Sunday, January 8

महौषधि दूब के चमत्कारिक औषधीय प्रयोग



आयुर्वेद में दूब में उपस्थित अनेक औषधीय गुणों के कारण दूब को 'महौषधि' कहा गया है। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार दूब का स्वाद कसैला-मीठा होता है। विभिन्न प्रकार के पैत्तिक एवं कफज विकारों को दूर करने के लिए  दूब का प्रयोग किया जाता है। यह दाह शामक, रक्तदोष, मूर्छा, अतिसार, अर्श, रक्त पित्त, प्रदर, गर्भस्राव, गर्भपात, यौन रोग, मूत्रकृच्छ इत्यादि में विशेष लाभकारी है। दूर्वा कान्तिवर्धक, रक्त स्तंभक, उदर रोग, पीलिया इत्यादि में अपना चमत्कारी प्रभाव दिखाता है।

रोगों में ली जाने वाली मात्रा :



  • दूब का रस 10-20 मिलीलीटर।

  • काढ़ा 40-80 मिलीलीटर।

  • पत्तियों का चूर्ण 1-3 ग्राम।

  • जड़ का चूर्ण 3-6 ग्राम।

विभिन्न भाषाओँ में नाम :



  • हिंदी -       दूब, दुबडा |

  • संस्कृत -   दुर्वा, सहस्त्रवीर्य, अनंत, भार्गवी, शतपर्वा, शतवल्ली |

  • मराठी -    पाढरी दूर्वा, काली दूर्वा |

  • गुजराती -  धोलाध्रो, नीलाध्रो |

  • अंग्रेजी -    कोचग्रास, क्रिपिंग साइनोडन |

  • बंगाली -    नील दुर्वा, सादा दुर्वा आदि नामों से जाना जाता है।

औषधीय प्रयोग :



  • दूब के काढ़े से कुल्ले करने से मूंह के छाले मिट जाते है |

  • नकसीर में इसका रस नाक में डालने से लाभ होता है |

  • दूब के रस को हरा रक्त कहा जाता है . इसे पीने से एनीमिया ठीक हो जाता है |

  • इस पर नंगे पैर चलने से नेत्र ज्योति बढती है |

  • दूब का रस पीने से पित्त जन्य वमन (उल्टी ) ठीक हो जाता है |

  • दूब कुष्ठ (कोढ़), दांतों का दर्द, पित्त की गर्मी के लिए लाभदायक है। इसका लेप लगाने से खुजली शान्त होती है।

  • दूर्वा  में रक्त में ग्लूकोज़ के स्तर को कम करने की क्षमता होती है। इसी कारण यह  मधुमेह रोग नियंत्रित करने में भी सहायक है।

  • दूर्वा घास शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को उन्नत करने में  सहायता करती है। इसमें एंटीवायरल और एंटीमाइक्रोबायल (रोगाणुरोधी-बीमारी को रोकने की क्षमता) गुण होने के कारण यह शरीर के किसी भी बीमारी से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है।

  • दूर्वा के प्रयोग से स्त्रियों के स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं जैसे- सफ़ेद योनि स्राव, बवासीर आदि से राहत मिलती है | इसके लिए दही के साथ दूर्वा घास को मिलाकर सेवन कर सकते हैं।
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  • दूर्वा यू.टी.आई-यूरेनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (मूत्र मार्ग संक्रमण) के उपचार में प्रभावकारी रूप से काम करती है।
  • महिलाओं में जो माँ बच्चों को दूध पिला रही हैं उनके लिए भी लाभकारी होता है क्योंकि यह प्रोलेक्टिन हॉर्मोन को उन्नत करने में भी मदद करती है।

  • दूर्वा घास के लगातार सेवन से पेट की बीमारी का खतरा कुछ हद तक कम होने के साथ पाचन शक्ति भी बढ़ती है। यह कब्ज़,एसिडटी से राहत दिलाने में भी मदद करती है।

  • दूर्वा घास फ्लेवनाइड का प्रधान स्रोत होता है, जिसके कारण यह अल्सर को रोकने में मदद करती है।

  • यह सर्दी-खांसी एवं कफ विकारों को समाप्त करने में मद्दद्गार है।

  • दूर्वा मसूड़ों से रक्त बहने और मुँह से दुर्गंध निकलने की समस्या (पायरिया)से भी राहत दिलाती है।

  • दूर्वा घास त्वचा संबंधी समस्या से भी राहत दिलाने में सहायता करती है। इसमें एन्टी-इन्फ्लैमटेरी (सूजन और जलन को कम करने वाला), एन्टीसेप्टिक गुण होने के कारण त्वचा संबंधी कई समस्याओं, जैसे- खुजली, त्वचा पर चकत्ते और एक्जिमा आदि समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करती है। दूर्वा घास को हल्दी के साथ पीसकर पेस्ट बनाकर त्वचा के ऊपर लगाने से त्वचा संबंधी समस्याओं से कुछ हद तक राहत मिल सकती है। कुष्ठ रोग और खुजली जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में भी सहायता करती है।

  • दूर्वा रक्त को शुद्ध करती है एवं लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने में मदद करती है जिसके कारण हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है।

  • दूर्वा  रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करके हृदय को मजबूती प्रदान करती है।

  • दूर्वा घास पौष्टिकता से भरपूर होने के कारण शरीर को सक्रिय और ऊर्जायुक्त बनाये रखने में बहुत सहायता करती है। यह अनिद्रा रोग, थकान, तनाव जैसे रोगों में प्रभावकारी  है।
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