Wednesday, September 28

जानिए , हमारे देश की पुरानी मान्यतायें जिनसे लोग अनुमान लगाते हैं कि होनेवाला बच्चा लड़का है या लड़की !

यूँ तो भ्रूण का लिंग परीक्षण हमारे देश में क़ानूनी अपराध है लेकिन फिर भी प्रेगनेंसी के दौरान माता-पिता के साथ घरवालों और रिश्तेदारों में भी काफी उत्सुकता देखी जाती है।और इस बात को सभी जानना चाहते हैं कि आनेवाला बच्चा लड़की है या लड़का। हमारे देश की ऐसी कई मान्यतायें हैं जिनसे लोग अनुमान लगाते हैं कि होनेवाला बच्चा लड़का है या लड़की | 
अस्वीकरण - इस लेख का उद्देश्य केवल पुरानी मान्यताओं से अवगत कराना है, इसलिए इसे पढ़कर कोई भी गैर क़ानूनी कदम न उठाया जाये, ऐसी पाठकों से अपेक्षा है | यदि कोई ऐसा करता है तो इसके लिए लेखक या nihsarg.com जिम्मेदार नहीं होगा |

आईये जानते हैं कौन सी हैं वे मान्यताएं | इन पुराने तरीकों को इस्तेमाल करने से किसी का नुकसान नहीं होता। साथ ही ध्यान रहे कि इन तरीकों पर पूरी तरह से भरोसा करना भी अच्छा नहीं हैं । हर प्रेगनेंसी अलग है और उसके लक्षण भी। हर प्रेगनेंसी में मां को अलग-अलग लक्षण महसूस होते हैं और अगर आप वे लक्षण महसूस कर रही हैं जो गर्भ में एक लड़की के होने पर होते हैं। लेकिन आपको बेटा पैदा होता है तो दुखी न हों। आखिरकार बच्चा तो खुशियों की पोटली और आशिर्वाद है तो भला उसके लड़के या लड़की होने से क्या फर्क पड़ता है।

पेट का आकार :

जी हां, हमारे देश में एक पुरानी मान्यता है कि मां के पेट के आकार से आसानी से पता लगाया जा सकता है कि होने वाला बच्चा लड़का है या लड़की। अगर आपका पेट आगे की तरफ निकला हुआ है तो हो सकता है कि आपके पेट में बेटा हो। जबकि दूसरी तरफ अगर आपका पेट गोल सुदृढ़ और बड़ा दिखायी पड़ता है तो हो सकता है कि आपके घर एक नन्हीं राजकुमारी आने वाली है।

बच्चे का लात मारना :

बच्चे पेट में लात मारते ही हैं। लेकिन बच्चा कितनी बार और कहां लात मारता है इससे पता लगाया जा सकता है कि बच्चा लड़की है या लड़का। जी हां, ऐसा कहा जाता है कि पेट में रहते हुए बच्चा अगर पसली के पास लात मारे तो वह लड़की है। जबकि पेट के निचले हिस्से में लात मारे तो ऐसा माना जाएगा कि होनेवाला बच्चा लड़का है।

मूड स्विंग :

जर्नल साइकोलॉजी एंड बिहेवियर में छपी एक स्टडी के आधार पर यह कहा जा सकता है कि वो महिलाएं जिन्हें प्रेगनेंसी के पहले ट्राइमेस्टर (पहली तिमाही) के दौरान किसी विशेष बात और दूसरी-तीसरी तिमाही में हर बात पर दुख या पछतावा महसूस हो, तो ऐसा कहा जाता है कि होनेवाला बच्चा लड़का होगा। जबकि पेट में लड़की होने पर मां मिली-जुली भावनाएं महसूस करती हैं। वैसे इससे एक बात का तो अंदाजा लगाया ही जा सकता है कि पुरुष हर बात के लिए बेचैन क्यों रहते हैं। आपको जानकर होगी हैरानी कि आप बच्चे के साथ एक्सरसाइज भी कर सकती हैं।

खाने से नफरत :

क्या आपने कभी सोचा है जहां प्रेगनेंसी के दौरान बहुत-सी महिलाएं बहुत ज़्यादा खाना खाती हैं वहीं कुछ को खाने से नफरत क्यों होने लगती है! दरअसल यह बदलाव बच्चे के जेंडर पर भी निर्भर करता है। जी हां, एक स्टडी के अनुसार जिन मांओं को खाने से नफरत या खाना खाने के बाद उल्टी की शिकायत बहुत अधिक होती है उनका होनेवाला बच्चा लड़का होता है। एक स्टडी के अनुसार मां के शरीर को एक नर भ्रूण को अधिक सुरक्षा प्रदान करनी पड़ती है क्योंकि नर भ्रूण मादा भ्रूण से अधिक असुरक्षित है। 

चुनिंदा चीजें खाना :

क्या आपको दिनभर मिठाई और आईसक्रीम खाने का मन करता है? तो तय है कि आप एक लड़की को जन्म देनेवाली हैं। दरअसल लड़कियां अच्छी और मीठी चीजों से बनती हैं। लेकिन अगर आपको मसालेदार चीजें खाने का मन हो तो समझ जाइए कि आपके घर में एक छोटे नवाब आने वाले हैं।

ब्रेस्ट साइज में बदलाव :

प्रेगनेंसी के दौरान आपके ब्रेस्ट्स में भी कई बदलाव होते हैं। अगर आपके ब्रेस्ट अपने आकार से भारी, मज़बूत और बड़े महसूस हों तो आपको एक बेटी होनेवाली है और अगर आपके ब्रेस्ट्स में कोई विशेष बदलाव नहीं होता तो हो सकता है कि आपको एक बेटा होनेवाला है। 

फेस रीडिंग :

आप प्रेगनेंसी के दौरान कैसी दिखती हैं? क्या आपके बाल बेजान हो गए हैं और क्या आपको पिम्पल भी हो रहे हैं? तो अगर बड़े-बुज़ुर्गों की बात माने तो आपके गर्भ में एक बेटी है। लेकिन अगर आप बहुत सुंदर दिखने लगी हैं, आपके बाल सुंदर और नाखून चमकीले हो गए हैं तो आपको बेटा होनेवाला है। वैसे बहुत से लोग इन बातों को पूरी तरह से उल्टा भी कहते हैं।

वेडिंग रिंग टेस्ट :

क्या आप जानते हैं कि यह टेस्ट दुनियाभर में ट्राई किया जानेवाला तरीका है? जी हां, इस टेस्ट में लोग शादी या सगाई की अंगूठी को एक धागे से बांधकर मां के पेट पर बांधते हैं। अगर यह अंगूठी आगे-पीछे जाती है तो होनेवाली संतान लड़का होती है और अगर यह गोल-गोल घूमती है तो पेट में लड़की है। इसी तरह पेन्डलम मेथड भी अपनाया जाता है। जहां एक सुई को किसी धागे से बांधा जाता है। मां को बिस्तर पर पीठ के बल लिटाकर इसे मां के पेट के सामने लटकाया जाता है। अगर सुई गोल-गोल (घड़ी की दिशा में) घूमती है तो आनेवाला बच्चा लड़की है और अगर नहीं तो वह लड़का है।

भ्रूण की धड़कन :

यह तरीका थोड़ा विश्वसनीय और वैज्ञानिक प्रतीत होता है। हालांकि इसका कोई सबूत नहीं है। ऐसा माना जाता है कि अगर भ्रूण की धड़कन या हार्ट रेट140 बीएमपी से कम है को वह एक लड़का है और यह रेट ज्यादा है तो आप एक बेटी का स्वागत करने के लिए तैयार हो जाइए।

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