सोरियासिस एक प्रकार का चर्म रोग है जिसमें त्वचा में सेल्स की तादाद बढने लगती है। चमडी मोटी होने लगती है और उस पर पपडियां उत्पन्न हो जाती हैं। ये पपडिया सफ़ेद चमकीली हो सकती हैं।इस रोग के भयानक रुप में पूरा शरीर मोटी लाल रंग की पपडीदार चमडी से ढक जाता है।यह रोग अधिकतर कुहनी,घुटनों और खोपडी पर होता है। अच्छी बात ये कि यह रोग छूतहा याने संक्रामक किस्म का नहीं है।
चिकित्सा :
चिकित्सा :
- इस रोग को ठीक करने के लिये जीवन शैली में बदलाव करना जरूरी है। सर्दी के दिनों में 3 लीटर और गर्मी के मौसम मे 5 से 6 लीटर पानी पीना चाहिए, इससे विजातीय पदार्थ शरीर से बाहर निकलेंगे।
- सोरियासिस चिकित्सा का एक नियम यह है कि रोगी को 10 से 15 दिन तक सिर्फ़ फ़लाहार पर रखना चाहिये।
- उसके बाद दूध और फ़लों का रस लेना चाहिए, इस दौरान भोजन में नमक न लें।
- धूम्रपान करना और अधिक शराब पीना विशेष रूप से हानिकारक है। ज्यादा मिर्च मसालेदार चीजें न खाएं।
- रोग ग्रस्त स्थान पर केला का पत्ता रखकर ऊपर कपडा लपेटने से लाभ होता है।
- नींबू के रस में थोडा पानी मिलाकर रोगग्रस्त अंग पर लगाने से भी लाभ मिलता है।
- नींबू का रस तीन घंटे के अंतर से पीते रहने से रोग ठीक होने लगता है।
- 10 बादाम का पावडर बनाकर पानी में उबालें। यह दवा सोरियासिस रोग की जगह पर लगायें रात भर लगी रहने के बाद प्रातः पानी से धो डालें। इससे सोरायसिस में आश्चर्यजनक लाभ होता है |
- पत्ता गोभी सोरियासिस में अच्छा प्रभाव दिखाता है। उपर का पत्ता लेकर पानी से धोलें एवं इसे हथेली से दबाकर सपाट करने के बाद थोडा सा गरम करके प्रभावित हिस्से पर रखकर उपर से सूती कपडा लपेट दें। यह उपचार लम्बे समय तक दिन में दो बार करने से अत्यधिक लाभ होता है।
- एक चम्मच चंदन का पावडर को आधा लीटर पानी मे उबालें। तीसरा हिस्सा रहने पर उतार लें। अब इसमें थोडा गुलाब जल एवं चीनी मिला दें। यह दवा प्रातः,दोपहर,सायं पीने से आशाजनक लाभ मिलताहै।
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