Friday, January 6

इस समय करेंगे भोजन तो नहीं होगा कोई रोग !

By- Dr.Kailash Dwivedi

हम सभी जानते हैं कि एक दिन में 24 घंटे होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन 24 घंटों को किस प्रकार व्यवस्थित किया जाए कि प्रकृति के अनुरूप हमारी दिनचर्या व्यवस्थित व स्वास्थ्यकर हो जाए | इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि आपको स्वास्थ्य की दृष्टि से चौबीस घंटे में कब सोना है, कब भोजन करना है एवं अन्य दैनिक कार्य करने हैं | इसके लिए सबसे पहले यह समझना होगा कि शरीर की कौन सी जैव उर्जा किस समय शरीर को प्रभावित करती है | तीन प्रमुख उर्जा जिसे आयुर्वेद वात, पित्त एवं कफ़ के रूप में परिभाषित करता है, के अनुसार दिन के चौबीस घंटों का विभाजन किया जा सकता है |


वात : शरीर की प्रत्येक प्रकार की  चेष्टाओं एवं गतियों का संचालक होता है | रात्रि 12 बजे से प्रातः 8 बजे तक शरीर में वात सक्रिय रहता है |

पित्त : शरीर में होने वाली विभिन्न रासायनिक क्रियायों में पित्त की महत्वपूर्ण भूमिका होती है | दिन के 24 घंटों में प्रातः 8 बजे से अपराह्न् 4 बजे तक पित्त का समय माना गया है |

कफ़ : शरीर में स्थिरता का प्रतीक माना गया है | पूरे दिन सक्रियता के बाद विश्राम के लिए आवश्यक तन्द्रा हमें कफ़ से मिलती है | शरीर में कफ़ का समय अपराह्न् 4 बजे से रात्रि 12 बजे तक होता है |

प्रातः का भोजन 10 बजे से :

जैव घड़ी के अनुसार शरीर में पित्त का समय प्रातः 8 बजे से प्रारंभ होता है | प्रातः 8  बजे से अपराह्न् 4 बजे तक के पित्त के समय का उपविभाजन करने पर प्रातः 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक का समय |  पित्त पाचन के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार होता है,  अतः प्रातः 10 बजे से प्रातःकालीन भोजन का समय निर्धारित किया जा सकता है |

सायंकालीन भोजन सायं 6 से 8 बजे तक :

अपराह्न् 4 बजे से रात्रि 12 बजे तक का समय शरीर में कफ़ का समय होता है इसका उपविभाजन करने पर सायं 6 बजे से 8 बजे तक का समय कफ़-पित्त का समय है | अर्थात इस समय कफ़ के साथ पित्त का भी संयोग है अतः भोजन के पाचन के लिए यह समय उपयुक्त है |

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