेपी नहीं है। इसका उपचार लक्षणों के आधार पर ही किया जाता है। मरीज को अधिक से अधिक आराम करने को बोला जाता है और ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सलाह दी जाती है। इसमें डॉक्टर बुखार और दर्द की दवा देते हैं हालांकि एक बार इसका शिकार होने पर कई हफ़्तों तक जोड़ों में दर्द रहता है। ऐसे मरीजों को खासतौर पर ऐसे माहौल में रहने की सलाह दी जाती है जिससे वे मच्छर के संपर्क में बिल्कुल भी न आ सके।

क्या आपको चिकनगुनिया बुखार और डेंगू बुखार के बीच अंतर पता है? क्या आप चिकनगुनिया के लक्षण जानते हैं? आपको बता दें कि अगर लक्षण मलेरिया या डेंगू के नहीं हैं, तो चिकनगुनिया के हो सकते हैं। आईये जानते हैं कि चिकनगुनिया किस तरह डेंगू से अलग है।
चिकनगुनिया मच्छर की उसी प्रजाति के कारण होता है जिससे डेंगू होता है। चिकनगुनिया और डेंगू के लक्षण भी लगभग एक जैसे होते हैं। चिकनगुनिया में तेज बुखार, शरीर में दर्द विशेषकर मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होता है। ऐसा दर्द गठिया के रोगियों में देखा जाता है। रोगी को जोड़ों के दर्द के साथ-साथ जोड़ों में अकड़न भी महसूस हो सकती है, जोकि पेनकिलर लेने के बाद भी ठीक नहीं होती है। कई मामलों में जोड़ों के दर्द और अकड़न के कारण रोगी स्थिर हो सकता है। चिकनगुनिया एक महामारी की बीमारी है, जिसका अर्थ है कि यह एक बड़ी आबादी को प्रभावित कर सकती है। अगर संक्रमित मच्छर किसी एक व्यक्ति को काट ले, तो पूरे समुदाय को बीमारी का खतरा हो सकता है। इसलिए निवारण हमेशा इलाज से बेहतर है।
इन दोनों रोगों के अलग होने की पहचान लक्षणों की अवधि के आधार पर भी की जा सकती है। डेंगू के विपरीत चिकनगुनिया में जोड़ों का दर्द तीन महीने तक हो सकता है और अगर हालत ज्यादा गंभीर है, तो छह महीने तक हो सकता है। कई मामलों में रोगी को एक साल तक जोड़ों में दर्द हो सकता है। उदहारण के लिए चिकनगुनिया के 100 मामलों में 90 फीसदी तीन से चार महीनों में ठीक हो जाते हैं जबकि 10 फीसदी लोगों को छह महीनों तक कई जोड़ों में दर्द का अनुभव रहता है।
चिकनगुनिया और डेंगू वायरस के कारण होता है मलेरिया परजीवी संक्रमण (parasitic infection)। मलेरिया के मामले में यह लीवर और रेड ब्लड सेल्स पर भी हमला कर सकता है। हालांकि चिकनगुनिया और डेंगू के मामले में वायरस एन्डोथीलीअल सेल्स (endothelial cells) को प्रभावित करता है। इसका मतलब यह हुआ कि चिकनगुनिया के मामले में साइनोविअल मेम्ब्रेन (synovial membrane) यानि जोड़ों में मौजूद झिल्ली प्रभावित होती है।

चिकनगुनिया के लक्षण :


चिकनगुनिया मच्छरों के काटने के कारण होता है। शायद आपको ये नहीं पता कि जिन मच्छरों के जाति के कारण डेंगू या जीका का संक्रमण होता है उसी जाति के मच्छर से ही ये बीमारी होती है। मच्छर का काटने के 3-7 दिन के बाद इसके लक्षण नजर आने लगते हैं।

लिम्फ नॉड में सूजन :


ज्यादातर लोगों को ये पता नहीं कि इसके संक्रमण के कारण लिम्फ नॉड में सूजन आ जाता है। लिम्फ नॉड कान के पीछे, जबड़े के भीतर, गर्दन के आस-पास के जगहों में होता है। इन जगहों पर सूजन होने पर नजरअंदाज न करें।

अत्यधिक थकान :


चिकनगुनिया के कारण अत्यधिक थकान महसूस होता है, क्योंकि फीवर और दर्द के कारण आपको थकान महसूस होना आम होता है। इसलिए नजरअंदाज न करके तुरन्त डॉक्टर से सलाह लें।

हाई फीवर :


अगर तीन दिनों तक आपको 102 – 104 डिग्री तक बुखार हो रहा है तो डॉक्टर के पास जाने में देर न करें। ये फीवर एक हफ़्ते तक रह सकता है।

सिर दर्द :


चिकनगुनिया के लक्षणों में सरदर्द भी एक आम लक्षण है जो संक्रमण होने के कुछ दिनों के बाद होना शुरू हो जाता है। अगर आपको फीवर, सिर दर्द के साथ ज्वाइंट पेन है तो दो दिनों तक ये लक्षण ठीक नहीं हो रहा है तो तुरन्त डॉक्टर के पास जायें।

जोड़ों और मसल्स में दर्द :


अक्सर मसल्स में या जोड़ो में दर्द होने के कारण इसके लक्षणों को समझ पाना मुश्किल हो जाता है। इस बीमारी के कारण हाथ और पैरों में सूजन होने के साथ दर्द होता है। यहां तक कि दर्द कई हफ़्तों के अलावा एक साल तक रह जाता है।

स्किन रैशेज़ :


अक्सर इस बीमारी में हाई फीवर के साथ स्किन रैशेज़ निकलने लगते हैं। लाल-लाल दाग हथेली, फेस और टोरसो में विशेषकर होता है। ऐसे लक्षण दिखते ही डॉक्टर से इस बारे में सलाह लें।

उल्टी :


इस इंफेक्शन के कारण उल्टी के लक्षण के साथ अत्यधिक कमजोरी महसूस होती है। अगर आपके आस-पास मच्छरों का बसेरा है तो ऐसे लक्षण महसूस होने पर तुरन्त डॉक्टर के पास जायें।

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