चाय में मांस से आठ गुना अधिक अम्ल होता है, एवं दस प्रकार के विष होते हैं | आईये जाने वे विष कौन-कौन से हैं एवं शरीर पर उनका क्या दुष्प्रभाव होता है -
टेनिन नाम का विष पेट में छाले तथा पैदा करता है | यह कब्ज करने वाला पदार्थ है और पाचन शक्ति को धीरे-धीरे नष्ट कर देता है। शरीर पर इस विष का प्रभाव शराब से बिल्कुल मिलता-जुलता है। शुरू में ताजगी अनुभव होती है परन्तु थोड़ी देर में नशा उतर जाने पर खुश्की और थकान पैदा होती है, जिसके कारण ज्यादा चाय पीने का मन करता है।
थिन नामक विष से शरीर में खुश्की बढती है तथा यह फेफड़ों और सिर में भारीपन पैदा करता है | चाय पीने से एक हल्का सा आनन्द मिलता है, जो इसी थिन नामक विष का प्रभाव होता है। यह हमारे ज्ञान तंतुओं पर बहुत विषैला प्रभाव डालता है।
कैफीन नामक विष शरीर में एसिड बनाता है तथा गुर्दों को कमजोर करता है। यह एक बहुत ही भयंकर विष है। इसका प्रभाव शराब या तम्बाकू में पाए जाने वाले विष ‘निकोटीन’ के समान होता है। इससे शरीर बहुत जल्दी निर्बल और खोखला हो जाता है। यह दिल की धड़कन को बढ़ाता है और इसके सेवन से कभी-कभी तो व्यक्ति की धड़कन एकदम बंद हो जाती है और व्यक्ति मौत का शिकार हो जाता है। ‘कैफीन’ विष का ही प्रभाव है कि नशे के वशीभूत होकर व्यक्ति इसका आदी हो जाता है। कैफीन विष के कारण मूत्र की मात्रा में लगभग तीन गुना वृध्दि हो जाती है परन्तु उसके द्वारा शरीर का दूषित मल, जिसका शरीर की शुध्दि के लिए मूत्र द्वारा बाहर निकलना आवश्यक है, वह शरीर के अंदर ही जमा रहता है।फलस्वरूप ऐसे व्यक्तियों को गठिया, गुर्दे और हृदय संबंधी रोगों का शिकार होना पड़ता है।
वॉलाटाइल नामक विष आँतों के ऊपर हानिकारक प्रभाव डालता है।
कार्बोनिक अम्ल चाय में पाया जाने वाला कार्बोनिक अम्ल से एसिडिटी होती है।
पैमिन से पाचनतंत्र कमजोर हो जाता है।
एरोमोलीक नामक विष भी आँतों के ऊपर हानिकारक प्रभाव डालता है।
साइनोजन विष अनिद्रा तथा लकवा जैसी भयंकर रोगों के लिए जिम्मेदार होता है।
ऑक्सेलिक अम्ल शरीर के लिए अत्यंत हानिकारक है।
स्टिनॉयल रक्तविकार तथा नपुंसकता पैदा करता है।
चाय में पाए जाने वाले विष :
टेनिन :
टेनिन नाम का विष पेट में छाले तथा पैदा करता है | यह कब्ज करने वाला पदार्थ है और पाचन शक्ति को धीरे-धीरे नष्ट कर देता है। शरीर पर इस विष का प्रभाव शराब से बिल्कुल मिलता-जुलता है। शुरू में ताजगी अनुभव होती है परन्तु थोड़ी देर में नशा उतर जाने पर खुश्की और थकान पैदा होती है, जिसके कारण ज्यादा चाय पीने का मन करता है।
थिन :
थिन नामक विष से शरीर में खुश्की बढती है तथा यह फेफड़ों और सिर में भारीपन पैदा करता है | चाय पीने से एक हल्का सा आनन्द मिलता है, जो इसी थिन नामक विष का प्रभाव होता है। यह हमारे ज्ञान तंतुओं पर बहुत विषैला प्रभाव डालता है।
कैफीन :
