Tuesday, March 31

पीलिया (Jaundice)

लक्षण :- 

  1. भोजन की इच्छा बिलकुल न होना तथा भोजन के नाम से ही अरुचि होना इस रोग का प्रधान लक्षण है | 
  2. रोगी को भूख लगना बंद हो जाती है उसका जी मिचलाता है | 
  3. कभी कभी उसे उलटी भी हो जाती है कब्ज  रहती है 
  4. लिवर में शोथ होने से आमाशय में या फिर दाहिनी पसलियों के नीचे भारीपन या हल्का सा दर्द का लक्षण भी महसूस होता है |
  5. शरीर में बिष संचार के कारण सिरदर्द  रहता है शरीर थका थका व असमर्थ लगने लगने लगता है |
  6. शाम के समय तबियत गिरी गिरी रहती है शरीर में बिष संचार के कारण 100 से 102 डिग्री तक बुखार भी रहता है |
  7. पित्त के रक्त में जाने से मूत्र गहरे रंग, सरसों के तेल के सामान आता है तथा रोग के बढ़ने पर आंत में पित्त के कम आने से मल का रंग फीका हो जाता है मल मात्रा में अधिक व दुर्गंधित होता है | 
  8.  त्वचा एवं आँखों का रंग पीला हो जाता है |

   पीलिया में परहेज :

  • पीलिया के रोगियों को मैदा,मिठाइयां, तले हुए पदार्थ, अधिक मिर्च मसाले, उड़द की दाल, खोया,  नहीं खाना चाहिए। चिनाई रहित हल्का,  पाचक भोजन लिया जाये तो यह भी जल्द ठीक हो जाता है |
  • पीलिया के रोगियों को ऐसा भोजन करना चाहिए जो कि आसानी से पच जाए जैसे खिचड़ी, दलिया, फल, सब्जियां आदि।

उपचार :

  1. एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच पिसा हुआ त्रिफला रात भर के लिए भिगोकर रख दें। सुबह इस पानी को छान कर पी जाएँ। ऐसा 12 दिनों तक करें।
  2. इस रोग से पीड़ित रोगियों को नींबू बहुत फायदा पहुंचाता है। रोगी को 20 ml नींबू का रस पानी के साथ दिन में 2 से तीन बार लेना चाहिए।
  3. गोभी और गाजर का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक गिलास रस तैयार करें। इस रस को कुछ दिनों तक रोगी को पिलाएँ।
  4. टमाटर पीलिया के रोगी के बहुत लाभदायक होता है। एक गिलास टमाटर के जूस में चुटकी भर काली मिर्च और नमक मिलाएं। यह जूस सुबह के समय लें। पीलिया को ठीक करने का यह एक अच्छा घरेलू उपचार है।
  5. नीम के पत्तों को धोकर इनका रस निकाले। रोगी को दिन में दो बार एक बड़ा चम्मच पिलाएँ। इससे
  6. पीलिया में बहुत सुधार आएगा।
  7. पीलिया के रोगी को लहसुन की पांच कलियाँ एक गिलास दूध में उबालकर दूध पीना चाहिए , लहसुन की कलियाँ भी खा लें। इससे बहुत लाभ मिलेगा।
  8. रोगी को दिन में तीन बार पपीता  खिलाना चाहिए।


रोग की रोकथाम एवं बचाव :

  • खाना बनाने, परोसने, खाने से पहले व बाद में और शौच जाने के बाद में हाथ साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए।
  • भोजन जालीदार अलमारी या ढक्कन से ढक कर रखना चाहिये, ताकि मक्खियों व धूल से बचाया जा सकें।
  • ताजा व शुद्व गर्म भोजन करें दूध व पानी उबाल कर काम में लें।
  • पीने के लिये पानी नल, हैण्डपम्प या आदर्श कुओं को ही काम में लें तथा मल, मूत्र, कूडा करकट सही स्थान पर
  • गढ्ढा खोदकर दबाना या जला देना चाहिये।
  • गंदे, सडे, गले व कटे हुये फल नहीं खायें धूल पडी या मक्खियॉं बैठी मिठाईयॉं का सेवन नहीं करें।
  • स्वच्छ शौचालय का प्रयोग करें यदि शौचालय में शौच नहीं जाकर बाहर ही जाना पडे तो आवासीय बस्ती से दूर
  • ही जायें तथा शौच के बाद मिट्टी डाल दें।
  • रोगी बच्चों को डॉक्टर जब तक यह न बता दें कि ये रोग मुक्त हो चूके है स्कूल या बाहरी नहीं जाने दे।


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