Friday, July 8

वर्षा ऋतु में रोगों से बचने के लिए इसे अपनाएं !

वभिन्न ऋतुओं में मौसम की दशाएं एक खास प्रकार की होती हैं। यह अवधि एक वर्ष को कई भागों में विभाजित करती है जिनके दौरान पृथ्वी के सूर्य की परिक्रमा के परिणामस्वरूप दिन की अवधि, तापमान, वर्षा, आर्द्रता इत्यादि मौसमी दशाएँ एक चक्रीय रूप में बदलती हैं। भारत में परंपरागत रूप से मुख्यतः छः ऋतुएं परिभाषित की गयी हैं।






































ऋतुहिन्दू मासग्रेगरियन मास
वसन्त (Spring)चैत्र से वैशाखमार्च से अप्रैल
ग्रीष्म (Summer)ज्येष्ठ से आषाढमई से जून
वर्षा (Rainy)श्रावन से भाद्रपदजुलाई से सितम्बर
शरद् (Autumn)आश्विन से कार्तिकअक्टूबर से नवम्बर
हेमन्त (pre-winter)मार्गशीर्ष से पौषदिसम्बर से 15 जनवरी
शिशिर (Winter)माघ से फाल्गुन16 जनवरी से फरवरी

इस आलेख में हम चर्चा करेंगे वर्षा ऋतु के विषय में -

वर्षा ऋतु में होने वाले रोग :



  • मंदाग्नि

  • अजीर्ण

  • बुखार

  • वायुदोष का प्रकोप

  • सर्दी, खाँसी

  • पेट के रोग

  • कब्जियत

  • प्रवाहिका

  • शारीरिक कमजोरी

  • रक्तविकार

  • जोड़ों का दर्द

  • सूजन

  • दाद कृमिरोग

  • ज्वर

  • मलेरिया


वर्षा ऋतु में सेवन योग्य आहार :



  • इस ऋतु में जठराग्नि प्रदीप्त करनेवाला वात-पित्तशामक आहार लेना चाहिए | इसके लिए पुदीना, हरा धनिया, सोंठ, अजवायन, मेथी, जीरा, हींग, काली मिर्च का प्रयोग करें |

  • खीरा, लौकी, पेठा, तोरई, आम, जामुन, पपीता सेवनीय हैं |

  • ताजी छाछ में काली मिर्च, सेंधा, जीरा, धनिया, पुदीना डालकर ले सकते हैं |

  • गरम दूध, साठी के चावल, पुराना अनाज, गेहूँ, चावल, जौ, मूंग खट्टे एवं खारे पदार्थ, दलिया, गाय का घी, तिल एवं सरसों का तेल का सेवन लाभदायी है।

  • उपवास और लघु भोजन हितकारी है | रात को देर से भोजन न करे |

  • 500 ग्राम हरड़ चूर्ण और 50 ग्राम सेंधा नमक का मिश्रण बनाकर प्रतिदिन 5-6 ग्राम लेना चाहिए।

  • वर्षा ऋतु में शहद का सेवन अत्यन्त हितकर है। अदरक, लहसुन,प्याज व नींबू का सेवन वर्षा ऋतु में विशेष लाभदायी है।

  • इस ऋतु में फलों में आम,सेब तथा जामुन सर्वोत्तम माने गए हैं।

  • वर्षा ऋतु में चूसकर खाया हुआ आम पचने में हल्का, वायु तथा पित्तविकारों का शमन करने वाला होता है।


क्या न खाएं :



  • देर से पचनेवाले, भारी, तले, तीखे पदार्थ न लें |

  • बिस्कुट, डबलरोटी, जलेबी आदि मैदे की चीजे, अंकुरित अनाज, ठंडे पेय पदार्थ व आइसक्रीम के सेवन से बचे |

  • वर्षा ऋतु में दही पूर्णतः निषिध्द हैं |

  • वर्षा ऋतु में उड़द, अरहर, चौला आदि दालें नहीं खाना चाहिए |

  • नदी, तालाब एवं कुएँ का बिना उबाला हुआ पानी, नहीं पीना चाहिए |

  • सब्जियों में पत्तेदार,आलू, गोभी, ग्वारफली, भिंडी त्याज्य हैं |

  • इस ऋतु में सूखा मेवा, मिठाई त्याज्य हैं।


क्या करें :



  • वातावरण में नमी और आर्द्रता के कारण उत्पन्न कीटाणुओं से सुरक्षा हेतु धूप, हवन से घर के वातावरण को शुद्ध करें |

  • फिनायल या गोमूत्र से घर को साफ करें |

  • तुलसी के पोंधे लगायें |

  • उबटन से स्नान, तेल की मालिश , हल्का व्यायाम, स्वच्छ व हलके वस्त्र पहनना हितकारी हैं |

  • मच्छरों से सुरक्षा के लिए घर में गेंदे के पौधों के गमले अथवा गेंदे के फुल रखे और नीम के पत्ते, गोबर के कंड़े व गूगल आदि का धुआँ करे | घर के आसपास पानी इकठ्ठा न होने दे |


क्या न करें :



  • बारिश में न भींगे |

  • भीगे कपड़े पहनकर न रखें |

  • रात्रि-जागरण, दिन में शयन एवं खुले में शयन न करें |

  • अति परिश्रम एवं अति व्यायाम न करें |

  • नदी में तैरना, धूप में बैठना, खुले बदन घूमना त्याज्य है।

  • बाहर से घर में वर्षा से भीगकर लौटने पर स्वच्छ जल से स्नान अवश्य करें।

  • स्नान के तुरन्त बाद गीले शरीर पंखे की हवा में नहीं जाएँ।

No comments:

Post a Comment