By - Yogaguru Suneel Singh
(Yoga guru suneel singh is one of the top 5 yoga gurus in India.)
जिस प्राणायाम के अभ्यास से अत्यधिक शीतलता की अनुभूति हो उसे शीतली प्राणायाम कहते हैं।
विधि:
- पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। दोनों हाथ की अंगुलियों को ज्ञान मुद्रा में दोनों घुटनो पर रखें, आँखें बन्द करें।
- अपनी जीह्वा (जीभ) को नली के समान बना लें अर्थात् गोल बना लें और मुँह से लम्बी गहरी श्वास आवाज के साथ भरें।
- जितनी देर श्वास को आसानी से रोक सकते हैं, उतनी देर श्वास रोकें फिर धीरे-धीरे नाक से श्वास को बाहर निकाल दें। यह इस प्राणायाम का एक चक्र पूरा हुआ, कम से कम 10 चक्रों का अभ्यास करें।
लाभ व प्रभाव:
- इस प्राणायाम के अभ्यास से बल एवं सौन्दर्य बढ़ता है। रक्त शुद्ध होता है।
- भूख, प्यास, ज्वर (बुखार) और तपेदिक पर विजय प्राप्त होती है।
- शीतली प्राणायाम ज़हर के विनाश को दूर करता है।
- अभ्यासी में अपनी त्वचा को बदलने की सामर्थ्य होती है।
- अन्न, जल के बिना रहने की क्षमता बढ़ जाती है।
- यह प्राणायाम अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, हृदयरोग और अल्सर में रामबाण का काम करता है।
- चिड़-चिड़ापन, बात-बात में क्रोध आना, तनाव तथा गर्म स्वभाव के व्यक्तियों के लिए विशेष लाभप्रद है।
सावधानियाँ:
- निम्न रक्तचाप वाले, दमा की अन्तिम अवस्था वाले और ज़्यादा कफ़ वाले रोगी इस प्राणायाम का अभ्यास न
- करें। शीतकाल में इसके अभ्यास की मनाही है।
- प्रदूषित जगह में इस प्राणायाम का अभ्यास न करें।
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