Saturday, November 14

जानिये शरीर पर कैसे काम करता है एक्यूप्रेशर !

प्राचीनकाल से से ही शरीर के रोगों को दूर करने के लिए जितनी चिकित्सा पद्धतियाँ प्रचलित हुयी हैं उनमें एक्यूप्रेशर सबसे प्राचीन एवं प्रभावशाली पद्धति कही जा सकती है |एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति पूर्णतया प्राकृतिक एवं हानिरहित है | इस पद्धति के अनुसार के रोगों को दूर करने कि शक्ति शरीर में ही निहित है, आवश्यकता है तो सिर्फ इसे सक्रिय करने की | एक्यूप्रेशर का अविष्कार लगभग 6000 वर्ष पूर्व भारत में हुआ था, इसका उल्लेख आयुर्वेद में मिलता है | प्राचीन काल में विदेशी विशेषकर चीनी यात्री इस ज्ञान को अपने साथ चीन ले गये जिसका वहां पर व्यापक प्रसार हुआ, चीनी चिकित्सकों ने जब इसका रोगनिवारक प्रभाव देखा तो इसे अपनाना प्रारंभ कर दिया एवं लोगों को इसके प्रति जागरूक भी किया यही कारण है कि आज दुनिया एक्यूप्रेशर को चीनी चिकित्सा पद्धति के रूप में जानती है |

एक्यूप्रेशर जिसका आधार प्रेशर या गहरी मालिश है के सम्बन्ध में प्राचीन भारतीय चिकित्सकों में महर्षि चरक का नाम उल्लेखनीय है | इनका मत था कि दबाब के साथ मालिश करने से रक्त का संचार सुचारू हो जाता है फलस्वरूप शरीर कि शक्ति एवं स्फूर्ति बढ़ जाती है |शारीरिक शक्ति बढ़ने से शरीर के मल निष्कासक अंग सक्रिय हो उठते है एवं बड़ी आंत,गुर्दे,त्वचा एवं फेफड़ों के माध्यम से शरीर कि गंदगी बाहर निकलनी प्रारंभ हो जाती है परिणामस्वरुप शरीर रोगमुक्त होने लगता है | एक्यूप्रेशर सिर्फ गहरी मालिश ही नही बल्कि - हथेलियों, तलवों, चेहरे, कानों आदि के विशेष केन्द्रों पर दबाब डालने की एक विधा है | इन केन्द्रों को एक्यूप्रेशर में प्रतिबिम्ब केन्द्रों (Reflex centres) की संज्ञा दी गयी है जोकि शरीर के आंतरिक अंगों से सम्बन्ध रखते हैं | रोग की अवस्था में इन केन्द्रों पर दबाब देने से काफी दर्द होता है |

जिस प्रकार बिजली के स्विच को ऑन करने से स्विच से सम्बंधित उपकरण में विद्युत् प्रवाह होने लगता है तथा वे उपकरण सक्रिय हो जाते हैं उसी प्रकार प्रतिबिम्ब केंद्र पर दबाब डालने से केंद्र से सम्बंधित अंग में शरीर की ऊर्जा प्रवाहित होकर उस अंग को सक्रिय कर देती है फलस्वरूप वह अंग रोगमुक्त होने लगता है | यही सिद्धांत एक्यूप्रेशर चिकित्सा का आधार है |

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