Wednesday, February 10

खट्टी डकारें आती हैं तो करें चन्द्रभेदी प्राणायाम



 By-Yogaguru Suneel Singh


स प्राणायाम के अभ्यास से ईडा नाड़ी यानि चन्द्र नाड़ी की शुद्धी होती है। यह भी कहा जा सकता है कि चन्द्र नाड़ी का भेदन कहलाता है चन्द्रभेदी प्राणायाम।



विधि :




  1. जमीन पर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। कमर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।

  2. बायें हाथ को बायें घुटने पर ज्ञान मुद्रा में रखें और फिर दायें हाथ के अंगूठे से दांये छिद्र को दबाकर बंद करें।

  3. बायें नसिका छिद्र से लम्बी गहरी श्वास भरें और हाथ की अंगुलियों से बायें नाक के छिद्र को भी बंद कर लें।

  4. अपनी क्षमतानुसार आप जितनी देर आसानी पूर्वक श्वास रोक सकते हैं रोके, ना रोक पाने की अवस्था में दायें नसिका छिद्र से श्वास बाहर निकालें।

  5. यह चन्द्रभेदी प्राणायाम का एक चक्र पूरा हुआ। कम से कम 10 चक्रों का अभ्यास अवश्य करें।



लाभ व प्रभाव :




  • चन्द्रभेदी प्राणायाम के अभ्यास से शरीर और मस्तिष्क की गर्मी दूर होती है।

  • शरीर में शीतलता का आभास होता है। पित्त और खट्टी डकारे बंद हो जाती है।

  • पाचन संस्थान जनित रोग दूर हो जाते है।

  • यह प्राणायाम उच्च-रक्तचाप और हृदयरोग में रामबाण का काम करता है।

  • चर्मरोग, मुँह में छाले और पेट की गर्मी दूर करता है।



सावधानियाँ :



निम्न रक्तचाप, दमा के रोगी इसका अभ्यास ना करें। हृदय रोगी योग गुरु के सान्निध्य में ही अभ्यास करें।




(Yoga guru suneel singh is one of the top 5 yoga gurus in India.)




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