जोड़ों का दर्द :
बथुआ के ताजा पत्तों का रस 15 ग्राम प्रतिदिन पीने से गठिया दूर होता है | इस रस में नमक - चीनी आदि कुछ न मिलाएँ | नित्य प्रातः खाली पेट लें या फिर शाम चार बजे | इसके लेने के आगे पीछे दो - दो घंटे कुछ न लें | दो तीन माह तक लें |
गला बैठना :
मुलेठी के चूर्ण को पान के पत्ते में रखकर खाने से बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है | अथवा सोते समय 1 ग्राम मुलेठी के चूर्ण को मुँह में रखकर कुछ देर चबाते रहे | फिर वैसे ही मुँह में रखकर सो जाएँ | प्रातः काल तक गला साफ हो जायेगा एवं गले के दर्द और सूजन में भी लाभ मिलता है |
फटे हाथ पैरों के लिये :
नाभि में प्रतिदिन सरसों का तेल लगाने से होंठ नहीं फटते और फटे हुए होंठ मुलायम और सुन्दर हो जाते है |साथ ही नेत्रों की खुजली एवं खुश्की दूर हो जाती है |
नाभि में प्रतिदिन सरसों का तेल लगाने से होंठ नहीं फटते और फटे हुए होंठ मुलायम और सुन्दर हो जाते है |साथ ही नेत्रों की खुजली एवं खुश्की दूर हो जाती है |
खराश या सूखी खाँसी :
गले में खराश या सूखी खाँसी होने पर पिसी हुई अदरक में गुड़ और घी मिलाकर खाएँ | गुड़ और घी के स्थान पर शहद का प्रयोग भी किया जा सकता है |
दमा :
के रोगियों को तुलसी की 10 पत्तियों के साथ वासा ( अडूसा या वासक ) का 250 मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर दें | लगभग 21 दिनों तक सुबह यह काढ़ा पीने से लाभ मिलता है |
अरुचि के लिये :
भूख न लगती हो तो बराबर मात्रा में मुनक्का ( बीज निकाल दें ) , हरड़ और चीनी को पीसकर चटनी बना लें . इसे पाँच छह ग्राम की मात्रा में ( एक छोटा चम्मच ) , थोड़ा शहद मिला कर खाने से पहले दिन में दो बार चाटें |
बदन का दर्द :
10 ग्राम कपूर , 200 ग्राम सरसों का तेल - दोनों को शीशी में भरकर मजबूत ठक्कन लगा दें तथा शीशी धूप में रख दें | जब दोनों वस्तुएँ मिलकर एक रस होकर घुल जाए तब इस तेल की मालिश से नसों का दर्द , पीठ और कमर का दर्द और , माँसपेशियों के दर्द शीघ्र ही ठीक हो जाते हैं |
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