मौसम के करवट बदलने पर जुकाम की समस्या आमतौर पर हो जाती है। ऐसे में इनसे आराम के लिए जो दवाएं लेते हैं उससे दिक्कत कम होने के बजाय बढ़ जाती है। यहाँ प्रस्तुत हैं इससे बचने एवं उपचार के कुछ उपाय |
बचाव :
• दिन में न सोयें |
• फ्रिज का पानी बिलकुल बंद कर दें |
• नींद से उठते ही ताज़ा (ठंडा) पानी न पियें बल्कि गुनगुना पानी पीना लाभदायक है |
• रात्रि भोजन में दही,चावल जैसे खाद्यों का प्रयोग कदापि न करें |
• दिन में एक – दो बार पानी में अदरख,तुलसी पत्र डालकर उबालें कप में छानने के बाद
स्वादानुसार शहद मिलाकर सिप करके पियें |
• प्रातःकाल सायं की भरी हुयी टंकी के पानी से स्नान न करें | इस पानी में थोडा गर्म पानी
मिलाकर तापमान को सामान्य करके स्नान करें |
• प्रतिदिन 5 मिनट भस्त्रिका प्राणायाम करें | ह्रदय रोगी सावधानी पूर्वक धीरे-धीरे करें |
(भस्त्रिका प्राणायाम – श्वास को फोर्सली लेना और फोर्सली ही छोड़ना)
यदि , जुकाम से ग्रस्त हो जाएँ तो निम्न उपाय करें :
सूर्यभेदी प्राणायाम की विधिः
प्रातः पद्मासन अथवा सुखासन में बैठकर बायें नथुने को बंद करें और दायें नथुने से धीरे-धीरे अधिक से अधिक गहरा श्वास भरें। श्वास लेते समय आवाज न हो इसका ख्याल रखें। अब अपनी क्षमता के अनुसार श्वास भीतर ही रोक रखें। जब श्वास न रोक सकें तब बायें नथुने से धीरे धीरे बाहर छोड़ें। झटके से न छोड़ें। यह 1 चक्र हुआ | पुनः दाहिने नथुने से ही श्वास भरें और बाएं से छोड़ें | इस प्रकार 3 से 5 चक्र करें इससे सूर्य नाड़ी क्रियाशील हो जाती है। पाँच सूर्यभेदी प्राणायाम नियमित रूप से करने से कफ-सम्बन्धी समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं। सर्दी, खाँसी जुकाम दूर हो जाते हैं व पुराना जमा हुआ कफ पिघल जाता है।
इसके अतिरिक्त :
बचाव :
• दिन में न सोयें |
• फ्रिज का पानी बिलकुल बंद कर दें |
• नींद से उठते ही ताज़ा (ठंडा) पानी न पियें बल्कि गुनगुना पानी पीना लाभदायक है |
• रात्रि भोजन में दही,चावल जैसे खाद्यों का प्रयोग कदापि न करें |
• दिन में एक – दो बार पानी में अदरख,तुलसी पत्र डालकर उबालें कप में छानने के बाद
स्वादानुसार शहद मिलाकर सिप करके पियें |
• प्रातःकाल सायं की भरी हुयी टंकी के पानी से स्नान न करें | इस पानी में थोडा गर्म पानी
मिलाकर तापमान को सामान्य करके स्नान करें |
• प्रतिदिन 5 मिनट भस्त्रिका प्राणायाम करें | ह्रदय रोगी सावधानी पूर्वक धीरे-धीरे करें |
(भस्त्रिका प्राणायाम – श्वास को फोर्सली लेना और फोर्सली ही छोड़ना)
यदि , जुकाम से ग्रस्त हो जाएँ तो निम्न उपाय करें :
- यदि एक तरफ की नासिका बंद हो गयी है तो जिस तरफ की नासिका बंद है तो कुछ देर उसके विपरीत करवट ले कर लेट जाएँ, जैसे बायीं नासिका बंद है तो दाहिने करवट लेतें | नासिका खुल जाएगी | ज्यादा देर तक नासिका को बंद न रहने दें, बंद होते ही तुरंत उसको खोल लें ऐसा करने से जुकाम ज्यादा दिन नही रुक सकता |
- भस्त्रिका प्राणायाम के अतिरिक्त सुर्यभेदी प्राणायाम करें |
सूर्यभेदी प्राणायाम की विधिः
प्रातः पद्मासन अथवा सुखासन में बैठकर बायें नथुने को बंद करें और दायें नथुने से धीरे-धीरे अधिक से अधिक गहरा श्वास भरें। श्वास लेते समय आवाज न हो इसका ख्याल रखें। अब अपनी क्षमता के अनुसार श्वास भीतर ही रोक रखें। जब श्वास न रोक सकें तब बायें नथुने से धीरे धीरे बाहर छोड़ें। झटके से न छोड़ें। यह 1 चक्र हुआ | पुनः दाहिने नथुने से ही श्वास भरें और बाएं से छोड़ें | इस प्रकार 3 से 5 चक्र करें इससे सूर्य नाड़ी क्रियाशील हो जाती है। पाँच सूर्यभेदी प्राणायाम नियमित रूप से करने से कफ-सम्बन्धी समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं। सर्दी, खाँसी जुकाम दूर हो जाते हैं व पुराना जमा हुआ कफ पिघल जाता है।
इसके अतिरिक्त :
- गर्म पानी, सूप आदि का सेवन कफ ढीला करने में मदद करता है।
- कैफीन और एल्कोहल का सेवन न करें क्योंकि इनसे यूरीन अधिक होती है और शरीर का फ्लूएड कम होता है।
- भाप लेने से भी कफ की स्थिति में बहुत आराम मिलता है लेकिन अगर भाप के पानी में यूकोलिप्टस के तेल या पेपरमेंट ऑयल की दो बूंद डाल लें तो इससे कफ की जकड़न तेजी से खुल जाती है।
- तीन से चार लहसुन के जवे लें, उनके बारीक काट लें और शहद में मिलाएं। दिन में दो बार एक चम्मच इस मिश्रण का सेवन रोज करें |
- खाँसी होनेपर प्याज की 8 से 10 बूंदों में 1 चम्मच शहद मिलाकर चाटे |
- सर्दी-खाँसी और छींक होनेपर एक छोटी इलायची, एक टुकड़ा अदरक, लौंग तथा पाँच तुलसी के पत्ते एक साथ पान में रखकर खाएँ।
- त्रिकटु चूर्ण चौथाई चम्मच को एक चम्मच शहद में मिलाकर दिन में तीन बार चाटें |
- सोते समय गर्म पानी में 10 मिनट तक पैर डालकर बैठे,तत्पश्चात पैर पोंछकर तलवों में सरसों के तेल की मालिश करें एवं पैरों को ढककर सो जाएँ |
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