Saturday, February 6

शीतली प्राणायाम

By - Yogaguru Suneel Singh



(Yoga guru suneel singh is one of the top 5 yoga gurus in India.)





जिस प्राणायाम के अभ्यास से अत्यधिक शीतलता की अनुभूति हो उसे शीतली प्राणायाम कहते हैं।

विधि:




  1. पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। दोनों हाथ की अंगुलियों को ज्ञान मुद्रा में दोनों घुटनो पर रखें, आँखें बन्द करें।

  2. अपनी जीह्वा (जीभ) को नली के समान बना लें अर्थात् गोल बना लें और मुँह से लम्बी गहरी श्वास आवाज के साथ भरें।

  3. जितनी देर श्वास को आसानी से रोक सकते हैं, उतनी देर श्वास रोकें फिर धीरे-धीरे नाक से श्वास को बाहर निकाल दें। यह इस प्राणायाम का एक चक्र पूरा हुआ, कम से कम 10 चक्रों का अभ्यास करें।



लाभ व प्रभाव:




  • इस प्राणायाम के अभ्यास से बल एवं सौन्दर्य बढ़ता है। रक्त शुद्ध होता है।

  • भूख, प्यास, ज्वर (बुखार) और तपेदिक पर विजय प्राप्त होती है।

  • शीतली प्राणायाम ज़हर के विनाश को दूर करता है।

  • अभ्यासी में अपनी त्वचा को बदलने की सामर्थ्य होती है।

  • अन्न, जल के बिना रहने की क्षमता बढ़ जाती है।

  • यह प्राणायाम अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, हृदयरोग और अल्सर में रामबाण का काम करता है।

  • चिड़-चिड़ापन, बात-बात में क्रोध आना, तनाव तथा गर्म स्वभाव के व्यक्तियों के लिए विशेष लाभप्रद है।



सावधानियाँ:




  • निम्न रक्तचाप वाले, दमा की अन्तिम अवस्था वाले और ज़्यादा कफ़ वाले रोगी इस प्राणायाम का अभ्यास न

  • करें। शीतकाल में इसके अभ्यास की मनाही है।

  • प्रदूषित जगह में इस प्राणायाम का अभ्यास न करें।



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