कैफीन नामक विष शरीर में एसिड बनाता है तथा गुर्दों को कमजोर करता है। यह एक बहुत ही भयंकर विष है। इसका प्रभाव शराब या तम्बाकू में पाए जाने वाले विष ‘निकोटीन’ के समान होता है। इससे शरीर बहुत जल्दी निर्बल और खोखला हो जाता है। यह दिल की धड़कन को बढ़ाता है और इसके सेवन से कभी-कभी तो व्यक्ति की धड़कन एकदम बंद हो जाती है और व्यक्ति मौत का शिकार हो जाता है। ‘कैफीन’ विष का ही प्रभाव है कि नशे के वशीभूत होकर व्यक्ति इसका आदी हो जाता है। कैफीन विष के कारण मूत्र की मात्रा में लगभग तीन गुना वृध्दि हो जाती है परन्तु उसके द्वारा शरीर का दूषित मल, जिसका शरीर की शुध्दि के लिए मूत्र द्वारा बाहर निकलना आवश्यक है, वह शरीर के अंदर ही जमा रहता है।फलस्वरूप ऐसे व्यक्तियों को गठिया, गुर्दे और हृदय संबंधी रोगों का शिकार होना पड़ता है।
वॉलाटाइल :
वॉलाटाइल नामक विष आँतों के ऊपर हानिकारक प्रभाव डालता है।
कार्बोनिक अम्ल :
कार्बोनिक अम्ल चाय में पाया जाने वाला कार्बोनिक अम्ल से एसिडिटी होती है।
पैमिन :
पैमिन से पाचनतंत्र कमजोर हो जाता है।
एरोमोलीक :
एरोमोलीक नामक विष भी आँतों के ऊपर हानिकारक प्रभाव डालता है।
साइनोजन :
साइनोजन विष अनिद्रा तथा लकवा जैसी भयंकर रोगों के लिए जिम्मेदार होता है।
ऑक्सेलिक अम्ल :
ऑक्सेलिक अम्ल शरीर के लिए अत्यंत हानिकारक है।
स्टिनॉयल :
स्टिनॉयल रक्तविकार तथा नपुंसकता पैदा करता है।
शरीर पर पड़ने वाले चाय के अन्य दुष्प्रभाव :
- चाय का प्रभाव अत्यधिक उत्तेजना पैदा करने वाला है। यह शरीर एवं मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव डालता है।
विशेषज्ञों के मतानुसार चाय का नशा अंदर ही अंदर अपना कार्य करता रहता है और धीरे-धीरे कुछ ही दिनों में शरीर को घुन की तरह खा जाता है। - आज हृदय तथा रक्त वाहिनियों के रोगों से पीड़ित व्यक्तियों की संख्या में दिन-प्रतिदिन वृध्दि हो रही है और इसका मुख्य कारण चाय का दिनोंदिन बढ़ता चलन ही है।
- बादी, पेट फूलना, पेट दर्द, कब्ज, बदहजमी, हृदय गति अनियमित रूप से चलना और नींद का न आना आदि समस्याएं चाय पीने वाले लोगों में अक्सर पाई जाती है।
- अधिक चाय पीने से दांतों एवं नेत्रों के विभिन्न रोग भी पैदा होने लगते हैं तथा चेहरे की कांति भी नष्ट होती जाती है।
- चाय के सेवन करने से शरीर में उपलब्ध विटामिन्स नष्ट होते हैं। इसके सेवन से स्मरण शक्ति में दुर्बलता आती है। - चाय का सेवन लिवर पर बुरा प्रभाव डालता है।
- जो लोग चाय बहुत पीते है उनकी आंतें जवाब दे जाती है | कब्ज घर कर जाती है और मल निष्कासन में कठिनाई आती है।
- चाय में उपलब्ध यूरिक एसिड से मूत्राशय या मूत्र नलिकायें निर्बल हो जाती हैं, जिसके परिणाम स्वरूप चाय का सेवन करने वाले व्यक्ति को बार-बार मूत्र आने की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
- अक्सर लोग चाय के साथ नमकीन, नमकीन बिस्कुट, पकौड़ी आदि लेते है | यह विरुद्ध आहार है, इससे त्वचा रोग होते है।
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