| ऋतु | हिन्दू मास | ग्रेगरियन मास |
| वसन्त (Spring) | चैत्र से वैशाख | मार्च से अप्रैल |
| ग्रीष्म (Summer) | ज्येष्ठ से आषाढ | मई से जून |
| वर्षा (Rainy) | श्रावन से भाद्रपद | जुलाई से सितम्बर |
| शरद् (Autumn) | आश्विन से कार्तिक | अक्टूबर से नवम्बर |
| हेमन्त (pre-winter) | मार्गशीर्ष से पौष | दिसम्बर से 15 जनवरी |
| शिशिर (Winter) | माघ से फाल्गुन | 16 जनवरी से फरवरी |
इस आलेख में हम चर्चा करेंगे वर्षा ऋतु के विषय में -
वर्षा ऋतु में होने वाले रोग :
- मंदाग्नि
- अजीर्ण
- बुखार
- वायुदोष का प्रकोप
- सर्दी, खाँसी
- पेट के रोग
- कब्जियत
- प्रवाहिका
- शारीरिक कमजोरी
- रक्तविकार
- जोड़ों का दर्द
- सूजन
- दाद कृमिरोग
- ज्वर
- मलेरिया
वर्षा ऋतु में सेवन योग्य आहार :
- इस ऋतु में जठराग्नि प्रदीप्त करनेवाला वात-पित्तशामक आहार लेना चाहिए | इसके लिए पुदीना, हरा धनिया, सोंठ, अजवायन, मेथी, जीरा, हींग, काली मिर्च का प्रयोग करें |
- खीरा, लौकी, पेठा, तोरई, आम, जामुन, पपीता सेवनीय हैं |
- ताजी छाछ में काली मिर्च, सेंधा, जीरा, धनिया, पुदीना डालकर ले सकते हैं |
- गरम दूध, साठी के चावल, पुराना अनाज, गेहूँ, चावल, जौ, मूंग खट्टे एवं खारे पदार्थ, दलिया, गाय का घी, तिल एवं सरसों का तेल का सेवन लाभदायी है।
- उपवास और लघु भोजन हितकारी है | रात को देर से भोजन न करे |
- 500 ग्राम हरड़ चूर्ण और 50 ग्राम सेंधा नमक का मिश्रण बनाकर प्रतिदिन 5-6 ग्राम लेना चाहिए।
- वर्षा ऋतु में शहद का सेवन अत्यन्त हितकर है। अदरक, लहसुन,प्याज व नींबू का सेवन वर्षा ऋतु में विशेष लाभदायी है।
- इस ऋतु में फलों में आम,सेब तथा जामुन सर्वोत्तम माने गए हैं।
- वर्षा ऋतु में चूसकर खाया हुआ आम पचने में हल्का, वायु तथा पित्तविकारों का शमन करने वाला होता है।
क्या न खाएं :
- देर से पचनेवाले, भारी, तले, तीखे पदार्थ न लें |
- बिस्कुट, डबलरोटी, जलेबी आदि मैदे की चीजे, अंकुरित अनाज, ठंडे पेय पदार्थ व आइसक्रीम के सेवन से बचे |
- वर्षा ऋतु में दही पूर्णतः निषिध्द हैं |
- वर्षा ऋतु में उड़द, अरहर, चौला आदि दालें नहीं खाना चाहिए |
- नदी, तालाब एवं कुएँ का बिना उबाला हुआ पानी, नहीं पीना चाहिए |
- सब्जियों में पत्तेदार,आलू, गोभी, ग्वारफली, भिंडी त्याज्य हैं |
- इस ऋतु में सूखा मेवा, मिठाई त्याज्य हैं।
क्या करें :
- वातावरण में नमी और आर्द्रता के कारण उत्पन्न कीटाणुओं से सुरक्षा हेतु धूप, हवन से घर के वातावरण को शुद्ध करें |
- फिनायल या गोमूत्र से घर को साफ करें |
- तुलसी के पोंधे लगायें |
- उबटन से स्नान, तेल की मालिश , हल्का व्यायाम, स्वच्छ व हलके वस्त्र पहनना हितकारी हैं |
- मच्छरों से सुरक्षा के लिए घर में गेंदे के पौधों के गमले अथवा गेंदे के फुल रखे और नीम के पत्ते, गोबर के कंड़े व गूगल आदि का धुआँ करे | घर के आसपास पानी इकठ्ठा न होने दे |
क्या न करें :
- बारिश में न भींगे |
- भीगे कपड़े पहनकर न रखें |
- रात्रि-जागरण, दिन में शयन एवं खुले में शयन न करें |
- अति परिश्रम एवं अति व्यायाम न करें |
- नदी में तैरना, धूप में बैठना, खुले बदन घूमना त्याज्य है।
- बाहर से घर में वर्षा से भीगकर लौटने पर स्वच्छ जल से स्नान अवश्य करें।
- स्नान के तुरन्त बाद गीले शरीर पंखे की हवा में नहीं जाएँ।
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